हमारी महिलाएं लिपस्टिक लगा करके घूमने का काम नहीं करती है,
नौकरी पैसा करने के बाद भी खेतों में काम करती है,
क्योंकि यह हमारा व्यापार नहीं यह हमारा पूछतेदी परंपरागत काम है,
जिसके माध्यम से हम 12 महीने का अनाज भंडारण कर लेते हैं
हम लोग अनाज बिकाऊ ला करके नहीं खाना पसंद करते हैं।
अधिकतर आदिवासी अपने खेतों में ही धान पका लेता है।।
हम वह व्यापारिक किसान भी नहीं जो अपने खेतों में खाद डाल के अनाज की अधिक पैदावार करके मार्केट में बेचने जाने वाले किसान नहीं है।।
हम आदिवासी हमारी सेहत के साथ-साथ पशुओं की सेहत का भी पूरा ध्यान रखते हैं इसलिए आदिवासियों को मानव जाति में सबसे श्रेष्ठ मनुष्य कहा गया है ।
पता नहीं वह पीछे क्यों रह गया शायद इसी भोलेपन के कारण उसके साथ शोषण भी ज्यादा हुआ
पर हम जो भी है बहुत अच्छे हैं हमारा जन्म आदिवासी समाज में हुआ हम किस्मत वाले हैं धन्यवाद जो जीव जंतुओ और पूरी प्रकृति की चिंता करने वाले लोगों की कौम से आते हैं ✍️
Simalwara, Dungarpur | Jul 13, 2026