
सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद मिट्टी से जुड़ाव जड़ों की ओर लौटना मजबूरी नहीं, गर्व और आत्म-संतोष का प्रतीक
विशेष संवाददाता गिरिडीह लाइव
जीवन में सफलता, ऊँचे मुकाम और आधुनिक सुख-सुविधाएँ हासिल करने के बाद भी अपनी जड़ों और मिट्टी से जुड़े रहना हर किसी के बस की बात नहीं होती। अक्सर देखा जाता है कि लोग कामयाबी की बुलंदियों को छूने के बाद अपने पैतृक परिवेश से दूर हो जाते हैं। लेकिन समाज में ऐसे भी कई लोग हैं जिनके लिए अपनी जड़ों की ओर वापस लौटना किसी मजबूरी का परिणाम नहीं, बल्कि गर्व, परंपरा सम्मान और आत्म-संतोष का एक सचेत फैसला होता है।
हाल ही में सामने आए NRCPL के डारेक्टर निरंजन राय द्वारा एक प्रेरक दृश्य में देखा गया है कि खेत में धान की रोपाई का काम कर रहे है। कीचड़ और पानी से भरे खेतों में निरंजन राय ने पारंपरिक तरीके से हाथों से धान के रोपते नज़र आ रहे हैं। इस दौरान सादगी और कड़ी मेहनत का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जहाँ निरंजन राय आपसी सहयोग और उमंग के साथ खेतों में पसीना बहाए ।
उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी धन-दौलत और नाम कमा लिया जाए, लेकिन जो आत्म-संतोष खेत की मिट्टी की खुशबू और अपनी परंपराओं से जुड़कर मिलता है, उसकी तुलना किसी आधुनिक सुख-सुविधा से नहीं की जा सकती।
यह पहल समाज के लिए एक बड़ा संदेश देती है कि कृषि और ग्रामीण जीवन हमारी पहचान का मूल आधार हैं। अपनी जड़ों पर गर्व करना और कृषि कार्यों में हाथ बँटाना आत्म-सम्मान का प्रतीक है।
खेत में उतरकर मेहनत करना यह दर्शाता है कि सफलता व्यक्ति को नम्र बनाती है और अपनी मिट्टी व किसान भाइयों के प्रति सम्मान भाव को और बढ़ाती है।
यह दृश्य इस बात का जीवंत प्रमाण है कि इंसान चाहे तरक्की के कितने भी ऊँचे मुकाम पर पहुँच जाए, अपनी मिट्टी से जुड़कर ही उसे असली पहचान और मानसिक शांति मिलती है।