
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार पर किसानों को समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने से रोकने के लिए लगातार नियम बदलने का गंभीर आरोप लगा है। प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि एग्री स्टेक पंजीयन की उलझनों के बाद अब संयुक्त खाताधारकों और सहखातेदारों के लिए अलग-अलग अनिवार्य पंजीयन का नया फरमान जारी कर दिया गया है। जमीन के खसरे में दर्ज सभी हिस्सेदारों (भाई, बहन, बेटियों) का अलग-अलग डिजिटल पंजीयन अनिवार्य करने से किसानों की परेशानी चरम पर पहुंच गई है।
श्री शुक्ला ने चेताया कि इस व्यवस्था से खासकर प्रवासी मजदूरों, अन्य राज्यों में ब्याही गई बेटियों और उन परिवारों को भारी नुकसान होगा जहां सहखातेदार की मृत्यु के बाद फौती और नामांतरण की प्रक्रिया लंबित है। छोटे विवादों या कागजी फेरबदल के कारण लाखों किसान समय पर पंजीयन नहीं करा पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल रिकॉर्ड के बहाने पंजीकृत किसानों की संख्या घटाने और उन्हें धान बेचने से वंचित करने की सोची-समझी साजिश रची जा रही है।
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