स्वागत द्वार या हादसों का दरवाजा?
खेड़ली रोड पर निर्माणाधीन स्वागत द्वार बना परेशानी का सबब, बिना संकेतक मनमर्जी से बंद हो रहा रास्ता
बृजनगर। कस्बे के खेड़ली रोड पर बन रहा स्वागत द्वार इन दिनों लोगों के स्वागत से ज्यादा हादसों को न्योता देता नजर आ रहा है। निर्माण स्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से वाहन चालकों और राहगीरों की परेशानी बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि सड़क का रास्ता कब और किस तरफ से बंद मिलेगा, इसका कोई भरोसा नहीं।
निर्माण कार्य के दौरान संबंधित ठेकेदारों की ओर से न तो पर्याप्त दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं और न ही रास्ते में बदलाव की स्पष्ट जानकारी देने की व्यवस्था की गई है। सड़क के एक हिस्से को कभी एक तरफ से तो कभी दूसरी तरफ से बंद कर दिया जाता है। इससे वाहन चालकों को मौके पर पहुंचने के बाद अचानक अपना रास्ता बदलना पड़ता है।
सुबह कुछ और, रात में कुछ और नजर आता है रास्ता
सबसे गंभीर स्थिति रात के समय बन रही है। दिन में जिस तरफ से वाहन आसानी से निकल जाते हैं, रात में उसी तरफ रास्ता बंद मिलता है। दूसरी ओर खुला रास्ता भी पर्याप्त संकेतकों के अभाव में स्पष्ट नजर नहीं आता।
अचानक रास्ता बंद मिलने पर वाहन चालकों को ब्रेक लगाने, वाहन मोड़ने या संकरे रास्ते से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। रात में पर्याप्त रोशनी और रिफ्लेक्टर नहीं होने से खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में वाहन चालक की छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
सवाल सिर्फ रास्ते का नहीं, सुरक्षा का है
निर्माण कार्य के चलते यातायात व्यवस्था में बदलाव होना स्वाभाविक है, लेकिन लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। यदि सड़क का कोई हिस्सा बंद किया जा रहा है तो वहां पहले से स्पष्ट सूचना, बैरिकेडिंग, दिशा-सूचक बोर्ड, रिफ्लेक्टर और रात में दिखाई देने वाले चेतावनी संकेतक लगाए जाना जरूरी है।
मौके पर इन बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के कारण स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि निर्माण पूरा होने में समय लग सकता है, लेकिन तब तक रास्ते से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
बड़े हादसे का इंतजार या पहले होगी व्यवस्था?
अब सवाल संबंधित विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहे हैं। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार अधिकारी जागेंगे? या फिर समय रहते निर्माण स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे?
स्वागत द्वार लोगों के स्वागत के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन मौजूदा अव्यवस्था ने इसे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। जरूरत इस बात की है कि निर्माण स्थल पर तत्काल पर्याप्त रोशनी, बैरिकेडिंग और स्पष्ट संकेतक लगाए जाएं, ताकि विकास का यह काम लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण न बने।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस समस्या का संज्ञान कब लेता है।