"वाह रे प्रशासन! वाह रे व्यवस्था!" 🔥
जब सरकारें नींद में सोई हों और प्रशासन को फुर्सत न हो, तो फिर जनता को ही 'आत्मनिर्भर' बनना पड़ता है!
शहर के वार्ड नंबर 45 में कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिल रहा है। प्रशासन का मुंह ताकने की जगह परेशान जनता खुद ही फावड़ा-तगाड़ी उठाकर सड़क के गड्ढे भरने में जुट गई है। अब जब सरकारी मशीनरी ने हाथ खड़े कर दिए हैं, तो फिर लोग और क्या ही करें?
सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर रांकावत ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर प्रशासन की 'मुस्तैदी' और जनता के 'दर्द' की पोल खोल दी है।
टैक्स जनता भरे, वोट जनता दे, और जब गड्ढे भरने की नौबत आए तो भी फावड़ा जनता ही उठाए?
क्या प्रशासन सिर्फ कागजों में विकास के दावे करने के लिए बैठा है?
अगर नगर निगम और प्रशासन के पास गड्ढे भरने का बजट नहीं बचा है, तो कम से कम इन जागरूक नागरिकों को "सर्वश्रेष्ठ ठेकेदार" का अवॉर्ड ही दे दीजिए!
साहब, थोड़ा एसी कमरों से बाहर निकलिए और अपने शहर का हाल देखिए!
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