आज बाढ़ की चुनौती के बीच फर्रुखाबाद प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मैदान में नजर आया।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने मोटरबोट से बाढ़ प्रभावित तीसराम की मड़ैया पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। उन्होंने केवल हालात का निरीक्षण ही नहीं किया, बल्कि मौके पर ही स्वास्थ्य विभाग, पशुपालन विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, मेडिकल कैंप, गांव में दवा का छिड़काव, क्लोरीन की गोलियों का वितरण, पशुओं के टीकाकरण और बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित स्थान पर व्यवस्था करने जैसे निर्देश यह बताते हैं कि प्रशासन राहत कार्यों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि हर जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है।
इसके बाद चित्रकूट रामनिवास महाविद्यालय में संचालित बाढ़ शरणालय का निरीक्षण कर वहां रह रहे परिवारों की भोजन, पेयजल, आवास और पशुओं की व्यवस्था का भी जायजा लिया। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर सहायता पहुंचनी चाहिए।
आपदा की इस घड़ी में जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं मोटरबोट से गांव-गांव पहुंचकर लोगों का हालचाल ले रहे हैं, तो यह भरोसा भी मजबूत होता है कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन जनता के साथ खड़ा है।
संवेदनशील नेतृत्व, त्वरित निर्णय और जमीनी स्तर पर सक्रिय प्रशासन—यही है फर्रुखाबाद की बाढ़ राहत व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत।
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