
सस्ती दवा के बीच महंगी दवाओं का खेल? जगदीशपुर के बड़े होलसेलरों की भूमिका जांच के घेरे में
मेडिकल स्टोरों से आगे बड़े दवा आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचेंगे जांच के तार? मरीजों की जेब पर असर डालने वाले आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल
जगदीशपुर, अमेठी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगदीशपुर के आसपास संचालित मेडिकल स्टोरों पर दवाओं की बिक्री को लेकर उठ रहे सवाल अब बड़े होलसेल दवा विक्रेताओं तक पहुंच गए हैं। स्थानीय मरीजों और तीमारदारों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ स्थानों पर कथित तौर पर महंगी दवाओं की बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं कुछ शिकायतों में दवाओं की गुणवत्ता और उनके स्रोत की जांच की मांग भी उठी है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आरोप है कि कुछ मेडिकल स्टोरों पर मरीजों को पेटेंट दवाओं के नाम पर महंगी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मरीजों का कहना है कि दवा लेने के बाद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्हें दोबारा उपचार के लिए भटकना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मेडिकल स्टोरों तक पहुंच रही दवाओं की खरीद, आपूर्ति, बिलिंग और गुणवत्ता की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है।
दुकानों से ज्यादा बड़े होलसेलरों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों में कुछ बड़े होलसेल दवा विक्रेताओं की भूमिका की भी जांच की मांग की जा रही है। आरोप है कि कुछ होलसेलर मेडिकल स्टोर संचालकों के साथ बैठक कर विशेष दवाओं की बिक्री को बढ़ावा देने का प्रयास करते हैं। यदि ऐसा है तो दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला, खरीद-बिक्री के बिल और संबंधित कंपनियों से हुए लेनदेन की जांच से तस्वीर साफ हो सकती है।
हालांकि, किसी भी होलसेलर या दवा विक्रेता को दोषी ठहराने से पहले विभागीय जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है।
सरकारी अस्पताल के पर्चे के बाद निजी मेडिकल स्टोर से खरीदारी का आरोप
कुछ मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में चिकित्सक द्वारा उपलब्ध सरकारी दवाओं के अलावा अलग पर्चे पर कुछ दवाएं लिखकर निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने की बात कही जाती है। यदि ऐसी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह भी जांच का विषय होगा कि संबंधित दवाएं सरकारी व्यवस्था में उपलब्ध थीं या नहीं और मरीजों को बाहर से खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों को निजी दवाएं लिखने को लेकर निर्देश दिए जाने के बावजूद ऐसी शिकायतें सामने आना विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।
जनऔषधि केंद्र की सस्ती दवाओं के बीच महंगी दवाओं की जरूरत क्यों?
जब प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से कई जरूरी दवाएं कम कीमत पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, ऐसे में मरीजों को महंगी दवाएं खरीदने की जरूरत क्यों पड़ रही है—यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
क्या मरीज को वास्तव में वही महंगी दवा जरूरी है या कम कीमत में उपलब्ध विकल्प मौजूद हैं? क्या दवा किसी विशेष दुकान से ही खरीदने के लिए कही जा रही है? और यदि ऐसा कोई दबाव है तो उसके पीछे किस स्तर पर व्यवस्था काम कर रही है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
सीएमओ बोले—टीम गठित कर होगी जांच
मामले में सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही टीम गठित कर मेडिकल स्टोरों की जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाह स्वास्थ्य विभाग की जांच पर है। क्या जांच सिर्फ मेडिकल स्टोरों तक सीमित रहेगी या दवाओं की पूरी सप्लाई चेन खंगालते हुए बड़े होलसेलरों तक भी पहुंचेगी? दवाओं के बिल, स्टॉक, बैच नंबर, लाइसेंस, खरीद स्रोत और चिकित्सकीय पर्चियों की जांच से ही सामने आएगा कि मरीजों की शिकायतों के पीछे वास्तविकता क्या है।
मरीजों की सेहत और उनकी जेब से जुड़े इस मामले में अब विभागीय जांच की रिपोर्ट का इंतजार है।
IAS Shashank Chaudhary Cmoamethi Amethi Kishori Lal Sharma
Amethi, Amethi | Sep 29, 2026