
मशरूम की जड़ों से बना एक नया फैब्रिक अब चमड़े को टक्कर देने की दिशा में पहुंच गया है।
खास बात यह है कि इसे जानवरों की खाल या पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक के बिना बनाया गया है।
असल में यहां मशरूम के ऊपर दिखने वाले हिस्से की बात नहीं हो रही। वैज्ञानिक मायसीलियम का इस्तेमाल कर रहे हैं—यह फंगस के बेहद महीन धागों जैसा जाल होता है, जो मिट्टी या दूसरी सतह के अंदर फैलता है।
पहले मायसीलियम को ट्रे में उगाकर सीधे शीट बनाने की कोशिश होती थी। समस्या यह थी कि ऐसा तरीका बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए धीमा और मुश्किल था।
नई रिसर्च में फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने फंगस को बीयर बनाने वाले टैंक जैसे बड़े बायोरिएक्टर में पोषक तरल के अंदर उगाया। इससे मायसीलियम एक मोटी, लुगदी जैसी सामग्री में बदल गया, जिसे बाद में धोकर और दूसरे जैव-आधारित पदार्थों के साथ मिलाकर पतली शीट में बदला गया।
इस मिश्रण में सॉर्बिटोल ने सामग्री को ज्यादा लचीला बनाने में मदद की, जबकि नैनोफाइब्रिलेटेड सेलुलोज ने इसकी मजबूती बढ़ाई। इसके बाद रोलर सिस्टम से लगातार शीट तैयार की गई।
वैज्ञानिकों ने करीब 20 सेंटीमीटर चौड़ी और 8 मीटर लंबी लगातार मायसीलियम शीट बनाने का प्रदर्शन किया। इसी सामग्री से एक प्रोटोटाइप हैंडबैग भी बनाया गया।
लैब टेस्ट में इसकी तन्यता की ताकत कुछ पारंपरिक लेदर के स्तर के बराबर पहुंची। लेकिन इसे अभी असली चमड़े का पूरा विकल्प कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि फटने और लंबे समय तक घिसने के खिलाफ इसकी मजबूती को और बेहतर करना बाकी है।
सबसे दिलचस्प हिस्सा इसका बायोडिग्रेडेशन है। पानी वाली परिस्थितियों में 28 दिनों के बाद करीब 77% बायोडिग्रेडेशन देखा गया। वहीं औद्योगिक कंपोस्टिंग की परिस्थितियों में शीट करीब छह हफ्तों में पूरी तरह बिखर गई।
यानी भविष्य में बैग, जूते और फैशन प्रोडक्ट ऐसे पदार्थ से बन सकते हैं, जिसका कच्चा माल फंगस से आए और इस्तेमाल के बाद इसका पर्यावरण में टिके रहना कम हो।
फिर भी कीमत, टिकाऊपन, बड़े पैमाने पर उत्पादन और पूरी लाइफ-साइकिल का पर्यावरणीय असर अभी जांचना बाकी है।
अगर मशरूम से बना ऐसा फैब्रिक असली लेदर जितना टिकाऊ और सस्ता हो जाए, तो क्या आप इसे इस्तेमाल करना पसंद करेंगे?
ओरिजन सोर्स: एसीएस एप्लाइड बायो मैटेरियल्स
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Bihar, India | Sep 12, 2026