
डेयरी क्षेत्र में निवेश, आधुनिक प्रसंस्करण एवं किसानों की आय बढ़ाने के लिए जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन
दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 का अधिकाधिक लाभ उठाकर जालौन को डेयरी उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने का आह्वान - जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय
जितेंद्र गुप्ता ✍️। जालौन
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में डेयरी उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों (एमपीसी), दुग्ध उत्पादकों, सहकारी संस्थाओं, निजी निवेशकों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति-2022 के विभिन्न प्रावधानों, अनुदानों एवं निवेश की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य है तथा देश के कुल दुग्ध उत्पादन में प्रदेश का लगभग 16 प्रतिशत योगदान है। इसके बावजूद प्रदेश में विपणन योग्य अधिशेष दूध का लगभग 10 प्रतिशत ही प्रसंस्कृत हो रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 17 प्रतिशत है। ऐसे में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों का निर्माण तथा आधुनिक डेयरी उद्योगों की स्थापना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण के प्रति बढ़ती जागरूकता, लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति, आधुनिक तकनीकों की उपलब्धता तथा पर्याप्त कच्चे माल के कारण डेयरी उद्योग में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार की इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में डेयरी आधारित उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करना,दुग्ध उत्पादकों को उनके दूध का लाभकारी एवं बाजार आधारित मूल्य उपलब्ध कराना, दुग्ध प्रसंस्करण को वर्तमान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक पहुंचाना तथा स्थापित प्रसंस्करण क्षमता को विपणन योग्य अधिशेष के 44 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत तक विकसित करना है। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्कृत दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, अन्य राज्यों एवं विदेशों में निर्यात को बढ़ावा देना, डेयरी उद्योग में नए रोजगार सृजित करना, मानव संसाधन की दक्षता एवं कौशल विकास करना, सूचना प्रौद्योगिकी आधारित समाधान अपनाना, बाजार अभिसूचना (मार्केट इंटेलिजेंस) के लिए सशक्त डाटाबेस विकसित करना तथा प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों, दुग्ध संघों एवं प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (पीसीडीएफ) में सुधार लाना भी इस नीति के प्रमुख उद्देश्य हैं। साथ ही निवेशकों की सुविधा के लिए सभी प्रक्रियाओं का सरलीकरण भी किया गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि इस नीति के अंतर्गत एफपीओ, मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां, सहकारी संस्थाएं तथा निजी उद्यमी नवीन (ग्रीनफील्ड) डेयरी एवं दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, विद्यमान (ब्राउनफील्ड) इकाइयों के न्यूनतम 25 प्रतिशत क्षमता विस्तार, कैटल फीड एवं पशु पोषण उत्पाद निर्माण इकाइयों की स्थापना एवं विस्तार, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों जैसे पनीर, चीज़, आइसक्रीम आदि के निर्माण, आधुनिक डेयरी तकनीक, ट्रेसेबिलिटी, एससीएडीए (SCADA) प्रणाली की स्थापना, मिल्क चिलिंग सेंटर, बल्क मिल्क कूलर, रेफ्रिजरेटेड एवं इंसुलेटेड वैन, रोड मिल्क टैंकर, आइसक्रीम ट्रॉली सहित कोल्ड चेन अवसंरचना विकसित करने के लिए विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीति के अंतर्गत डेयरी प्रसंस्करण एवं दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों, पशु आहार निर्माण इकाइयों तथा आधुनिक तकनीकी उन्नयन के लिए प्लांट एवं मशीनरी, तकनीकी सिविल कार्य तथा स्पेयर पार्ट्स पर 35 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान निर्धारित सीमा तक उपलब्ध कराया जाएगा। फील्ड स्तर पर ट्रेसेबिलिटी एवं गुणवत्ता नियंत्रण उपकरण, स्वचालित मिल्क कलेक्शन यूनिट, विलेज लेवल कलेक्शन सेंटर, चिलिंग प्लांट एवं कोल्ड चेन अवसंरचना पर भी निर्धारित सीमा तक पूंजीगत सहायता प्रदान की जाएगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों द्वारा स्थापित मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पाद इकाइयों को प्लांट एवं मशीनरी पर 50 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य में उत्पादित प्रसंस्कृत दुग्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एयरपोर्ट एवं समुद्री बंदरगाह तक परिवहन व्यय पर सहायता, निर्यात हेतु एफओबी मूल्य पर प्रोत्साहन तथा विदेशों में उत्पादों के नमूने भेजने पर भी अनुदान का प्रावधान किया गया है। गुणवत्ता सुधार के लिए आईएसओ-14001, आईएसओ-22000, एचएसीसीपी, सेनेटरी एवं फाइटोसैनिटरी जैसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन तथा परीक्षण शुल्क पर अनुदान दिया जाएगा। पेटेंट एवं डिज़ाइन पंजीकरण हेतु व्यय का 75 प्रतिशत तक निर्धारित सीमा में प्रतिपूर्ति की जाएगी।
जिलाधिकारी ने बताया कि नई डेयरी इकाइयों को निर्धारित अवधि तक विद्युत शुल्क की प्रतिपूर्ति, भूमि क्रय अथवा लीज पर स्टाम्प शुल्क की प्रतिपूर्ति, आरक्षित श्रेणी की भूमि के श्रेणी परिवर्तन में सुविधा, कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन शुल्क एवं बाह्य विकास शुल्क में नियमानुसार छूट उपलब्ध कराई जाएगी। औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर स्थापित डेयरी इकाइयों एवं चिलिंग प्लांटों को सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए भी अनुदान दिया जाएगा, जिससे ऊर्जा लागत कम होगी तथा हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध उत्पादकों को स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, नस्ल सुधार, पशुपालन एवं वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एफपीओ, एमपीसी, सहकारी संस्थाओं, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के प्रबंधकों तथा कर्मचारियों को तकनीकी एवं वित्तीय दक्षता संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समर्पित ऑनलाइन पोर्टल, डाटाबेस मैनेजमेंट एवं प्रोजेक्ट फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना की जाएगी, जिससे निवेशकों को सभी विभागों की स्वीकृतियां एकीकृत प्रणाली के माध्यम से प्राप्त हो सकेंगी तथा आवेदन प्रक्रिया सरल एवं पारदर्शी बनेगी। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (पीसीडीएफ) एवं दुग्ध सहकारी समितियों में सुधार, सार्वजनिक एवं निजी निवेश को बढ़ावा, दुग्ध विपणन व्यवस्था को अधिक प्रतिस्पर्धी एवं प्रभावी बनाने के भी प्रावधान इस नीति में किए गए हैं। साथ ही राज्य स्तर, मुख्यालय स्तर एवं जनपद स्तर पर विभिन्न समितियों के माध्यम से परियोजनाओं का मूल्यांकन, अनुमोदन, क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाएगा तथा तकनीकी विशेषज्ञों का समूह भी गठित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद के अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादकों, एफपीओ, मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों तथा निजी उद्यमियों को इस नीति का लाभ दिलाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि जालौन में डेयरी उद्योग की व्यापक संभावनाएं हैं और यदि उद्यमी इस नीति के अंतर्गत निवेश करते हैं तो किसानों को उनके दूध का बेहतर मूल्य मिलेगा, दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ेगी, मूल्य संवर्धित उत्पादों का उत्पादन होगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। गोष्ठी में उपस्थित निवेशकों एवं उद्यमियों को नीति के विभिन्न प्रावधानों, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग एवं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी गई तथा उनके प्रश्नों का समाधान भी किया गया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, उप कृषि निदेशक एसके उत्तम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, डेयरी उद्यमी, एफपीओ, दुग्ध उत्पादक, सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
#Orai #jalaun #dmjalaun #jalaunnews
Orai, Jalaun | Aug 5, 2026