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शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा और जंतर-मंतर का आंदोलन 'जंतर-मंतर से सत्ता के गलियारों तक' कैसे एक महीने के आंदोलन ने बदला देश का राजनीतिक और शैक्षणिक विमर्श दिलीप मिश्रा नई दिल्ली। देश की राजनीति में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि छात्रों के आंदोलन, एक सामाजिक अभियान और लगातार बने जनदबाव के बाद केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री को पद छोड़ना पड़े। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े ने केवल एक मंत्री का कार्यकाल समाप्त नहीं किया, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या भारत में युवाओं की आवाज़ अब पहले से अधिक प्रभावशाली हो चुकी है। करीब एक महीने तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले आंदोलन, भूख हड़ताल, संसद मार्च, पुलिस कार्रवाई, विपक्ष की लामबंदी और सरकार के साथ लगातार तीन दौर की बातचीत के बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया। राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफ़ा स्वीकार किए जाने के साथ ही यह घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र के सबसे चर्चित आंदोलनों में दर्ज हो गया। सोशल मीडिया के व्यंग्य से राष्ट्रीय आंदोलन तक जिस "कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)" की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य के रूप में हुई थी, वही कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय आंदोलन का चेहरा बन गई। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों के गुस्से को संगठित किया। धीरे-धीरे देशभर के छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दल इस आंदोलन के साथ खड़े होते चले गए। आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्होंने लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। नीट पेपर लीक बना आंदोलन की चिंगारी आंदोलन की मूल वजह केवल एक परीक्षा नहीं थी। छात्रों का आरोप था कि नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया। उनकी प्रमुख मांगें थीं— • शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा • पेपर लीक की निष्पक्ष जांच • दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई • प्रभावित छात्रों को न्याय • आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता • आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों की वापसी जंतर-मंतर बना लोकतंत्र का प्रतीक करीब एक महीने तक जंतर-मंतर देश की राजनीति का केंद्र बना रहा। यहां दिन-रात छात्र डटे रहे। देशभर से लोग समर्थन देने पहुंचे। कैंडल मार्च निकले। सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों ने अभियान को समर्थन दिया। भूख हड़ताल ने बदली लड़ाई की दिशा सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी। 26 दिन तक चले अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती रही। दिल्ली हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता गया। आखिरकार दो केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल जाकर उनसे बातचीत करनी पड़ी। 18 जुलाई: जब पुलिस कार्रवाई ने आंदोलन को और बड़ा बना दिया 18 जुलाई आंदोलन का सबसे विवादित दिन साबित हुआ। सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया। धरना स्थल हटाया गया। इसके बाद पूरे देश में सरकार की आलोचना शुरू हो गई। विपक्ष पूरी तरह आंदोलन के समर्थन में उतर आया। 20 जुलाई: संसद मार्च और लाठीचार्ज 20 जुलाई को हजारों छात्र संसद की ओर बढ़े। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाए। झड़प हुई। लाठीचार्ज हुआ। आंसू गैस छोड़ी गई। कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए। यहीं से आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। सरकार का डैमेज कंट्रोल सरकार ने लगातार कई कदम उठाए— • केंद्रीय मंत्रियों को वार्ता के लिए भेजा • संसद में चर्चा का प्रस्ताव दिया • पेपर लीक पर नया कानून लाने की घोषणा की • फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्णय लिया • बाद में शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा स्वीकार किया तीन दौर की बातचीत के बाद समझौता जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने आंदोलनकारियों से तीन दौर की बातचीत की। अंततः सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी। सीजेपी ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। हालांकि संगठन ने कहा कि शिक्षा सुधार की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक 26 दिन का अनशन, आंदोलन का नैतिक चेहरा। अभिजीत दीपके सीजेपी के संस्थापक, आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकार। विपक्ष ने बताया लोकतंत्र की जीत राहुल गांधी ने कहा— "यह छात्रों की जीत है।" मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे करोड़ों युवाओं की जीत बताया। प्रियंका गांधी ने कहा— "देश के युवाओं ने साबित किया कि अहिंसक संघर्ष से भी बदलाव संभव है।" अखिलेश यादव ने इसे नई पीढ़ी की जीत बताया। भाजपा का पक्ष भाजपा नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सराहना की। उनका कहना था कि नई शिक्षा नीति लागू कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पार्टी ने कहा कि बड़े हित में लिया गया उनका निर्णय सार्वजनिक जीवन की गरिमा का उदाहरण है। सरकार ने क्या फैसले किए? - शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा स्वीकार - प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार - पेपर लीक पर कठोर कानून का मसौदा - फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव - शिक्षा सुधार पर आगे बातचीत का आश्वासन 10 दिनों की टाइमलाइन जिसने बदल दी राजनीति 15 जुलाई शशि थरूर ने सोनम वांगचुक से अनशन तोड़ने की अपील की। 16 जुलाई दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी के निर्देश दिए। 17 जुलाई दिल्ली पुलिस कमिश्नर बदले गए। 18 जुलाई वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, देशभर में विरोध तेज। 19 जुलाई हाईकोर्ट में सुनवाई, राजनीतिक समर्थन बढ़ा। 20 जुलाई संसद मार्च, लाठीचार्ज, राष्ट्रीय विवाद। 21 जुलाई विपक्ष का धरना, सरकार से वार्ता। 22 जुलाई सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत आगे बढ़ी। 23 जुलाई वांगचुक ने 26 दिन बाद अनशन समाप्त किया। 24 जुलाई पेपर लीक कानून के मसौदे को मंजूरी। 25 जुलाई धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा, आंदोलन समाप्त। क्या बदल गया? यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफ़े तक सीमित नहीं रहा। इसने देश में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, छात्रों की जवाबदेही, सरकार की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर नई बहस छेड़ दी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल नेतृत्व बदलेगा या शिक्षा व्यवस्था में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। खास बात- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण वह संदेश है जो इस आंदोलन ने दिया। युवाओं ने संगठित होकर अपनी आवाज़ राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाई। सरकार ने संवाद का रास्ता चुना और अंततः एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मंत्री ने पद छोड़ा। आने वाले समय में इस आंदोलन का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होगा कि पेपर लीक रोकने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और छात्रों का भरोसा लौटाने के लिए घोषित सुधार ज़मीन पर कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।

Dewas Nagar, Dewas | Jul 26, 2026

MORE NEWS

देवास का गौरव, दुनिया के मंच पर भारत की पहचान! 🇮🇳

इंडोनेशिया के ऐतिहासिक शहर सोलो सिटी में आयोजित आठ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आर्ट कैंप में देवास के चित्रकार जयप्रकाश चौहान ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय ध्वज गर्व से फहराया।

28 देशों के कलाकारों की मौजूदगी में उन्होंने "Rewriting Tomorrow" विषय पर अपने विचार साझा किए और भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

फ्लैग मार्च, कला संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रचनात्मक प्रस्तुतियों के बीच जयप्रकाश चौहान ने देवास और भारत का मान बढ़ाया। यह उपलब्धि न केवल शहर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है।

#Dewas #JayprakashChauhan #Indonesia #SoloCity #InternationalArtCamp #IndianArt #ProudMoment #ArtForPeace #GlobalArt #TimesMP

देवास का गौरव, दुनिया के मंच पर भारत की पहचान! 🇮🇳 इंडोनेशिया के ऐतिहासिक शहर सोलो सिटी में आयोजित आठ दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आर्ट कैंप में देवास के चित्रकार जयप्रकाश चौहान ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय ध्वज गर्व से फहराया। 28 देशों के कलाकारों की मौजूदगी में उन्होंने "Rewriting Tomorrow" विषय पर अपने विचार साझा किए और भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। फ्लैग मार्च, कला संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रचनात्मक प्रस्तुतियों के बीच जयप्रकाश चौहान ने देवास और भारत का मान बढ़ाया। यह उपलब्धि न केवल शहर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। #Dewas #JayprakashChauhan #Indonesia #SoloCity #InternationalArtCamp #IndianArt #ProudMoment #ArtForPeace #GlobalArt #TimesMP

Dewas Nagar, Dewas | Jul 29, 2026

राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में देवास की छात्राओं का शानदार प्रदर्शन

देवास। उज्जैन में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की नृत्य प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 80 टीमों ने सहभागिता की। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देवास की कवितालय डांस अकादमी की संचालिका एवं प्रशिक्षिका रति राजेश के निर्देशन में प्रशिक्षित छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अनेक प्रथम स्थान प्राप्त कर देवास का गौरव बढ़ाया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने भरतनाट्यम की एकल प्रस्तुति में तीन प्रथम स्थान, डुएट प्रस्तुति में तीन प्रथम स्थान, ट्रायो प्रस्तुति में एक प्रथम स्थान तथा सीनियर ग्रुप डांस में भी एक प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। छात्राओं की इस उपलब्धि ने देवास को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। इस उल्लेखनीय सफलता पर संस्कार भारती, देवास जिला की समस्त कार्यकारिणी की ओर से कवितालय डांस अकादमी की संचालिका एवं प्रशिक्षिका रति राजेश तथा सभी विजेता छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं। कार्यकारिणी ने सभी छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राष्ट्रीय नृत्य प्रतियोगिता में देवास की छात्राओं का शानदार प्रदर्शन देवास। उज्जैन में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की नृत्य प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 80 टीमों ने सहभागिता की। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देवास की कवितालय डांस अकादमी की संचालिका एवं प्रशिक्षिका रति राजेश के निर्देशन में प्रशिक्षित छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अनेक प्रथम स्थान प्राप्त कर देवास का गौरव बढ़ाया। प्रतियोगिता में छात्राओं ने भरतनाट्यम की एकल प्रस्तुति में तीन प्रथम स्थान, डुएट प्रस्तुति में तीन प्रथम स्थान, ट्रायो प्रस्तुति में एक प्रथम स्थान तथा सीनियर ग्रुप डांस में भी एक प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। छात्राओं की इस उपलब्धि ने देवास को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। इस उल्लेखनीय सफलता पर संस्कार भारती, देवास जिला की समस्त कार्यकारिणी की ओर से कवितालय डांस अकादमी की संचालिका एवं प्रशिक्षिका रति राजेश तथा सभी विजेता छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं। कार्यकारिणी ने सभी छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Dewas Nagar, Dewas | Jul 29, 2026

देवास में नगर निगम के नव-नियुक्त एल्डरमैन संतोष वर्मा से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वर्ग-3 की नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप लगाए गए हैं। हेलो देवास इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। इस वीडियो में वायरल ऑडियो के बाद सामने आई सार्वजनिक फेसबुक पोस्ट, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया गतिविधियों और उनसे जुड़े सवालों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। यदि संतोष वर्मा अपना पक्ष रखना चाहें, तो हेलो देवास उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

डिस्क्लेमर :
इस वीडियो में प्रस्तुत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट, वायरल सामग्री एवं अन्य सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। हेलो देवास वायरल ऑडियो या उसमें लगाए गए किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता और न ही उन्हें सत्य होने का दावा करता है। इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक चर्चा में मौजूद तथ्यों, बयानों और उनसे जुड़े सवालों को पत्रकारिता के दायरे में रखना है।

वीडियो में व्यक्त किसी भी आरोप का अंतिम सत्य केवल सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा ही निर्धारित किया जा सकता है। यदि संबंधित पक्ष अपना स्पष्टीकरण या पक्ष रखना चाहता है, तो हेलो देवास उसे भी बिना किसी भेदभाव के समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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देवास में नगर निगम के नव-नियुक्त एल्डरमैन संतोष वर्मा से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें वर्ग-3 की नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने के आरोप लगाए गए हैं। हेलो देवास इस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। इस वीडियो में वायरल ऑडियो के बाद सामने आई सार्वजनिक फेसबुक पोस्ट, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया गतिविधियों और उनसे जुड़े सवालों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। यदि संतोष वर्मा अपना पक्ष रखना चाहें, तो हेलो देवास उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। डिस्क्लेमर : इस वीडियो में प्रस्तुत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट, वायरल सामग्री एवं अन्य सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। हेलो देवास वायरल ऑडियो या उसमें लगाए गए किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता और न ही उन्हें सत्य होने का दावा करता है। इस प्रस्तुति का उद्देश्य किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक चर्चा में मौजूद तथ्यों, बयानों और उनसे जुड़े सवालों को पत्रकारिता के दायरे में रखना है। वीडियो में व्यक्त किसी भी आरोप का अंतिम सत्य केवल सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय द्वारा ही निर्धारित किया जा सकता है। यदि संबंधित पक्ष अपना स्पष्टीकरण या पक्ष रखना चाहता है, तो हेलो देवास उसे भी बिना किसी भेदभाव के समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित करने के लिए प्रतिबद्ध है। ... Follow us for more #hellodewas Dewas | Dewas City | Dewas Update | देवास #dewasnews #dewas

Dewas Nagar, Dewas | Jul 28, 2026

देवास पुलिस की विकेंद्रीकृत जनसुनवाई में आमजन को मिली राहत।

देवास पुलिस की विकेंद्रीकृत जनसुनवाई में आमजन को मिली राहत।

Dewas Nagar, Dewas | Jul 28, 2026

देवास। शहर के सबसे व्यस्त मार्ग एमजी रोड के चौड़ीकरण और नाला निर्माण कार्य में अब तेजी आने वाली है। नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार ने मंगलवार को निर्माण कार्य का निरीक्षण कर प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के बाद एमजी रोड के दोनों ओर नाला निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जिन स्थानों पर कुछ कार्य शेष है, वहां उसे समानांतर रूप से पूरा किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि जनता बैंक से सुभाष चौक तक दोनों ओर RCC (सीसी) रोड निर्माण की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे एमजी रोड चौड़ीकरण परियोजना को और गति मिलेगी।

निगमायुक्त ने कोर्ट में लंबित संपत्तियों के संबंध में कहा कि अगली सुनवाई के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिन स्थानों पर ड्रेनेज का कार्य अभी बाकी है, वहां जल निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विद्युत लाइन को भी व्यवस्थित रूप से बिछाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।

नगर निगम का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित योजना के अनुसार तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि शहरवासियों को जल्द बेहतर और सुगम यातायात सुविधा मिल सके।

News by hello! DEWAS sources. Kindly DM for any issues .

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देवास। शहर के सबसे व्यस्त मार्ग एमजी रोड के चौड़ीकरण और नाला निर्माण कार्य में अब तेजी आने वाली है। नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार ने मंगलवार को निर्माण कार्य का निरीक्षण कर प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान निगमायुक्त ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के बाद एमजी रोड के दोनों ओर नाला निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जिन स्थानों पर कुछ कार्य शेष है, वहां उसे समानांतर रूप से पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनता बैंक से सुभाष चौक तक दोनों ओर RCC (सीसी) रोड निर्माण की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे एमजी रोड चौड़ीकरण परियोजना को और गति मिलेगी। निगमायुक्त ने कोर्ट में लंबित संपत्तियों के संबंध में कहा कि अगली सुनवाई के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिन स्थानों पर ड्रेनेज का कार्य अभी बाकी है, वहां जल निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विद्युत लाइन को भी व्यवस्थित रूप से बिछाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं। नगर निगम का कहना है कि निर्माण कार्य निर्धारित योजना के अनुसार तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि शहरवासियों को जल्द बेहतर और सुगम यातायात सुविधा मिल सके। News by hello! DEWAS sources. Kindly DM for any issues . . In news ad . Dewas | Dewas City | Dewas Update | देवास | देवास शहर | Dewas News | Hello Dewas #dewas #hellodewas #dewasnews #dewas #tarana

Dewas Nagar, Dewas | Jul 28, 2026

शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा और जंतर-मंतर का आंदोलन 'जंतर-मंतर से सत्ता के गलियारों तक' कैसे एक महीने के आंदोलन ने बदला देश का राजनीतिक और शैक्षणिक विमर्श दिलीप मिश्रा नई दिल्ली। देश की राजनीति में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि छात्रों के आंदोलन, एक सामाजिक अभियान और लगातार बने जनदबाव के बाद केंद्र सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री को पद छोड़ना पड़े। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े ने केवल एक मंत्री का कार्यकाल समाप्त नहीं किया, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या भारत में युवाओं की आवाज़ अब पहले से अधिक प्रभावशाली हो चुकी है। करीब एक महीने तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर चले आंदोलन, भूख हड़ताल, संसद मार्च, पुलिस कार्रवाई, विपक्ष की लामबंदी और सरकार के साथ लगातार तीन दौर की बातचीत के बाद आखिरकार शिक्षा मंत्री ने इस्तीफ़ा दिया। राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफ़ा स्वीकार किए जाने के साथ ही यह घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र के सबसे चर्चित आंदोलनों में दर्ज हो गया। सोशल मीडिया के व्यंग्य से राष्ट्रीय आंदोलन तक जिस "कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी)" की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्य के रूप में हुई थी, वही कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय आंदोलन का चेहरा बन गई। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों के गुस्से को संगठित किया। धीरे-धीरे देशभर के छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी दल इस आंदोलन के साथ खड़े होते चले गए। आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्होंने लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। नीट पेपर लीक बना आंदोलन की चिंगारी आंदोलन की मूल वजह केवल एक परीक्षा नहीं थी। छात्रों का आरोप था कि नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया। उनकी प्रमुख मांगें थीं— • शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा • पेपर लीक की निष्पक्ष जांच • दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई • प्रभावित छात्रों को न्याय • आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता • आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों की वापसी जंतर-मंतर बना लोकतंत्र का प्रतीक करीब एक महीने तक जंतर-मंतर देश की राजनीति का केंद्र बना रहा। यहां दिन-रात छात्र डटे रहे। देशभर से लोग समर्थन देने पहुंचे। कैंडल मार्च निकले। सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों ने अभियान को समर्थन दिया। भूख हड़ताल ने बदली लड़ाई की दिशा सोनम वांगचुक के अनशन ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी। 26 दिन तक चले अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती रही। दिल्ली हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता गया। आखिरकार दो केंद्रीय मंत्रियों को अस्पताल जाकर उनसे बातचीत करनी पड़ी। 18 जुलाई: जब पुलिस कार्रवाई ने आंदोलन को और बड़ा बना दिया 18 जुलाई आंदोलन का सबसे विवादित दिन साबित हुआ। सुबह-सुबह दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया। धरना स्थल हटाया गया। इसके बाद पूरे देश में सरकार की आलोचना शुरू हो गई। विपक्ष पूरी तरह आंदोलन के समर्थन में उतर आया। 20 जुलाई: संसद मार्च और लाठीचार्ज 20 जुलाई को हजारों छात्र संसद की ओर बढ़े। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड लगाए। झड़प हुई। लाठीचार्ज हुआ। आंसू गैस छोड़ी गई। कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए। यहीं से आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया। सरकार का डैमेज कंट्रोल सरकार ने लगातार कई कदम उठाए— • केंद्रीय मंत्रियों को वार्ता के लिए भेजा • संसद में चर्चा का प्रस्ताव दिया • पेपर लीक पर नया कानून लाने की घोषणा की • फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्णय लिया • बाद में शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा स्वीकार किया तीन दौर की बातचीत के बाद समझौता जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने आंदोलनकारियों से तीन दौर की बातचीत की। अंततः सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनी। सीजेपी ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। हालांकि संगठन ने कहा कि शिक्षा सुधार की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक 26 दिन का अनशन, आंदोलन का नैतिक चेहरा। अभिजीत दीपके सीजेपी के संस्थापक, आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकार। विपक्ष ने बताया लोकतंत्र की जीत राहुल गांधी ने कहा— "यह छात्रों की जीत है।" मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे करोड़ों युवाओं की जीत बताया। प्रियंका गांधी ने कहा— "देश के युवाओं ने साबित किया कि अहिंसक संघर्ष से भी बदलाव संभव है।" अखिलेश यादव ने इसे नई पीढ़ी की जीत बताया। भाजपा का पक्ष भाजपा नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सराहना की। उनका कहना था कि नई शिक्षा नीति लागू कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पार्टी ने कहा कि बड़े हित में लिया गया उनका निर्णय सार्वजनिक जीवन की गरिमा का उदाहरण है। सरकार ने क्या फैसले किए? - शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा स्वीकार - प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार - पेपर लीक पर कठोर कानून का मसौदा - फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव - शिक्षा सुधार पर आगे बातचीत का आश्वासन 10 दिनों की टाइमलाइन जिसने बदल दी राजनीति 15 जुलाई शशि थरूर ने सोनम वांगचुक से अनशन तोड़ने की अपील की। 16 जुलाई दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी के निर्देश दिए। 17 जुलाई दिल्ली पुलिस कमिश्नर बदले गए। 18 जुलाई वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, देशभर में विरोध तेज। 19 जुलाई हाईकोर्ट में सुनवाई, राजनीतिक समर्थन बढ़ा। 20 जुलाई संसद मार्च, लाठीचार्ज, राष्ट्रीय विवाद। 21 जुलाई विपक्ष का धरना, सरकार से वार्ता। 22 जुलाई सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत आगे बढ़ी। 23 जुलाई वांगचुक ने 26 दिन बाद अनशन समाप्त किया। 24 जुलाई पेपर लीक कानून के मसौदे को मंजूरी। 25 जुलाई धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा, आंदोलन समाप्त। क्या बदल गया? यह आंदोलन केवल एक मंत्री के इस्तीफ़े तक सीमित नहीं रहा। इसने देश में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, छात्रों की जवाबदेही, सरकार की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर नई बहस छेड़ दी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल नेतृत्व बदलेगा या शिक्षा व्यवस्था में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। खास बात- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण वह संदेश है जो इस आंदोलन ने दिया। युवाओं ने संगठित होकर अपनी आवाज़ राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाई। सरकार ने संवाद का रास्ता चुना और अंततः एक संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मंत्री ने पद छोड़ा। आने वाले समय में इस आंदोलन का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होगा कि पेपर लीक रोकने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और छात्रों का भरोसा लौटाने के लिए घोषित सुधार ज़मीन पर कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं। - Dewas Nagar News