#नालंदा - कादी बीघा काली मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, एक किलोमीटर तक लगी श्रद्धालुओं की कतार*
नवमी पर मां काली के दर्शन के लिए उमड़ी महिला-पुरुषों की भारी भीड़, भूखे-प्यासे घंटों इंतजार करते रहे श्रद्धालु, भभूति का विशेष महत्व
नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार
नालंदा - नवरात्र की नवमी के अवसर पर रहूई प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत कादी बीघा गांव स्थित प्रसिद्ध काली माता मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मां काली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि मंदिर परिसर से लेकर आसपास के रास्तों तक भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई। देर रात से ही मंदिर में दर्शन करने के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी। सुबह होते-होते कतार करीब एक किलोमीटर तक पहुंच गई। मां के दर्शन की आस में श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
नवमी को लेकर मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तिमय माहौल बना रहा। मां काली के जयकारों से पूरा इलाका गूंजता रहा। कोई हाथों में पूजा की थाली लेकर पहुंचा था, तो कोई नारियल, फूल-माला और प्रसाद के साथ मां के दरबार में हाजिरी लगाने आया था। महिलाओं, पुरुषों और अन्य श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण मंदिर परिसर में काफी चहल-पहल रही। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त मां काली के दर्शन करने पहुंचे।
भूखे-प्यासे घंटों कतार में खड़े रहे श्रद्धालु
मां के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई भक्त देर रात से ही कतार में लग गए थे। दर्शन करने की इच्छा में लोग घंटों भूखे-प्यासे खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे। भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं में मां के दर्शन को लेकर उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचे थे, तो कई अपनी मन्नत पूरी होने के बाद मां के दरबार में धन्यवाद देने आए थे।
*मन्नत पूरी होने पर रुपये और सोने-चांदी के आभूषण चढ़ाते हैं भक्त*
कादी बीघा स्थित काली माता मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ-साथ मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाने की भी पुरानी परंपरा चली आ रही है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मां के दरबार में रुपये, सोने-चांदी के आभूषण सहित अन्य वस्तुएं दान करते हैं। मान्यता है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होने पर भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा अर्पित करते हैं। इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु नवमी के दिन मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर की भभूति का विशेष महत्व
कादी बीघा के काली माता मंदिर में भभूति का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद भभूति प्राप्त करने के लिए भी उत्सुक रहते हैं। भक्त इसे मां का प्रसाद मानकर श्रद्धापूर्वक अपने साथ ले जाते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं और वर्षों से चली आ रही परंपराओं के कारण यहां श्रद्धालुओं की गहरी आस्था बनी हुई है। नवरात्र के दौरान विशेषकर नवमी के दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
*सैकड़ों वर्षों से चली आ रही आस्था और परंपरा*
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कादी बीघा स्थित काली माता मंदिर में पूजा-अर्चना और मन्नत मांगने की परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि नवरात्र के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था और परंपरा का भी महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
*भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात*
नवमी के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई। लंबी कतार और भक्तों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण ढंग से मां काली के दर्शन कर सकें। कुल मिलाकर, नवमी के अवसर पर कादी बीघा काली माता मंदिर में आस्था, विश्वास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा को बयां कर रहा था।
Rahui, Nalanda | Oct 19, 2026