
बांगरमऊ CHC में ‘दक्षिणा’ के नाम पर वसूली का आरोप! गरीब बोला—‘बेटा फल का ठेला लगाता है, 300 रुपये से काम चला लो’
बांगरमऊ/उन्नाव। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांगरमऊ के डिलीवरी वार्ड में कथित वसूली का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव के बाद मरीजों के परिजनों से ‘दक्षिणा’ के नाम पर मनमाने तरीके से रकम मांगी जा रही है। आरोप सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि कई लोगों से वसूली किए जाने की बात सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से भी उनकी क्षमता से अधिक रकम देने का दबाव बनाया गया। एक पीड़ित की बेबसी इन शब्दों में सामने आई—“साहब, बेटा फल का ठेला लगाता है, हम गरीब हैं… इतने से ही काम चला लो, 300 रुपये से काम नहीं चलता, स्टाफ में काफी लोग हैं।”
300 रुपये भी कम पड़े तो क्या गरीब की मजबूरी नहीं दिखी?
आरोप है कि कुछ परिजन सिर्फ 200-300 रुपये ही दे पाने की स्थिति में थे। उन्होंने अपनी आर्थिक मजबूरी बताकर इतनी ही रकम स्वीकार करने की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि उनकी बात नहीं मानी गई।
कुछ लोगों ने कथित वसूली का विरोध किया तो उन्हें डराने-धमकाने और रेफर करने तक की धमकी दिए जाने का आरोप है। इतना ही नहीं, आरोप है कि कुछ परिजनों द्वारा दी जा रही छोटी रकम को कथित तौर पर लेने से इनकार करते हुए फेंक दिया गया।
‘दक्षिणा’ या मजबूरी का फायदा?
सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद यदि कोई परिवार अपनी इच्छा से खुशी में कुछ देता है, तो उसे अलग परिस्थिति माना जा सकता है। लेकिन यदि दक्षिणा के नाम पर रकम तय की जाए, गरीब परिवारों पर दबाव बनाया जाए या विरोध करने पर रेफर करने की धमकी दी जाए, तो मामला गंभीर हो जाता है।
यहां सवाल सिर्फ रकम का नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में गरीब मरीजों और उनके परिजनों के साथ व्यवहार का है।
स्वास्थ्य विभाग कब लेगा संज्ञान?
बांगरमऊ CHC में सामने आए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि किसने रकम मांगी, कितने लोगों से कथित वसूली हुई, रकम किसके पास जाती है और क्या डिलीवरी वार्ड में ‘दक्षिणा’ के नाम पर कोई अनौपचारिक व्यवस्था चल रही है।
सबसे बड़ा सवाल—जिस गरीब परिवार के लिए 300 रुपये भी बड़ी रकम हैं, उसके सामने अगर अस्पताल में ‘दक्षिणा’ की कीमत तय कर दी जाए तो वह इलाज कराए या अपनी जेब देखे?
आरोप गंभीर हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही होगी। लेकिन यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सिर्फ किसी कर्मचारी की मनमानी नहीं, बल्कि गरीब मरीजों की मजबूरी के कथित शोषण का मामला होगा।
Unnao, Unnao | Aug 23, 2026