
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला झाबुआ जिले से सामने आया है, जहां लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय बालक छात्रावास के अधीक्षक के बिल को मंजूर करने के एवज में 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए एक लिपिक (क्लर्क) को रंगे हाथों धर दबोचा है। यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश देती है।
मिली जानकारी के अनुसार, सेमलिया बड़ी गांव के शासकीय बालक छात्रावास के अधीक्षक धूम सिंह सिंगाड़ पिछले कुछ समय से अपने निलंबन अवधि के आठ महीने के वेतन से जुड़े करीब 2.30 लाख रुपये के बकाया बिल को पास कराने के लिए कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। आरोप है कि इस बिल को मंजूरी देने के बदले उनसे रिश्वत की मांग की जा रही थी। इस बात से परेशान होकर अधीक्षक ने लोकायुक्त पुलिस से इसकी आधिकारिक शिकायत कर दी।
शिकायत का सत्यापन करने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से एक जाल बिछाया। निरीक्षक आशुतोष मिठास ने बताया कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी जयनारायण बैरागी ने शिकायतकर्ता से कहा था कि वह रिश्वत की रकम उनके कार्यालय में पदस्थ लिपिक पवन सिंह बिलवाल को दे दे। जैसे ही लिपिक पवन सिंह बिलवाल ने 10,000 रुपये की घूस ली, लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथों पकड़ लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी और लिपिक दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। लोकायुक्त पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि इसमें शामिल अन्य लोगों की संलिप्तता का भी पता लगाया जा सके।
#JhabuaNews #LokayuktaAction #MadhyaPradesh #AntiCorruption #MPNews