बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार किसी भी बालक को रोजगार देना या उससे कार्य कराना दंडनीय अपराध है। अधिनियम के तहत दोषी नियोजकों पर 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना तथा दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
@ArunshankarP @UNICEFIndia https://t.co/zHW2XWUkZB
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अनुसार किसी भी बालक को रोजगार देना या उससे कार्य कराना दंडनीय अपराध है। अधिनियम के तहत दोषी नियोजकों पर 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का जुर्माना तथा दो वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
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