
देहरादून में संपन्न हुई उत्तराखंड संस्कृत संस्थान की जनपद स्तरीय प्रतियोगिता।द्रोणस्थली आर्ष कन्या गुरुकुल (नाटक), पीएमश्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (नृत्य) और श्री परशुराम चतुर्वेद विद्यालय (समूह गान) रहे अव्वल।
मंच पर गूंजते वैदिक संस्कृत श्लोक, संवादों में जीवंत होती भारतीय परंपराएं और शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं में झलकते संस्कार—कुछ ऐसा ही विहंगम दृश्य उत्तराखंड संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित जनपद स्तरीय संस्कृत छात्र प्रतियोगिता में देखने को मिला। देहरादून के छह विकासखंडों के कनिष्ठ वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित इस भव्य प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी अनूठी प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में मुख्य अतिथि टपकेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री कृष्णा गिरि जी महाराज, विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष जोशी और संस्कृत शिक्षा के सहायक निदेशक डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
इस अवसर पर श्री कृष्णा गिरि जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि "संस्कृत भाषा मात्र एक संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान, अटूट संस्कृति और हमारे सनातन संस्कारों की आधारशिला है।" वहीं जनपद संयोजक आचार्य मनोज शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ उनके भीतर आत्मविश्वास, रचनात्मकता, वाक्-कौशल और मंचीय प्रतिभा को निखारने का बेहतरीन माध्यम हैं।
गणमान्य जनों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम को सफल बनाने में मनोज किशोर पंत, डा. शैलेंद्र डंगवाल, डा. सीमा, संतोष विद्यालंकार के साथ-साथ श्री महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा, डा. जीवन जोशी, अंजू श्रीवास्तव, बबीता धीमान, सूर्य प्रकाश रतूड़ी और सुभाष जैसे अनेक प्रबुद्ध जनों और शिक्षाविदों का विशेष सहयोग रहा। सभी अतिथियों ने विजेताओं को पुरस्कार व प्रशस्ति पत्र देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।