
व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’, 31 लाख रुपये लेकर बैंक पहुंचे बुजुर्ग।
साइबर पुलिस ने बचाई जीवनभर की कमाई
मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर ठगों ने डराया, तीन एफडी तुड़वाकर रकम ट्रांसफर करने ही वाले थे बुजुर्ग, यस बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला मामला
जोधपुर। एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल, मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी होने का दावा और गिरफ्तारी की धमकी… साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग को इस कदर डरा दिया कि वे अपनी जीवनभर की जमा पूंजी 31 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में जमा कराने बैंक पहुंच गए। बुजुर्ग ने तीन अलग-अलग फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तक तुड़वा दी थीं। गनीमत रही कि यस बैंक की मैनेजर को संदिग्ध लेनदेन का अंदेशा हो गया और उन्होंने तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दे दी। समय रहते पहुंची जोधपुर साइबर पुलिस ने बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट के जाल से बाहर निकालकर उनकी मेहनत की कमाई ठगों के हाथों में जाने से बचा ली।
गिरफ्तारी का डर दिखाकर 31 लाख रुपये ऐंठने की थी तैयारी
पुलिस के अनुसार, 14 अक्टूबर को बुजुर्ग के व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। इसके बाद ठगों ने बुजुर्ग को डराना शुरू कर दिया। उन्हें बताया गया कि उनके आधार कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग तथा अवैध लेनदेन में हुआ है और उनके खिलाफ मामला दर्ज है।
जालसाजों ने गिरफ्तारी का डर दिखाते हुए कहा कि यदि वे कार्रवाई से बचना चाहते हैं तो अपने बैंक खातों की पूरी रकम उनके बताए गए सरकारी खाते में वेरिफिकेशन के लिए जमा करा दें। कथित पुलिस अधिकारियों की धमकियों से घबराए बुजुर्ग उनकी बातों में आ गए और अपनी तीन एफडी तुड़वाकर 31 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए बैंक पहुंच गए।
बैंक मैनेजर की सतर्कता बनी सुरक्षा कवच
यस बैंक की मैनेजर मनीषा पंवार को बुजुर्ग द्वारा इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर किए जाने पर संदेह हुआ। उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल साइबर पुलिस थाना जोधपुर को सूचना दी। सूचना मिलते ही उप निरीक्षक राजेश कुमार और कांस्टेबल धीरेंद्र सिंह की टीम बैंक पहुंच गई।
पुलिस टीम ने बुजुर्ग को विश्वास में लिया और पूरी घटना की जानकारी जुटाई। इसके बाद उन्हें समझाया कि व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी की धमकी देना साइबर ठगी का आम तरीका है। पुलिस ने समय रहते बुजुर्ग को ठगों के प्रभाव से बाहर निकाला और 31 लाख रुपये की रकम ठगी होने से बचा ली।
पुलिस ने किया सतर्क रहने का आग्रह
पुलिस आयुक्त अंशुमन भोमिया के आदेशानुसार और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।
जोधपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या क्राइम ब्रांच जैसी कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। ऐसे कॉल पर गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन का डर दिखाकर पैसे मांगे जाएं तो घबराकर कोई रकम ट्रांसफर न करें।
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