आजकल ऐसा लगता है कि हर किसी की नज़र सिर्फ़ RSS पर ही है।
देश में अनेक संगठन सामाजिक कार्य कर रहे हैं, अपने विचार समाज तक पहुँचा रहे हैं, लेकिन निशाना हमेशा सिर्फ़ RSS ही क्यों बनता है?
किसी भी मामले की निष्पक्ष जाँच पूरी होने से पहले ही RSS को दोषी ठहरा देना..क्या यही न्याय है?
लोकतंत्र में आरोप नहीं, सबूत बोलने चाहिए। किसी भी संगठन या व्यक्ति पर निर्णय तथ्यों और जाँच के आधार पर होना चाहिए, न कि पूर्वाग्रह के आधार पर।
#विचार।