
सोयाबीन फसल में कीट एवं रोग प्रकोप की आशंका, कृषि विभाग ने जारी की वैज्ञानिक सलाह
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जिले में वर्तमान समय में सोयाबीन की फसल लगभग 40 से 50 दिन की अवस्था में है। लगातार हो रही वर्षा, खेतों में अधिक नमी और अनुकूल मौसम की स्थिति के चलते सोयाबीन फसल में विभिन्न प्रकार के कीट एवं रोगों का प्रकोप होने की संभावना बनी हुई है। इसे देखते हुए कृषि विभाग, विदिशा ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने तथा कीट अथवा रोग के लक्षण दिखाई देने पर ही अनुशंसित कीटनाशक एवं फफूंदनाशक का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने की सलाह दी है।
कृषि विभाग के अनुसार इस अवस्था में किसान खेत में विशेष रूप से पौधों की पत्तियों, तनों और फलियों का नियमित निरीक्षण करें। फसल में किसी भी प्रकार के कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर पहले उसकी सही पहचान करना जरूरी है। इसके बाद ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार निर्धारित मात्रा में दवा का छिड़काव किया जाए।
प्रमुख कीट एवं उनके नियंत्रण की अनुशंसा -
तम्बाकू की इल्ली: इसके नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी की 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा की अनुशंसा की गई है। सेमीलूपर इल्ली: इस कीट के प्रकोप की स्थिति में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग किया जा सकता है। चक्र भृंग: नियंत्रण के लिए थायमिथोक्साम 21.7 प्रतिशत एससी की 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा अनुशंसित की गई है। बिहार हेयरी कैटरपिलर: इसके नियंत्रण के लिए फ्लूबेंडियामाइड 39.35 प्रतिशत एससी की 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा का उपयोग करने की सलाह दी गई है। तना मक्खी एवं सफेद मक्खी: इनके नियंत्रण के लिए थायोमेथोक्साम 12.60 प्रतिशत + लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत जेडसी की 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा अनुशंसित है।
रोगों की रोकथाम के लिए भी सतर्क रहें।
वर्षा एवं अधिक नमी की परिस्थितियों में सोयाबीन फसल में विभिन्न रोगों का प्रकोप भी बढ़ सकता है। कृषि विभाग ने रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट की स्थिति में फ्लक्सापायरोक्साड + पायराक्लोस्ट्रोबिन की 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा तथा एन्थ्रेक्नोज रोग के नियंत्रण के लिए टेबुकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ईसी की 625 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर मात्रा की अनुशंसा की है।
अनावश्यक कीटनाशक छिड़काव से बचें -
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि केवल आशंका के आधार पर खेत में कीटनाशकों या फफूंदनाशकों का अनावश्यक छिड़काव न करें। पहले फसल का निरीक्षण कर कीट अथवा रोग की सही पहचान करें और उसके बाद ही अनुशंसित दवा का निर्धारित मात्रा में प्रयोग करें।
दवाओं को आपस में मिलाकर छिड़काव करने से पहले उनकी संगतता की जानकारी लेना भी आवश्यक है। किसी भी प्रकार की शंका होने पर कृषि विभाग अथवा कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेने की अपील की गई है।
कृषि विभाग की वैज्ञानिक सलाह है कि “फसल की नियमित निगरानी करें, सही समय पर सही दवा का प्रयोग करें और सोयाबीन की उपज को सुरक्षित रखें।” किसानों की सजगता और समय पर किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन से कीट एवं रोगों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। #vidisha