ऋषिकेश में पेड़ों को बचाने की मुहिम लाई रंग, फिलहाल रुकी पेड़ों की कटाई
देहरादून/ऋषिकेश: पिछले कई दिनों से ऋषिकेश–देहरादून फोर/सिक्स लेन परियोजना के तहत हो रही पेड़ों की कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं द्वारा लगातार आवाज़ उठाई जा रही थी। धरने, प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान और 'ब्लैक हरेला' जैसे प्रतीकात्मक आंदोलनों के माध्यम से लोगों ने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की मांग को मजबूती से रखा। अब इस जनआंदोलन का असर दिखाई देने लगा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति एवं विश्वास का वातावरण नहीं बन जाता, तब तक परियोजना के अंतर्गत आने वाले पेड़ों की कटाई स्थगित रहेगी। उन्होंने अधिकारियों को सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से दोबारा विस्तृत संवाद करने के निर्देश भी दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ जनभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देती है। उनका कहना है कि उत्तराखंड की प्रकृति, स्थानीय लोगों की भावनाएं और प्रदेश का विकास—तीनों सरकार की प्राथमिकता हैं और आगे की कार्रवाई संवाद, सहमति तथा व्यापक जनहित के आधार पर ही की जाएगी।
गौरतलब है कि ऋषिकेश क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को लेकर लगातार विरोध हो रहा था। स्थानीय लोगों का कहना था कि सड़क विकास आवश्यक है, लेकिन इसके लिए वर्षों पुराने पेड़ों का बड़े पैमाने पर कटान पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन जारी था।
हालांकि, पेड़ों की कटाई स्थगित होने का फैसला आंदोलन से जुड़ी आवाज़ों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, लेकिन परियोजना पर अंतिम निर्णय सभी पक्षों के बीच संवाद और सहमति बनने के बाद ही लिया जाएगा। अब लोगों की निगाहें सरकार और NHAI की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।