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राव बड़े या राणा... सीएम के कार्यक्रम से राव इंद्रजीत सिंह की दूरी का सबसे बड़ा कारण रहा प्रोटोकॉल की अनदेखी। इनविटेशन कार्ड में राव इंद्रजीत सिंह से पहले लिखा गया था श्याम सिंह राणा का नाम‌। आयोजकों ने संबोधन की सूची में भी नहीं डाला अहीरवाल के कद्दावर नेता का नाम। जिस विधायक के बोल हल्के में कार्यक्रम रखा गया इनविटेशन कार्ड में उसका नाम ही नहीं लिखा। प्रोटोकॉल की अनदेखी को नापते हुए ही राव इंद्रजीत सिंह ने अपने समर्थ को सहित कार्यक्रम से खुद को दूर रखा रेवाड़ी। बावल कृषि अनुसंधान केंद्र में मंगलवार को हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कम नायब सिंह सैनी के कार्यक्रम से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की पूरी को लेकर तरह-तरह के प्रयास लगाए जा रहे हैं। पूरे प्रदेश में चर्चाओं से लेकर अफवाहों तक का बाजार गर्म है। अफवाह तो अफवाह है लेकिन चर्चाओं में भी दम नजर नहीं आ रहा है। इस राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा इनविटेशन तैयार करने वाले लोगों ने लिखी जिसमें केंद्रीय मंत्री से पहले प्रदेश के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का नाम विशिष्ट अतिथि के रूप में लिखा गया। प्रोटोकॉल के अनुसार केंद्रीय मंत्री का नाम प्रदेश के मंत्री से पहले आना चाहिए था। ठीक इसी तरह बोल के विधायक की भी इनविटेशन कार्ड में पूरी तरह अनदेखी की गई। जिस विधायक का हलका पड़ता है, उसी का नाम निमंत्रण पत्र में कहीं नजर नहीं आया। संबोधन की सूची में भी राव इंद्रजीत सिंह का नाम नहीं डाला गया, जिसकी उन्हें पहले से भनक लग चुकी थी। इससे पूर्व हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की ओर से सोमवार को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में भी केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का कोई जिक्र नहीं किया गया था। राव के कार्यक्रम में नहीं आने के प्रमुख कारण यही हैं, अब चाहे कोई कैसे भी प्रयास लगता रहे।

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रेवाड़ी भाजपा में एक साल पुरानी खींचतान फिर उभरी:विधायक लक्ष्मण को नहीं मिला निमंत्रण;हलके में पत्थरों से विधायक गायब,4 धड़ों में बटी रेवाड़ी भाजपा

रेवाड़ी जिले के बावल में रैली से पहले पिछले साल 15 अगस्त को ऐसी ही पटकथा लिखी गई थी। राव तुलाराम स्टेडियम में 15 जून को रेवाड़ी विधानसभा की रैली हुई थी। जिसमें राव इंद्रजीत सिंह पहुंचे थे, परंतु उनके समर्थक पार्टी पदाधिकारियों और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे समर्थक नजर नहीं आए थे। पार्टी ने तब इस पर संज्ञान नहीं लिया, परंतु विधायक को यह बात याद थी।

30 जून को बावल रैली में सांसद- विधायकों के साथ संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने दूरी बनाई तो सुर्खियां बन गई।

6 जुलाई को विधायक ने अपनी पिछले साल 15 जून की रैली के साथ बावल में सीएम के कार्यक्रम के बहिष्कार का न्यौता एक ही बार में डबल करके लौटा दिया। सोमवार को धारूहेड़ा पहुंचें राव इंद्रजीत सिंह ने जिस प्रकार से निमंत्रण नहीं मिलने की बात कहकर अपनी और बावल विधायक की अनुपस्थिति का जायज ठहराया।

विधायक ने कहा कि एक तो उन्हें संगठन और प्रशासन की तरफ से शपथ ग्रहण कार्यक्रम का विधिवत न्यौता नहीं मिला था
हलके में पत्थरों से विधायक गायब

रेवाड़ी विधानसभा के गांवों में एक जुलाई को जिला परिषद के कई विकास कार्यों का उद्घाटन एवं शिलान्यास हुआ। जिसके लिए तैयार किए गए शिलान्यास और उद्घाटन पत्थरों में स्थानीय सांसद और महेंद्रगढ़ की अटेली की विधायक आरती राव का नाम मोटे अक्षरों में अंकित दिखा। सरकारी ग्रांट से हुए कार्यों के पत्थरों से स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह का नाम गायब दिखा।

गांव ततारपुर इस्तमुरार में लगे पत्थर पर राव इंद्रजीत सिंह और आरती राव के साथ जिला प्रमुख मनोज यादव, उपप्रमुख नीलम अनिल रायपुर, पार्षद सुनीता रणधीर सिंह, बीडीपीओ सुरजीत सिंह, ग्राम सचिव श्रीभगवान यादव और सरपंच सूबेदार रामचंद्र का नाम लिखा हुआ है, परंतु स्थानीय विधायक को जगह नहीं मिल पाई। जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालों के घेरे में है।

4 धड़ों में बटी रेवाड़ी भाजपा

रेवाड़ी विशेषकर अहीरवाल में शुरू से ही रामपुरा और बूढ़पुर हाउस में राजनीतिक तनातनी बनी रही है। राव बीरेंद्र सिंह और राव मोहर सिंह के समय से चली आ रही राजनीतिक लड़ाई का नेतृत्व पिछले करीब 4 दशक से राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह कर रहे हैं। 2014 से दोनों भाजपा में होते हुए भी मौका मिलने पर एक दूसरे के खिलाफ बोलने का कोई मौका नहीं चूकते।

2014 के बाद से धीरे-धीरे रामपुरा हाउस में पार्टी का पॉवर सेंटर शिफ्ट होने लगा। दो दिग्गजों की लड़ाई में अपनी अनदेखी से आहत संगठन से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अपनी अनदेखी से आहत होकर घर बैठने लगे। जिससे पार्टी तीन धड़ों में बंट गई। धारूहेड़ा में शपथ ग्रहण के बाद विधायक की मंच से दूरी ने पार्टी में अब एक और नया मोर्चा खोल दिया।

रेवाड़ी भाजपा में एक साल पुरानी खींचतान फिर उभरी:विधायक लक्ष्मण को नहीं मिला निमंत्रण;हलके में पत्थरों से विधायक गायब,4 धड़ों में बटी रेवाड़ी भाजपा रेवाड़ी जिले के बावल में रैली से पहले पिछले साल 15 अगस्त को ऐसी ही पटकथा लिखी गई थी। राव तुलाराम स्टेडियम में 15 जून को रेवाड़ी विधानसभा की रैली हुई थी। जिसमें राव इंद्रजीत सिंह पहुंचे थे, परंतु उनके समर्थक पार्टी पदाधिकारियों और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे समर्थक नजर नहीं आए थे। पार्टी ने तब इस पर संज्ञान नहीं लिया, परंतु विधायक को यह बात याद थी। 30 जून को बावल रैली में सांसद- विधायकों के साथ संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों ने दूरी बनाई तो सुर्खियां बन गई। 6 जुलाई को विधायक ने अपनी पिछले साल 15 जून की रैली के साथ बावल में सीएम के कार्यक्रम के बहिष्कार का न्यौता एक ही बार में डबल करके लौटा दिया। सोमवार को धारूहेड़ा पहुंचें राव इंद्रजीत सिंह ने जिस प्रकार से निमंत्रण नहीं मिलने की बात कहकर अपनी और बावल विधायक की अनुपस्थिति का जायज ठहराया। विधायक ने कहा कि एक तो उन्हें संगठन और प्रशासन की तरफ से शपथ ग्रहण कार्यक्रम का विधिवत न्यौता नहीं मिला था हलके में पत्थरों से विधायक गायब रेवाड़ी विधानसभा के गांवों में एक जुलाई को जिला परिषद के कई विकास कार्यों का उद्घाटन एवं शिलान्यास हुआ। जिसके लिए तैयार किए गए शिलान्यास और उद्घाटन पत्थरों में स्थानीय सांसद और महेंद्रगढ़ की अटेली की विधायक आरती राव का नाम मोटे अक्षरों में अंकित दिखा। सरकारी ग्रांट से हुए कार्यों के पत्थरों से स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह का नाम गायब दिखा। गांव ततारपुर इस्तमुरार में लगे पत्थर पर राव इंद्रजीत सिंह और आरती राव के साथ जिला प्रमुख मनोज यादव, उपप्रमुख नीलम अनिल रायपुर, पार्षद सुनीता रणधीर सिंह, बीडीपीओ सुरजीत सिंह, ग्राम सचिव श्रीभगवान यादव और सरपंच सूबेदार रामचंद्र का नाम लिखा हुआ है, परंतु स्थानीय विधायक को जगह नहीं मिल पाई। जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालों के घेरे में है। 4 धड़ों में बटी रेवाड़ी भाजपा रेवाड़ी विशेषकर अहीरवाल में शुरू से ही रामपुरा और बूढ़पुर हाउस में राजनीतिक तनातनी बनी रही है। राव बीरेंद्र सिंह और राव मोहर सिंह के समय से चली आ रही राजनीतिक लड़ाई का नेतृत्व पिछले करीब 4 दशक से राव इंद्रजीत सिंह और राव नरबीर सिंह कर रहे हैं। 2014 से दोनों भाजपा में होते हुए भी मौका मिलने पर एक दूसरे के खिलाफ बोलने का कोई मौका नहीं चूकते। 2014 के बाद से धीरे-धीरे रामपुरा हाउस में पार्टी का पॉवर सेंटर शिफ्ट होने लगा। दो दिग्गजों की लड़ाई में अपनी अनदेखी से आहत संगठन से जुड़े पुराने कार्यकर्ता अपनी अनदेखी से आहत होकर घर बैठने लगे। जिससे पार्टी तीन धड़ों में बंट गई। धारूहेड़ा में शपथ ग्रहण के बाद विधायक की मंच से दूरी ने पार्टी में अब एक और नया मोर्चा खोल दिया।

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