धनतेरस पर शीतकाल के लिए बंद हुए तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट
कपाट बंद होने से पहले मंदिर को आठ कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। सुबह से ही मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए थे। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ कपाट बंद किए गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हो गई। डोली शुक्रवार को चोपता में रात्रि विश्राम करेगी। सात नवंबर को भनकुंड और आठ नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी। इसके बाद शीतकाल में भगवान तुंगनाथ की पूजा-अर्चना मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में संपन्न होगी।