सर्पदंश से बचाव एवं त्वरित उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने किया जन-जागरूक
अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस के अवसर पर जिले की विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में सर्पदंश से बचाव, प्राथमिक उपचार एवं समय पर चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने के संबंध में जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पदमेश उपाध्याय ने बताया कि सर्पदंश गंभीर, किंतु रोकथाम योग्य जनस्वास्थ्य समस्या है। समय पर उपचार मिलने तथा एंटी स्नेक वेनम सहित आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से सर्पदंश के कारण होने वाली मृत्यु एवं गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्षा ऋतु में सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि होती है। सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय पीड़ित को शांत एवं स्थिर रखते हुए तत्काल निकटतम स्वास्थ्य संस्था में ले जाना चाहिए। प्रभावित अंग से अंगूठी, घड़ी, गहने तथा अन्य कसाव वाली वस्तुएं तत्काल हटा देनी चाहिए। दंश वाले स्थान पर चीरा नहीं लगाना चाहिए और न ही उसे मुंह से चूसना चाहिए। झाड़-फूंक कराने, बर्फ लगाने अथवा प्रभावित अंग पर कसकर पट्टी बांधने से भी बचना चाहिए।
सीएमएचओ डॉ. उपाध्याय ने आमजन से अपील की है कि सर्पदंश से बचाव के लिए रात में आवागमन के दौरान टॉर्च का उपयोग करें, पैर ढकने वाले जूते पहनें तथा घर एवं आसपास के परिसर में साफ-सफाई बनाए रखें। उन्होंने फर्श पर सोने से बचने की भी सलाह दी है। सर्पदंश के बाद प्रभावित स्थान पर सूजन एवं तेज दर्द, बेहोशी, पलकों का भारी होना, उल्टी, सांस लेने में कठिनाई अथवा आंखों से धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना विलंब किए तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करनी चाहिए।
64 views | Morena, Madhya Pradesh | Sep 19, 2026