देवास में अवैध कॉलोनियों का खेल
आदेश तो कर दिया साहब लेकिन बुलडोजर कब गरजेगा
निर्माण पर बुलडोजर और पुलिस केस के निर्देश हो चुके हैं
क्या निचला अमला करेगा अमल?
अब देखना है जमीन पर कितना असर
पांच दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार
देवास। देवास शहर और आसपास के इलाकों में लंबे समय से तेजी से पैर पसार रही अवैध कॉलोनियों के मामले में अब नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। गत दिवस आयुक्त ने उपयंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध कॉलोनियों में किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं होना चाहिए। यदि निर्माण किया जाता है तो उसे तत्काल तोड़ा जाए और संबंधित मामले में पुलिस प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाए।
आयुक्त का यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देवास शहर के साथ ही शहर के आसपास और बायपास रोड के किनारे बड़ी संख्या में ऐसी कॉलोनियां आकार ले चुकी हैं, जिनको लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। "खबरों की धड़कन" ने भी अवैध कॉलोनियों और जमीनों पर नियमों को दरकिनार कर प्लॉटिंग किए जाने के मामले को कई बार प्रमुखता से उठाया है। समाचारों के माध्यम से यह सवाल लगातार सामने आता रहा है कि आखिर किस तरह बिना आवश्यक अनुमति और प्रक्रिया के कॉलोनियां विकसित होती चली जाती हैं और संबंधित स्तर पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती।
खबरें कई बार चलीं, सवाल अब भी वही
देवास में अवैध कॉलोनियों का मामला नया नहीं है। शहर के बाहरी हिस्सों से लेकर बायपास रोड के आसपास तक कई स्थानों पर जमीनों की प्लॉटिंग और कॉलोनी विकसित किए जाने की गतिविधियां लगातार चर्चा में रही हैं। इन मामलों में नगर निगम की भूमिका को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर तो यहां तक चर्चाएं सामने आती रही हैं कि कुछ मामलों में नगर निगम के कतिपय अधिकारी-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के कारण अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अवैध कॉलोनियों का निर्माण नियम विरुद्ध है तो उन पर समय रहते रोक क्यों नहीं लग पाती?
यही वजह है कि अब आयुक्त के सख्त निर्देश ने इस पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
आदेश सख्त... लेकिन अमल का इंतजार
आयुक्त दलीप कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध कॉलोनी में निर्माण होने पर उसे तत्काल तोड़ा जाए और पुलिस कार्रवाई भी की जाए। आदेश में किसी तरह की नरमी की गुंजाइश नजर नहीं आती।
लेकिन इस आदेश के पांच दिन बीत जाने के बाद भी सवाल यह है कि जमीन पर कार्रवाई कहां है?
आदेश के बाद अभी तक नगर निगम का कोई अमला अवैध कॉलोनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करता नजर नहीं आया है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयुक्त के निर्देश केवल बैठक की कार्रवाई तक सीमित रहते हैं या वास्तव में मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण और प्लॉटिंग पर कार्रवाई शुरू होती है।
असली परीक्षा निचले अमले की
अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई में सबसे बड़ी चुनौती आदेश जारी करना नहीं, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से लागू करना है। आयुक्त ने उपयंत्रियों को सीधे निर्देश दिए हैं, लेकिन मौके पर कार्रवाई करने वाला अमला आखिर किस तरह काम करता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
यदि निचले स्तर पर अधिकारी-कर्मचारी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं तो शहर में तेजी से फैल रही अनधिकृत प्लॉटिंग पर अंकुश लग सकता है। लेकिन यदि पुराने ढर्रे पर ही कार्रवाई कागजों तक सीमित रही तो आयुक्त की सख्ती भी बेअसर साबित हो सकती है।
यानी अब सवाल यह नहीं है कि आदेश हुआ या नहीं... सवाल यह है कि आदेश के बाद बुलडोजर कब पहुंचेगा?
प्लॉट खरीदने वालों पर भी संकट
अवैध कॉलोनियों का असर केवल कॉलोनी विकसित करने वालों तक सीमित नहीं रहता। ऐसी जगहों पर प्लॉट खरीदने वाले आम नागरिक भी बाद में फंस सकते हैं। सड़क, नाली, बिजली, पानी, सीवरेज और अन्य मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ वैधता से जुड़े सवाल सामने आने पर खरीदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी केवल अवैध निर्माण तोड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी कॉलोनियों में प्लॉटिंग शुरू होने से पहले ही रोक लगाने की व्यवस्था भी प्रभावी करनी होगी।
अब निगाह नगर निगम की अगली कार्रवाई पर
देवास में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा वर्षों से चर्चा में है। अब पहली बार मौजूदा निगमायुक्त ने समीक्षा बैठक में इसे लेकर सीधे और कड़े शब्दों में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में शहरवासियों की निगाह नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
क्या बायपास और शहर के आसपास आकार ले चुकी अवैध कॉलोनियों की जांच होगी? क्या निर्माणाधीन अवैध निर्माणों पर तत्काल बुलडोजर चलेगा? क्या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पुलिस प्राथमिकी दर्ज होगी? और क्या उन अधिकारियों-कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय होगी, जिनकी निगरानी में यह सब होता रहा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।
फिलहाल आयुक्त का आदेश स्पष्ट है—अवैध कॉलोनी में निर्माण नहीं होगा... निर्माण हुआ तो तत्काल तोड़ा जाएगा और पुलिस कार्रवाई भी होगी। अब देखना यही है कि यह सख्ती फाइलों से निकलकर जमीन पर कब दिखाई देती है।