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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन
  
दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद

रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। 

दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। 

जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। 

हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से  मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।

#Rafiganj #Aurangabad #AhiyanKhanDada #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimEkta #Chadarposhi #Malida #BiharNews

आप लोग यहां पहुंचे है तो कमेंट कर जरूर बताएं 👇 क्या आपने भी इस दरगाह की करामात सुनी है?

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए। #Rafiganj #Aurangabad #AhiyanKhanDada #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimEkta #Chadarposhi #Malida #BiharNews आप लोग यहां पहुंचे है तो कमेंट कर जरूर बताएं 👇 क्या आपने भी इस दरगाह की करामात सुनी है?

Madanpur, Aurangabad | Jun 27, 2026

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन
  
दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद

रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। 

दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। 

जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। 

हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से  मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए।

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आप लोग यहां पहुंचे है तो कमेंट कर जरूर बताएं 👇 क्या आपने भी इस दरगाह की करामात सुनी है?

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बनी अहियां खां दादा दरगाह, मुस्लिम से ज्यादा पहुंचे हिंदू जायरीन दशकों से मुहर्रम के दिन लग रही भीड़, संकीर्ण रास्ते पर जाम, निःसंतान दंपतियों की खास आस्था, इंतजाम नदारद रफीगंज (औरंगाबाद): प्रखंड के दुगुल पंचायत में सुदूरवर्ती क्षेत्र व पहाड़ों के किनारे स्थित अहियां खां दादा के दरगाह ने शुक्रवार को गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। हजरत इमाम हुसैन की याद में चादरपोशी को लेकर उमड़ी भीड़ में मुस्लिम समुदाय से अधिक संख्या में हिंदू समाज के लोग मन्नत मांगने पहुंचे। दरगाह तक पहुंचने का रास्ता बेहद संकीर्ण है, जिस कारण जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां कई दशकों से भीड़ लग रही है। सुबह से ही दूर-दराज से आए सैकड़ों अकीदतमंद दरगाह पहुंचने लगे। जायरीनों ने दरगाह में चादरपोशी की और मन्नत के तौर पर मलीदा भी चढ़ाया। लोगों के अनुसार, इस दरगाह को लेकर मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां मन्नत मांगने आते हैं और उनकी मुराद पूरी होती है। मुराद पूरी होने पर जायरीन यहां मलीदा चढ़ाते हैं या चादरपोशी करते हैं*। इसी आस्था के कारण बड़ी संख्या में निःसंतान दंपती भी दरगाह पहुंचे। हालांकि दरगाह परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी। न तो पुलिस बल तैनात था और न ही स्वयंसेवकों की टीम। संकीर्ण रास्ते पर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेयजल, छाया या प्राथमिक चिकित्सा की भी कोई व्यवस्था नहीं थी।स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल यहां चादरपोशी के मौके पर हजारों की संख्या में जायरीन आते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से पहले से कोई तैयारी नहीं की गई।जायरीनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अगले साल से मेडिकल कैंप और पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए। #Rafiganj #Aurangabad #AhiyanKhanDada #GangaJamuniTehzeeb #HinduMuslimEkta #Chadarposhi #Malida #BiharNews आप लोग यहां पहुंचे है तो कमेंट कर जरूर बताएं 👇 क्या आपने भी इस दरगाह की करामात सुनी है?

Aurangabad, Aurangabad | Jun 27, 2026

धर्म की राजनीति से दूर रहें बच्चे, देश पहले—मज़हब बाद में
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Koil, Aligarh | Feb 10, 2026

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