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पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार सुरेंद्रनाथ कॉलेज आज एक ऐसे शर्मनाक विवाद के केंद्र में है जिसने पूरे शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है। कॉलेज के छात्रसंघ कक्ष (यूनियन रूम) का ताला करीब एक साल बाद क्या खुला, मानों पाप का कोई घड़ा फूट पड़ा हो। यहां से न केवल एक करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई है, बल्कि विलासिता और अपराध के ऐसे सामान मिले हैं जिन्हें देखकर पुलिस और प्रशासन भी दंग है। अलमारी में दबा था 'कुबेर का खजाना', दीमक चाट गए नोट राज्य सरकार के निर्देश पर जब मंगलवार को छात्रसंघ कक्ष की सफाई शुरू हुई, तो वहां रखी एक पुरानी लकड़ी की अलमारी से दो बड़े बक्से मिले। इन बक्सों में 100 और 500 रुपये के नोटों की गड्डियां ठसाठस भरी हुई थीं। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक यह रकम करीब एक करोड़ रुपये है। हैरानी की बात यह है कि लंबे समय से बंद रहने के कारण इस नकदी का एक बड़ा हिस्सा दीमकों ने खा लिया है। भाजपा का आरोप है कि यह पैसा छात्रों से अवैध वसूली और दाखिले के नाम पर की गई ठगी का है।तलाशी के दौरान कॉलेज परिसर के भीतर दो आलीशान एसी बेडरूम भी मिले हैं। इन कमरों में महंगे गद्दे, बिस्तर, एयर कंडीशनर और अटैच टॉयलेट जैसी तमाम सुख-सुविधाएं मौजूद थीं। आरोप है कि इन कमरों का इस्तेमाल तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेता देवाशीष बंद्योपाध्याय उर्फ "कानकाटा देबू" और उनके पुत्र द्वारा किया जाता था। हद तो तब हो गई जब यह बात सामने आई कि कॉलेज के कर्मचारियों से इन नेताओं की मालिश तक कराई जाती थी। हालांकि, नेताजी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। शराब, शबाब और कबाब का इंतजाम! कॉलेज परिसर से मिली चीजें किसी क्लब या शराबखाने की याद दिलाती हैं। पुलिस को छात्र कॉमन रूम से कंडोम के पैकेट, छत से शराब की बोतलें और एक काले पैकेट में छिपाकर रखी गई रिवॉल्वर बरामद हुई है। एक शिक्षण संस्थान में हथियार और इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री मिलने से छात्रों और अभिभावकों में भारी रोष है।मामले के तूल पकड़ते ही भाजपा विधायक सजल घोष मौके पर पहुंचे और उन्होंने इस पूरे मामले की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल छात्र परिषद के नेता दाखिले के नाम पर छात्रों से 20 हजार से 50 हजार रुपये तक की वसूली करते थे और यह पैसा ऊपर तक पहुंचता था। सजल घोष ने सवाल उठाया कि जिस छात्रसंघ की निधि महज कुछ हजार होनी चाहिए, वहां करोड़ों रुपये कहां से आए?। बता दें कि साल 2025 में हाई कोर्ट के आदेश के बाद ही इन कमरों को बंद किया गया था और अब जब ये खुले हैं तो बंगाल की राजनीति में नया उबाल आ गया है।

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