*बस्ती में जन्मोत्सव बना मानवता का पर्व, पूरे परिवार ने लिया देहदान का संकल्प*
जनपद बस्ती उत्तर प्रदेश 19 दिसंबर 2026
* जहाँ लोग जन्मदिन पर केक काटते हैं और जश्न मनाते हैं, वहीं बस्ती के एक परिवार ने अपनी बेटी के जन्मोत्सव को मानवता की मिसाल बना दिया। देहदान जैसा बड़ा संकल्प लेकर इस परिवार ने साबित कर दिया कि असली खुशी दूसरों के काम आने में है।
शहर के गांधी नगर स्थित गौरीदत्त धर्मशाला में शनिवार शाम *जन उत्थान चैरिटेबल ट्रस्ट, बस्ती* के तत्वाधान में एक भव्य और प्रेरणादायी देहदान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा के लिए देहदान के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जागरूक करना था
*जन्मदिन पर लिया महादान का संकल्प -*
कार्यक्रम के दौरान भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी *कुलभूषण अग्रहरी, उनके पुत्र कुलदीप अग्रहरी एवं पुत्रवधू मानसी अग्रहरी* ने अपनी पुत्री के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर एक साथ देहदान का संकल्प पत्र भरकर पूरे समाज को मानव सेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी अगर हमारा शरीर किसी के काम आ सके, तो इससे बड़ा पुण्य और कोई नहीं। इस अवसर पर पूर्व में ही देहदान का संकल्प ले चुके समाजसेवी *बालजी लाल श्रीवास्तव* को मंच से प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिनका कार्य पूरे जनपद के लिए प्रेरणा है।
*मंच पर डॉक्टरों ने समझाया देहदान का महत्व -*
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि *महर्षि वशिष्ठ राजकीय मेडिकल कॉलेज बस्ती के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार* रहे। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में छात्रों को पढ़ाने के लिए देह की कमी एक बड़ी चुनौती है। एक देहदानी का शरीर सैकड़ों डॉक्टरों को तैयार करता है, जो आगे चलकर लाखों लोगों की जान बचाते हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपप्राचार्य डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्रा, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष, डॉ. अनिल कुमार यादव, डॉ. पूजा यादव, जिला युवा कल्याण अधिकारी राम प्रताप सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष चन्द्र अग्रहरी, अग्रहरी समाज के प्रादेशिक कोषाध्यक्ष, पेंशनर्स संघ के अध्यक्ष नरेन्द्र बहादुर उपाध्याय सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर बैच लगाकर और स्वागत गीत के माध्यम से स्वागत किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है - परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है। देहदान ज्ञान का दान है, जो कभी व्यर्थ नहीं जाता। हमारे पूर्वजों ने राष्ट्र और समाज के लिए अपना सब कुछ न्योछावर किया, अब हमारी बारी है कि हम आने वाली पीढ़ी को क्या देकर जाएं। क्या हम सिर्फ संपत्ति छोड़कर जाएंगे या एक ऐसी सोच भी जो मानवता के काम आए।
अक्सर लोग सोचते हैं कि देहदान करने से आत्मा को शांति नहीं मिलती, या अंतिम संस्कार नहीं हो पाता, जो कि पूरी तरह से एक भ्रम है। विज्ञान कहता है कि मृत्यु के बाद शरीर का कोई अस्तित्व नहीं, लेकिन वही शरीर अगर किसी मेडिकल छात्र को मानव शरीर की संरचना सिखा दे, तो वह डॉक्टर बनकर अनगिनत जिंदगियां बचाएगा।
यह संकल्प दर्शाता है कि बस्ती जैसे छोटे शहर में भी अब लोग बड़ी सोच के साथ आगे आ रहे हैं। यह कार्यक्रम सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो आने वाले समय में बस्ती को देहदान के क्षेत्र में प्रदेश में एक अलग पहचान दिलाएगा। जरूरत है तो बस इस चिंगारी को आग में बदलने की, ताकि हर व्यक्ति गर्व से कह सके - मेरे जाने के बाद भी मेरा शरीर देश के काम आएगा।
ट्रस्ट के संस्थापक एवं निदेशक *इंजी. अंशुल पटेल* ने कहा, "देहदान में विश्व कल्याण की भावना निहित है। हमारी संस्था लगातार लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। जब एक छात्र देहदानी के शरीर से सीखता है, तो उसके सामने सिर्फ एक शरीर नहीं, बल्कि एक मौन शिक्षक होता है जो बिना बोले सब कुछ सिखा जाता है।"
कार्यक्रम के अंत में संकल्प लेने वाले परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया गया और लोगों से अपील की गई कि वे देहदान के बारे में वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त कर समाज में फैलाएं। इस कार्यक्रम से प्रेरित होकर ओमप्रकाश पाठक, सत्यप्रकाश पटेल, करन पाठक, प्रवेश चौधरी, शिवम त्रिपाठी, जयदीप चौधरी, अमित श्रीवास्तव सहित लगभग 600 लोगों ने भविष्य में देहदान का संकल्प पत्र भरने की घोषणा की। कार्यक्रम का संचालन अविनाश श्रीवास्तव और उनकी भजन मंडली ने किया।
संवाददाता हरी ओम प्रकाश
राष्ट्रीय हिंदी दैनिक कौटिल्य का भारत
Basti, Basti | Sep 20, 2026