ऐपण कला में सजी राखियां, संस्कृति और परंपरा को दे रहीं नई पहचान
बागेश्वर की महिलाओं ने उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला को राखियों के रूप में नया स्वरूप दिया है। लंबे समय से ऐपण कला से जुड़ी कंचन उपाध्याय स्थानीय सामग्री और पारंपरिक डिजाइनों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं, जिन्हें लोगों की ओर से खूब पसंद किया जा रहा है।
कंचन का प्रयास है कि उत्तराखंड की लोककला को नए उत्पादों के माध्यम से देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पहुंचाया जाए। वहीं, उनके साथ काम कर रहीं दीक्षा का कहना है कि ऐपण कला को रोजगार से जोड़कर महिलाएं अपनी संस्कृति को सहेजने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।
ऐपण से सजी ये राखियां भाई-बहन के प्रेम के साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और महिलाओं के हुनर की पहचान भी बन रही हैं।
#ऐपणकला #उत्तराखंड #बागेश्वर #राखी #लोककला #उत्तराखंडीकला #महिलासशक्तिकरण #आत्मनिर्भरमहिला #संस्कृति #परंपरा