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इन बेरोजगार युवाओं की इतनी ही गलती है कि ये सभी भोपाल में सरकार से नौकरी मांगने गए थे पर सरकार ने इन्हें लाठियाँ दी ।

18.5k views | Balaghat, Balaghat | Aug 19, 2021

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#बालाघाट 
वारासिवनी में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, विधायक और पूर्व मंत्री ने बच्चों को दवा पिलाकर किया 

      देश को पोलियो मुक्त रखने और बच्चों को गंभीर दिव्यांगता से बचाने के संकल्प के साथ आज वारासिवनी के सिविल अस्पताल में 'राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान' का विधिवत शुभारंभ हुआ। अभियान का उद्घाटन वारासिवनी-खैरलांजी के विधायक श्री विवेक विक्की पटेल और मध्य प्रदेश शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री प्रदीप गुड्डा जायसवाल द्वारा बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर किया गया।

   15,784 बच्चों को सुरक्षा कवच देने का लक्ष्य

    कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत वारासिवनी विकासखंड में 0 से 5 वर्ष तक की आयु के कुल 15 हजार 784 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित अभिभावकों से अपील की कि वे अपने सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव है, इसलिए अभियान को सफल बनाने में प्रत्येक नागरिक का सहयोग अनिवार्य है।

      घर-घर दस्तक देगी स्वास्थ्य विभाग की टीम

    खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्यम शर्मा ने बताया कि अभियान के पहले दिन बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई गई है। अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए आगामी 29 और 30 जून 2026 को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को दवा पिलाएंगी, जो किन्हीं कारणों से आज बूथ तक नहीं पहुँच सके हैं।

        "एक भी बच्चा छूटा, तो सुरक्षा चक्र टूटा"

       डॉ. शर्मा ने पोलियो उन्मूलन के प्रति जागरूकता फैलाते हुए जोर देकर कहा कि इस अभियान की सफलता जनसहभागिता पर निर्भर है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग का संदेश दोहराते हुए कहा, *"एक भी बच्चा छूटा, तो सुरक्षा चक्र टूटा।"* उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि उनका बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रहे।

            कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति

     शुभारंभ अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इनमें खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्यम शर्मा, बीईई श्रीमती उर्मिला बघेले, ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइज़र श्री प्रकाश डोंगरे, एएचवी श्रीमती खिमोती जघेले और एएनएम श्रीमती गीता बिसेन शामिल रहीं।

      "दो बूंद जिंदगी की"—के इस संकल्प के साथ, वारासिवनी स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर पोलियो मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

#CMMadhyaPradesh 
#JansamparkMP #PulsePolio 
#PolioMuktBharat 
#HealthForAll

#बालाघाट वारासिवनी में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, विधायक और पूर्व मंत्री ने बच्चों को दवा पिलाकर किया देश को पोलियो मुक्त रखने और बच्चों को गंभीर दिव्यांगता से बचाने के संकल्प के साथ आज वारासिवनी के सिविल अस्पताल में 'राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान' का विधिवत शुभारंभ हुआ। अभियान का उद्घाटन वारासिवनी-खैरलांजी के विधायक श्री विवेक विक्की पटेल और मध्य प्रदेश शासन के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री प्रदीप गुड्डा जायसवाल द्वारा बच्चों को पोलियो की दवा पिलाकर किया गया। 15,784 बच्चों को सुरक्षा कवच देने का लक्ष्य कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के तहत वारासिवनी विकासखंड में 0 से 5 वर्ष तक की आयु के कुल 15 हजार 784 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जनप्रतिनिधियों ने उपस्थित अभिभावकों से अपील की कि वे अपने सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं। उन्होंने कहा कि टीकाकरण ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव है, इसलिए अभियान को सफल बनाने में प्रत्येक नागरिक का सहयोग अनिवार्य है। घर-घर दस्तक देगी स्वास्थ्य विभाग की टीम खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्यम शर्मा ने बताया कि अभियान के पहले दिन बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई गई है। अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए आगामी 29 और 30 जून 2026 को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को दवा पिलाएंगी, जो किन्हीं कारणों से आज बूथ तक नहीं पहुँच सके हैं। "एक भी बच्चा छूटा, तो सुरक्षा चक्र टूटा" डॉ. शर्मा ने पोलियो उन्मूलन के प्रति जागरूकता फैलाते हुए जोर देकर कहा कि इस अभियान की सफलता जनसहभागिता पर निर्भर है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग का संदेश दोहराते हुए कहा, *"एक भी बच्चा छूटा, तो सुरक्षा चक्र टूटा।"* उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे सतर्क रहें और यह सुनिश्चित करें कि उनका बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रहे। कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति शुभारंभ अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इनमें खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सत्यम शर्मा, बीईई श्रीमती उर्मिला बघेले, ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइज़र श्री प्रकाश डोंगरे, एएचवी श्रीमती खिमोती जघेले और एएनएम श्रीमती गीता बिसेन शामिल रहीं। "दो बूंद जिंदगी की"—के इस संकल्प के साथ, वारासिवनी स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर पोलियो मुक्त भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #PulsePolio #PolioMuktBharat #HealthForAll

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 28, 2026

UP के Ghaziabad में तीन मंजिला अवैध मजार पर चला प्रशासन का बुलडोजर! Bulldozer Action

UP के Ghaziabad में तीन मंजिला अवैध मजार पर चला प्रशासन का बुलडोजर! Bulldozer Action

Balaghat, Balaghat | Jun 28, 2026

#बालाघाट 
मजदूरी से उद्यमिता तक का सफर: सिलाई और साड़ी के व्यापार से आत्मनिर्भर बनीं ग्राम बघोली की छमेश्वरी

       कहते हैं कि हौसलों की उड़ान अगर सही दिशा में हो, तो मंजिल खुद-ब-खुद पास चली आती है। लालबर्रा विकासखंड के ग्राम बघोली की रहने वाली श्रीमती छमेश्वरी ठाकरे ने इसे सच कर दिखाया है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली छमेश्वरी आज न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा की एक मिसाल बन गई हैं।

  आजीविका मिशन से जुड़ी जीवन की नई राह

     श्रीमती ठाकरे का जीवन तब बदला जब वे वर्ष 2016 में 'सत्यसाईं आजीविका स्वयं सहायता समूह' से जुड़ीं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) ने उन्हें न केवल एक पहचान दी, बल्कि नियमित बचत, बैंकिंग और उद्यमशीलता का हुनर भी सिखाया। समूह के अनुशासन और प्रशिक्षण ने उनमें वह आत्मविश्वास भरा, जिसने उनके सपनों को पंख दे दिए।

   शून्य से शुरू किया सफर, आज खड़ा किया सफल व्यापार

        शुरुआत में छमेश्वरी ने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। मेहनत रंग लाई तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मिशन से प्राप्त वित्तीय सहायता (सीआईएफ, सीसीएल एवं एसवीईपी योजनाओं) का उपयोग कर उन्होंने न केवल अपनी सिलाई यूनिट का विस्तार किया, बल्कि लालबर्रा में अपना सिलाई सेंटर खोल लिया। ग्राहकों की बढ़ती मांग और अपनी सूझबूझ से उन्होंने साड़ी का व्यवसाय भी शुरू किया, जो आज उनकी आय का प्रमुख जरिया बन गया है।

        आत्मनिर्भरता ने बदली तकदीर

     कभी आर्थिक तंगी और मजदूरी पर निर्भर रहने वाला छमेश्वरी का परिवार आज स्वाभिमान के साथ जीवन जी रहा है। व्यवसाय से होने वाली आय से उन्होंने न केवल अपने ऋणों को समय पर चुकाया, बल्कि अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा भी प्रदान कर रही हैं। उनके घर की सुख-सुविधाएं बढ़ी हैं और समाज में उनकी एक अलग पहचान बनी है।

        दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा

     छमेश्वरी अब केवल अपनी उन्नति तक सीमित नहीं हैं। वह अपने क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। वे मानती हैं कि "मिशन ने मुझे केवल आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि मुझे एक सफल उद्यमी के रूप में नई पहचान और नेतृत्व क्षमता भी दी है।"

    आज छमेश्वरी ठाकरे की यह सफलता बताती है कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो ग्रामीण परिवेश की महिलाएं भी किसी बड़े उद्यमी से कम नहीं होतीं। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए उम्मीद की एक किरण है जो अपनी मेहनत से अपनी किस्मत बदलना चाहती है।
#CMMadhyaPradesh 
#JansamparkMP 
#mp_wcdmp

#बालाघाट मजदूरी से उद्यमिता तक का सफर: सिलाई और साड़ी के व्यापार से आत्मनिर्भर बनीं ग्राम बघोली की छमेश्वरी कहते हैं कि हौसलों की उड़ान अगर सही दिशा में हो, तो मंजिल खुद-ब-खुद पास चली आती है। लालबर्रा विकासखंड के ग्राम बघोली की रहने वाली श्रीमती छमेश्वरी ठाकरे ने इसे सच कर दिखाया है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली छमेश्वरी आज न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा की एक मिसाल बन गई हैं। आजीविका मिशन से जुड़ी जीवन की नई राह श्रीमती ठाकरे का जीवन तब बदला जब वे वर्ष 2016 में 'सत्यसाईं आजीविका स्वयं सहायता समूह' से जुड़ीं। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) ने उन्हें न केवल एक पहचान दी, बल्कि नियमित बचत, बैंकिंग और उद्यमशीलता का हुनर भी सिखाया। समूह के अनुशासन और प्रशिक्षण ने उनमें वह आत्मविश्वास भरा, जिसने उनके सपनों को पंख दे दिए। शून्य से शुरू किया सफर, आज खड़ा किया सफल व्यापार शुरुआत में छमेश्वरी ने घर से ही सिलाई का छोटा सा काम शुरू किया। मेहनत रंग लाई तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मिशन से प्राप्त वित्तीय सहायता (सीआईएफ, सीसीएल एवं एसवीईपी योजनाओं) का उपयोग कर उन्होंने न केवल अपनी सिलाई यूनिट का विस्तार किया, बल्कि लालबर्रा में अपना सिलाई सेंटर खोल लिया। ग्राहकों की बढ़ती मांग और अपनी सूझबूझ से उन्होंने साड़ी का व्यवसाय भी शुरू किया, जो आज उनकी आय का प्रमुख जरिया बन गया है। आत्मनिर्भरता ने बदली तकदीर कभी आर्थिक तंगी और मजदूरी पर निर्भर रहने वाला छमेश्वरी का परिवार आज स्वाभिमान के साथ जीवन जी रहा है। व्यवसाय से होने वाली आय से उन्होंने न केवल अपने ऋणों को समय पर चुकाया, बल्कि अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा भी प्रदान कर रही हैं। उनके घर की सुख-सुविधाएं बढ़ी हैं और समाज में उनकी एक अलग पहचान बनी है। दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा छमेश्वरी अब केवल अपनी उन्नति तक सीमित नहीं हैं। वह अपने क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। वे मानती हैं कि "मिशन ने मुझे केवल आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि मुझे एक सफल उद्यमी के रूप में नई पहचान और नेतृत्व क्षमता भी दी है।" आज छमेश्वरी ठाकरे की यह सफलता बताती है कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो ग्रामीण परिवेश की महिलाएं भी किसी बड़े उद्यमी से कम नहीं होतीं। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए उम्मीद की एक किरण है जो अपनी मेहनत से अपनी किस्मत बदलना चाहती है। #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #mp_wcdmp

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 28, 2026

#बालाघाट 
खेत बचाओ-धरती माता बचाओ' अभियान का असर, लेंडेझरी के किसान ने अपनाई DSR पद्धति

    जिले में कृषि विभाग द्वारा जल संरक्षण, खेती की लागत घटाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे 'खेत बचाओ-धरती माता बचाओ' अभियान का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। इसी क्रम में आज विकासखंड लालबर्रा के ग्राम लेंडेझरी में उन्नत तकनीक DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) यानी सीधी बुवाई पद्धति को बढ़ावा दिया गया।

               सुपर सीडर से धान की बुवाई 

    कृषि विभाग के प्रयासों से प्रेरित होकर ग्राम लेंडेझरी के उन्नतशील कृषक श्री इशूलाल चौहान ने अपने 04 एकड़ खेत में आधुनिक पद्धति से धान की बुवाई की है। आज श्री चौहान के खेतों में 'सुपर सीडर मशीन' के माध्यम से धान के बीज बोए गए। इस नवाचारी पहल से न केवल जल की बचत होगी, बल्कि खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।

           आत्मा परियोजना के तहत प्रदर्शन

     इस बुवाई कार्य में तकनीकी सहयोग और प्रदर्शन पर विशेष ध्यान दिया गया। कृषक के कुल 4 एकड़ रकबे में से 2.5 एकड़ भूमि पर 'WRI प्रोजेक्ट' (Water Resources Investigation) के अंतर्गत 'आत्मा' (ATMA) विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शन (डिमोंस्ट्रेशन) आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य क्षेत्र के अन्य किसानों को भी कम पानी और कम लागत में बेहतर पैदावार वाली आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना है।

          किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

     उपसंचालक कृषि, श्री फूलसिंह मालवीय ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में धान की परंपरागत रोपाई के स्थान पर DSR पद्धति को अपनाकर किसान पानी की भारी बचत कर सकते हैं। यह पद्धति मिट्टी की सेहत सुधारने और 'धरती माता' को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में भी सहायक है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान इस तरह की मशीनीकृत और टिकाऊ खेती को अपनाएं ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।

     कृषि विभाग की इस मुहिम से लेंडेझरी के अन्य किसानों में भी उत्साह देखा जा रहा है और वे आने वाले समय में ऐसी ही आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

#CMMadhyaPradesh 
#JansamparkMP 
#minmpkrishi

#बालाघाट खेत बचाओ-धरती माता बचाओ' अभियान का असर, लेंडेझरी के किसान ने अपनाई DSR पद्धति जिले में कृषि विभाग द्वारा जल संरक्षण, खेती की लागत घटाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे 'खेत बचाओ-धरती माता बचाओ' अभियान का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। इसी क्रम में आज विकासखंड लालबर्रा के ग्राम लेंडेझरी में उन्नत तकनीक DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) यानी सीधी बुवाई पद्धति को बढ़ावा दिया गया। सुपर सीडर से धान की बुवाई कृषि विभाग के प्रयासों से प्रेरित होकर ग्राम लेंडेझरी के उन्नतशील कृषक श्री इशूलाल चौहान ने अपने 04 एकड़ खेत में आधुनिक पद्धति से धान की बुवाई की है। आज श्री चौहान के खेतों में 'सुपर सीडर मशीन' के माध्यम से धान के बीज बोए गए। इस नवाचारी पहल से न केवल जल की बचत होगी, बल्कि खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। आत्मा परियोजना के तहत प्रदर्शन इस बुवाई कार्य में तकनीकी सहयोग और प्रदर्शन पर विशेष ध्यान दिया गया। कृषक के कुल 4 एकड़ रकबे में से 2.5 एकड़ भूमि पर 'WRI प्रोजेक्ट' (Water Resources Investigation) के अंतर्गत 'आत्मा' (ATMA) विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शन (डिमोंस्ट्रेशन) आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य क्षेत्र के अन्य किसानों को भी कम पानी और कम लागत में बेहतर पैदावार वाली आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल उपसंचालक कृषि, श्री फूलसिंह मालवीय ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में धान की परंपरागत रोपाई के स्थान पर DSR पद्धति को अपनाकर किसान पानी की भारी बचत कर सकते हैं। यह पद्धति मिट्टी की सेहत सुधारने और 'धरती माता' को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में भी सहायक है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान इस तरह की मशीनीकृत और टिकाऊ खेती को अपनाएं ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। कृषि विभाग की इस मुहिम से लेंडेझरी के अन्य किसानों में भी उत्साह देखा जा रहा है और वे आने वाले समय में ऐसी ही आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित हो रहे हैं। #CMMadhyaPradesh #JansamparkMP #minmpkrishi

Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 28, 2026

Delhi Dehradun Expressway पर दो गाड़ियों में हुई टक्कर, 4 लोगों की मौत! CCTV Video हुआ Viral

Delhi Dehradun Expressway पर दो गाड़ियों में हुई टक्कर, 4 लोगों की मौत! CCTV Video हुआ Viral

Balaghat, Balaghat | Jun 28, 2026