
देवास में हरियाली पर आरी?
क्या बिना अनुमति काटे जा रहे हैं पेड़, या नियमों का हो रहा है पालन?
18 मार्च 2026 की अधिसूचना के बाद बदले नियम
अब रेंज ऑफिसर की अनुमति के बिना नहीं काटा जा सकता वृक्ष
ग्रीन आर्मी ने नगर निगम पर लगाए गंभीर आरोप, वन विभाग को सौंपे वीडियो साक्ष्य
कानून की कसौटी पर विकास कार्य, जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
देवास। शहरों के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। सड़क चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्यों के दौरान अक्सर पेड़ों की कटाई का मुद्दा विवाद का कारण बनता है। देवास में भी इन दिनों यही सवाल चर्चा के केंद्र में है। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रही वृक्ष कटाई को लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था ग्रीन आर्मी देवास ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संस्था का आरोप है कि नगर निगम क्षेत्र में कई स्थानों पर वैधानिक अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई की जा रही है, जो कानून का उल्लंघन है।
क्या कहते हैं नए नियम?
मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 18 मार्च 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 के तहत नगरीय क्षेत्रों में वृक्षों की कटाई की प्रक्रिया को और स्पष्ट किया है। अधिसूचना के अनुसार नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में किसी भी वृक्ष को काटने या हटाने से पहले संबंधित क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंज ऑफिसर) से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। वहीं, अपील की स्थिति में सहायक वन संरक्षक स्तर के अधिकारी को अपीलीय प्राधिकारी बनाया गया है।
यानी अब विकास कार्यों के लिए भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना वृक्षों की कटाई नहीं की जा सकती।
ग्रीन आर्मी के आरोप क्या हैं?
ग्रीन आर्मी देवास का दावा है कि शहर में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है, लेकिन इसके लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति नहीं ली गई। संस्था के संयोजक चेतन जैन का कहना है कि उनकी टीम ने कई स्थानों का निरीक्षण कर कथित अवैध कटाई के वीडियो साक्ष्य एकत्रित किए हैं और इन्हें वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिया है।
संस्था का आरोप है कि यदि नगर निगम ने बिना वृक्ष अधिकारी की अनुमति के पेड़ों की कटाई कराई है, तो यह मध्यप्रदेश वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम, 2001 का उल्लंघन है और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों पर कानूनी कार्रवाई होना चाहिए।
कानून क्या कहता है?
कानूनी व्यवस्था का उद्देश्य केवल पेड़ों की सुरक्षा नहीं, बल्कि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है। किसी वृक्ष को काटने से पहले उसकी आवश्यकता, विकल्प और पर्यावरणीय प्रभाव का परीक्षण किया जाता है। इसी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति अनिवार्य की गई है।
यदि किसी मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, किसी भी कार्रवाई का निर्णय जांच और सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर ही होता है।
अब निगाहें वन विभाग पर
ग्रीन आर्मी द्वारा शिकायत और वीडियो साक्ष्य सौंपे जाने के बाद अब यह मामला वन विभाग के पास पहुंच चुका है। यदि विभाग जांच में आरोपों की पुष्टि करता है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि नगर निगम के पास आवश्यक अनुमति या अन्य वैधानिक दस्तावेज मौजूद हैं, तो जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल
देवास में चल रहे विकास कार्यों के बीच अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या पेड़ों की कटाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है, या फिर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई है? इस सवाल का जवाब अब वन विभाग की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही सामने आएगा।