
#चित्रकूट पहुंचे गौ सेवा आयोग के सदस्य
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के सदस्य रमाकान्त उपाध्याय की अध्यक्षता गौशालाओं से संबंधित बैठक विकास भवन सभागार में संपन्न हुई। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि जनपद अन्तर्गत 282 अस्थायी, 07 वृहद/स्थायी 02 शहरी एवं 02 कान्हा गोआश्रय स्थलों को मिलाकर 293 गोआश्रय स्थलों में कुल 56056 गोवंश संर क्षित हैं।
माननी सदस्य द्वारा समस्त खण्ड विकास अधिकारियों निर्देशित किया गया कि जनपद की समस्त गोआश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों को भूसा, हरा चारा, पशु आहार, नमक तथा गुड़ पर्याप्त मात्रा में खिलाया जाये। गोवंशों की देखभाल तथा साफ-सफाई हेतु पर्याप्त केयर टेकर / गोसेवक व रात्रि हेतु चौकीदार रखे जायें।
सदस्य द्वारा समस्त खंड विकास अधिकारियों, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि अत्यन्त तीव्र गर्मी के दृष्टिगत सभी अधिकारी पूरी तरह सतर्क रहें तथा गोवंशों की उचित देखभाल पर्याप्त भूसा, हरा चारा, पशु आहार तथा स्वच्छ ताजा पानी उपलब्ध होना चाहिए पशुपालन विभाग अपनी स्वास्थ्य टीम एक्टिव रखें गोवंशों के स्वास्थ्य की जांच तथा उपचार हेतु विशेष रूप से सतर्क रहें। किसी भी गोवंश की लू (हीट स्ट्रोक) से मृत्यु नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जिन गोशालाओं में वृक्ष नहीं है वहां पर दोपहर के समय चरवाहों के साथ गोवंशों को बाहर सार्वजनिक खाली पड़ी भूमि पर घुमाने हेतु ले जायें तथा शाम को वापस गोशाला में संरक्षित करें कोई भी गोवंश किसानों के खेत पर नहीं जाने पाए।
सदस्य द्वारा समस्त खंड विकास अधिकारी व जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित किया गया कि उपलब्ध गोचर भूमि पर नेपियर हरा चारा तथा कैक्ट्स की विकसित की गयी नयी प्रजाति जिसमें कांटे नहीं होते तथा ऊष्ण तथा कम पानी में भी अच्छी तैयार होती है उसे भी बोया जाये तथा जहां पर गोचर भूमि नहीं है वहां पर हरा चारा की खरीद हेतु किसानों के साथ एम०ओ०यू० कर लिया जाये। हरा चारा हेतु हेतु नेपियर तथा मोरिंगा के पौधे लगवाये जायें।
सदस्य द्वारा समस्त खंड विकास अधिकारी व मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व चिकित्सा अधिकारी निर्देशित किया गया कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना हेतु ग्राम पचायतों में कैम्प का आयोजन करते हुए किसानों को ज्यादा से ज्यादा गोवंश सुपुर्द कर दिये जायें। किसानों में गाय के प्रति सकारात्मक सोंच पैदा की जाये। जिससे गोशाला की सभी गाय स्वयं अपनी स्वेच्छा से गोशालाओं से घर ले जायें। सहभागिता योजना को बढ़ावा देने हेतु प्रचार-प्रसार किया जाये। शासन द्वारा आवंटित गोशालाओं की नामित महिला स्वयं सहायता समूह एवं स्वैच्छिक, तथा गोपालन में रूचि रखने वाली संस्थाओं / एन०जी०ओ० को संचालनार्थ हस्तगत कराये जाने के सम्बन्ध में जानकारी चाही गयी।
अवगत कराया गया कि 12 एन०जी०ओ० को 41 गोशालाएं आवंटित की गयी थी जिसमें से गोशाला चलाने में रूचि रखने वाले 7 एन०जी०ओ० को 27 गोशालाओं का हस्तान्तरण कराने हेतु सम्बन्धित को पत्र जारी किये गये हैं, जिनमें से 18 गोशालाओं का हस्तान्तरण हो गया है, शेष ग्राम प्रधान स्तर पर लम्बित है। निर्देशित किया गया कि शासन द्वारा आवंटित समस्त गोशालाओं का दो दिवस में हस्तगत कराना सुनिश्चित किया जाये।
उन्होंने कहा कि गो आश्रय स्थलों में गोबर गैस प्लांट की स्थापना, गोबर से नये-नये उत्पाद जैसे कि गमले, मूर्ति पेण्ट, अगरबत्ती, गोबर के लट्टे आदि के निर्माण हेतु प्रशिक्षण कराकर गोशालाएं स्वावलम्बी बनायी जायें। गोबर तथा मूत्र से वर्मी कम्पोस्ट खाद इत्यादि का निर्माण कर गो आधारित खेती का विकास किया जाए
सदस्य ने कहा कि गो आश्रय स्थलों में गोवंशों को नस्ल सुधार हेतु उनका वर्गीकरण किया जाये। नन्दी गोवशों को अलग गोशालाओं में तथा मादा गोवंशों को अलग नजदीकी गोशालाओं स्थानान्तरित कर दिया जाये।
उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित किए कि सभी अधिकारियों द्वारा गोशालाओं का भ्रमण किया जाये तथा वहां पर गोआश्रय स्थलों को बेहतर से बेहतर बनाने हेतु गहनता से विचार कर छोटी से छोटी बातों को ध्यान में रखकर कार्य किये जायें जैसे कि पानी की प्रत्येक चरही में नल लगाया जाये, सफाई हेतु नीचे की तरफ एक छिद्र बनाया जाये तथा चरही में चूना से पुताई करा दी जाये।
कमजोर तथा छोटे गोवंशों हेतु अलग-अलग बैरिकेटिंग की जाये। गोशालाओं में गोवंशों के उपचार हेतु अड़गड़ा लगाया जाये। नर गोवंश तथा मादा गोवंशों को अलग-अलग रखा जाये तथा कृत्रिम गर्भाधान में उत्तम नस्ल के सीमन का प्रयोग किया जाये जिससे उत्तम नस्ल की बछिया पैदा हो और नस्ल सुधार हो । बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी सहित संबन्धित अधिकारी उपस्थित थे।