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Musahri, Muzaffarpur | Jun 23, 2026

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Musahri, Muzaffarpur | Jun 24, 2026

PK ने भरत भूषण तिवारी के परिजनों से उनके घर पहुंच कर की मुलाकात और महापंचायत में हुए शामिल, बोले - भरत तिवारी के परिजनों की ओर से हम मांग कर रहे हैं कि जिन्होंने हत्या की उनके साथ-साथ उन लोगों पर भी कार्रवाई हो जिनके कहने पर हत्या की गई है*

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर आज भोजपुर जिले के शाहपुर में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के घर उनके परिजनों से मिलने पहुंचे। पीके ने परिजनों से मिलने के बाद गांव में आयोजित श्रद्धांजलि सह महापंचायत सभा में भी हिस्सा लिया और भरत तिवारी के लिए न्याय की मांग की। उन्होंने की पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर भंभीर सवाल उठाए और इसके लिए सीएम सम्राट चौधरी के बयान का भी हवाला दिया। 

प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार ने मामले को पूरी तरह से मिस हैंडल किया। अब जब समाज का दबाव हुआ है तो अब छोटे पदाधिकारियों की बलि चढ़ाकर अपनी जान बचाना चाह रहे हैं, परिवार कह रही हैं कि उनको पैसा और नौकरी नहीं चाहिए उनको न्याय चाहिए। न्याय का मतलब है ये नहीं है कि यहां के थानेदार को सस्पेंड कर दिया जाए और डीएसपी पर एक्शन हो, न्याय का मतलब ये है कि जिन लोगों ने पटना में बैठकर उस बच्चे को मारने का आदेश दिया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। जिन लोगों ने इस हत्या को अंजाम दिया है उसके साथ-साथ उन लोगों का भी जांच हो जिनके कहने पर इस हत्या को अंजाम दिया गया है। पीके ने कहा कि भरत तिवारी अपनी लड़ाई नहीं लड़ रहे थे। गंगा के कटाव से जो जमुनिया गांव के 80 घर के लोग विस्थापित होकर आए थे, उनको बिजली और पानी मिले वह उसकी लड़ाई लड़ रहे थे। 

*प्रशांत किशोर ने CM सम्राट चौधरी को घेरा, बोले - मुख्यमंत्री का बयान असंवेदनशील, पुलिसिंग का मतलब गोली चलाना नहीं है, पुलिस का काम समाज की रक्षा करना है, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो समाज को खड़ा होना पड़ेगा*

पीके ने कहा कि न्याय का मतलब ये है कि इस राज्य के मुखिया को बताना पड़ेगा कि जब वो खड़े होकर यह बयान दे रहे थे कि डीजीपी ने हमको खबर दी है कि एक लड़का बंदूक दिखा रहा है तो मैंने कहा कि हमारे पुलिस को कोई बंदूक कैसे दिखा रहे है। पीके ने कहा कि एक ऐसे संवेदनशील नेता का बोलने का परिणाम है कि जो यह समझता है कि पुलिसिंग का मतलब है गोली चलाना। पीके ने कहा कि पुलिस का काम गोली चलाना नहीं है। पुलिस का काम समाज की रक्षा करना है और जब रक्षक ही भक्षक बन गए हैं तो समाज को खड़ा होना पड़ेगा। भरत भूषण तिवारी की मां और उनके परिजन अकेले नहीं है। उनके साथ पूरा समाज खड़ा है हम लोग भी इनके साथ खड़े रहेंगे। पीके ने कहा कि न्यायिक चांज की घोषणा की गई है लेकिन अभी तक यह नहीं बताया है कि उस जांच में कौन जांच करेगा। उस जांच की परिधि क्या होगी? क्या उस जांच में गृह मंत्री के भूमिका की भी चांज होगी? क्या एसटीएफ के उस पदाधिकारी भी जांच होगी जिसने पटना से मारने का आदेश दिया है। क्या उस मजिस्ट्रेट पर कार्रवाई होगी जिसने गोली चलाने के आदेश पर साईन किया है?

PK ने भरत भूषण तिवारी के परिजनों से उनके घर पहुंच कर की मुलाकात और महापंचायत में हुए शामिल, बोले - भरत तिवारी के परिजनों की ओर से हम मांग कर रहे हैं कि जिन्होंने हत्या की उनके साथ-साथ उन लोगों पर भी कार्रवाई हो जिनके कहने पर हत्या की गई है* जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर आज भोजपुर जिले के शाहपुर में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के घर उनके परिजनों से मिलने पहुंचे। पीके ने परिजनों से मिलने के बाद गांव में आयोजित श्रद्धांजलि सह महापंचायत सभा में भी हिस्सा लिया और भरत तिवारी के लिए न्याय की मांग की। उन्होंने की पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर भंभीर सवाल उठाए और इसके लिए सीएम सम्राट चौधरी के बयान का भी हवाला दिया। प्रशांत किशोर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार ने मामले को पूरी तरह से मिस हैंडल किया। अब जब समाज का दबाव हुआ है तो अब छोटे पदाधिकारियों की बलि चढ़ाकर अपनी जान बचाना चाह रहे हैं, परिवार कह रही हैं कि उनको पैसा और नौकरी नहीं चाहिए उनको न्याय चाहिए। न्याय का मतलब है ये नहीं है कि यहां के थानेदार को सस्पेंड कर दिया जाए और डीएसपी पर एक्शन हो, न्याय का मतलब ये है कि जिन लोगों ने पटना में बैठकर उस बच्चे को मारने का आदेश दिया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। जिन लोगों ने इस हत्या को अंजाम दिया है उसके साथ-साथ उन लोगों का भी जांच हो जिनके कहने पर इस हत्या को अंजाम दिया गया है। पीके ने कहा कि भरत तिवारी अपनी लड़ाई नहीं लड़ रहे थे। गंगा के कटाव से जो जमुनिया गांव के 80 घर के लोग विस्थापित होकर आए थे, उनको बिजली और पानी मिले वह उसकी लड़ाई लड़ रहे थे। *प्रशांत किशोर ने CM सम्राट चौधरी को घेरा, बोले - मुख्यमंत्री का बयान असंवेदनशील, पुलिसिंग का मतलब गोली चलाना नहीं है, पुलिस का काम समाज की रक्षा करना है, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो समाज को खड़ा होना पड़ेगा* पीके ने कहा कि न्याय का मतलब ये है कि इस राज्य के मुखिया को बताना पड़ेगा कि जब वो खड़े होकर यह बयान दे रहे थे कि डीजीपी ने हमको खबर दी है कि एक लड़का बंदूक दिखा रहा है तो मैंने कहा कि हमारे पुलिस को कोई बंदूक कैसे दिखा रहे है। पीके ने कहा कि एक ऐसे संवेदनशील नेता का बोलने का परिणाम है कि जो यह समझता है कि पुलिसिंग का मतलब है गोली चलाना। पीके ने कहा कि पुलिस का काम गोली चलाना नहीं है। पुलिस का काम समाज की रक्षा करना है और जब रक्षक ही भक्षक बन गए हैं तो समाज को खड़ा होना पड़ेगा। भरत भूषण तिवारी की मां और उनके परिजन अकेले नहीं है। उनके साथ पूरा समाज खड़ा है हम लोग भी इनके साथ खड़े रहेंगे। पीके ने कहा कि न्यायिक चांज की घोषणा की गई है लेकिन अभी तक यह नहीं बताया है कि उस जांच में कौन जांच करेगा। उस जांच की परिधि क्या होगी? क्या उस जांच में गृह मंत्री के भूमिका की भी चांज होगी? क्या एसटीएफ के उस पदाधिकारी भी जांच होगी जिसने पटना से मारने का आदेश दिया है। क्या उस मजिस्ट्रेट पर कार्रवाई होगी जिसने गोली चलाने के आदेश पर साईन किया है?

Musahri, Muzaffarpur | Jun 24, 2026

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