बुनकरों के हुनर को मोदी सरकार ने दिया नया बाजार और सम्मान : अरविंद शर्मा
‘वोकल फॉर लोकल’ से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा कारीगर, सूरजकुंड बना ‘लोकल से ग्लोबल’ का मंच
पंचकूला, 7 अगस्त: बुनकर दिवस के अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प ने देश के बुनकरों, हस्तशिल्पियों और कारीगरों के हुनर को नई पहचान और नए बाजार दिए हैं। सरकार का संकल्प है कि हुनरमंद हाथों को सम्मान मिले, कारीगर आर्थिक रूप से सशक्त हों और स्वदेशी उत्पादों को देश-दुनिया में नई पहचान मिले।
डॉ. अरविंद शर्मा ने शुक्रवार को पंचकूला स्थित खादी केंद्र पहुंचकर बुनकरों एवं कारीगरों से संवाद किया। उन्होंने कारीगरों द्वारा तैयार खादी वस्त्रों की खरीदारी कर उनका उत्साहवर्धन किया और बुनकर दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी प्राचीन संस्कृति और विरासत से नहीं, बल्कि उन हाथों से भी है, जो पीढ़ियों से इस विरासत को जीवंत रखे हुए हैं। बुनकरों, हस्तशिल्पियों और कारीगरों ने अपने हुनर के दम पर भारतीय कला को देश की सीमाओं से निकालकर वैश्विक मंच तक पहुंचाया है।
*हुनर को बाजार से जोड़ रही सरकार*
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि जिस हाथ में हुनर है, उसे काम भी मिले और उसके हुनर की उचित कीमत भी मिले। पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक, डिजिटल बाजार और बेहतर मार्केटिंग से जोड़ने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से छोटे कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का संकल्प तभी मजबूत होगा, जब गांव और कस्बों में रहने वाला हुनरमंद व्यक्ति भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने। बुनकरी और हस्तशिल्प केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हैं। इसलिए जरूरी है कि युवा पीढ़ी इन पारंपरिक कलाओं से जुड़े और आधुनिक तकनीक के साथ इन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जाए।
*सूरजकुंड से दुनिया तक पहुंच रहा भारतीय हुनर*
डॉ. शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला ‘लोकल से ग्लोबल’ की सोच को साकार करने वाला सशक्त मंच है। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले बुनकर और हस्तशिल्पी यहां अपनी कला को देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाते हैं। गांवों और छोटे कस्बों में पीढ़ियों से संजोया गया हुनर जब उचित मंच और बाजार पाता है तो वह वैश्विक पहचान बन जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि परंपरागत हुनर को आधुनिक बाजार की मांग से जोड़ा जाए, ताकि कारीगरों की आमदनी बढ़े और देश की सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहे। ‘वोकल फॉर लोकल’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों और उत्पादों को आर्थिक मजबूती देने का अभियान है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हुनर का सम्मान, कारीगरों का सशक्तिकरण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बुनकर दिवस पर देश के सभी बुनकरों, हस्तशिल्पियों और कारीगरों को शुभकामनाएं दीं।