➡️ तीन दिवसीय इंडो जर्मन वर्कशॉप खुरई का समापन, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक कृषि, फसल अवशेष प्रबंधन पर हुई चर्चा से निकाला निष्कर्ष
इंडो जर्मन को ऑपरेशन के तहत GIZ संस्था द्वारा दिनांक 16 से 18 जून 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय इंडो जर्मन वर्कशॉप का खुरई में समापन हुआ। दिनांक 18 जून के प्रथम सत्र में श्री योगिराज ने 'प्राकृतिक कृषि में यंत्रीकरण को कम करना' विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया।
भारत में कृषि यंत्रीकरण और प्राकृतिक कृषि उन्नयन सत्र में जर्मनी के कमर्शियल ऑफिसर मिस्टर जोसेफ, हिमवासिनी फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन से रईस ठाकुर, जतारा महिला कृषक उत्पादक समूह श्रीमती सुनीता राजा बुंदेला, बायो रिसोर्स पर काम कर रहे डॉक्टर साहनी, अमझरा कृषक उत्पादक संगठन से अरविंद सिंह ठाकुर,कृषि निर्माता संघ से अर्पित जैन, अनुविभागीय कृषि अधिकारी जय दत्त शर्मा सम्मिलित हुए।
जर्मनी मूल के मिस्टर जोसेफ ने कृषि यंत्रीकरण में अपडेट होने व भारत में रासायनिक उर्वरकों से कम हो रही मृदा उर्वरता की चर्चा की। हिमवासिनी एफपीओ से रईस ठाकुर ने प्राकृतिक खेती के उत्पाद का सही मूल्य मिलने संबंधी विषय पर चर्चा की।जतारा एफपीओ से श्रीमती बुंदेला ने उत्पादों का खाद्य प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य प्राप्त करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। डॉ साहनी ने प्राकृतिक खेती में बीज संस्कार विषय पर विस्तार से जानकारी दी।
अतिथि वक्ताओं ने प्राकृतिक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन में यंत्रीकरण, अनुसरण व चुनौतियों पर किसानों को जानकारी दी साथ ही समस्याओं के समाधान के लिए उपायों की भी चर्चा की। सत्र के बाद प्रश्नोत्तरी का कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें किसानों द्वारा पूछे गए सवालों का संतोषजनक उत्तर दिया गया।
द्वितीय सत्र में जर्मनी से पधारे मिस्टर जोसेफ ने 'प्राकृतिक, जैविक खादों का मशीन से फैलाव' विषय पर अपना प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने विश्व के कई देशों से प्राप्त डाटा के आधार पर प्राकृतिक खेती में उपयोग आने वाले यंत्रों की जानकारी दी और कहा कि स्थानीय आवश्यकता और उपयोगिया के आधार पर कृषि यंत्रों का निर्माण एक महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। डॉ जोसेफ ने भारत में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को भविष्य के लिए चिंताजनक बताया।
कृषि यंत्रों में नवाचार
अंतर्गत अनुविभागीय कृषि अधिकारी जय दत्त शर्मा ने 'साधारण सीडड्रिल को कैसे बनाएं उन्नत तकनीकी सीडड्रिल' विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया बदलने के फरो अटैचमेंट के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया। इस फरो अटैचमेंट को साधारण सीडड्रिल में आसानी से जोड़कर खरीफ फसलों जैसे सोयाबीन उड़द की बेड पर बुआई की जा सकती है साथ ही बहुत ही कम लागत आती है। जर्मनी से मिस्टर जोसेफ, कृषि यंत्रों पर कार्य कर रहे पंजाब से आए कुलबीर बरार ने अपने क्षेत्र में भी इस पर कार्य करने की बात की।
अंतिम सत्र में प्रथम द्वितीय व तृतीय दिन हुए फील्ड विजिट, कृषि निर्माण इकाइयों का भ्रमण, किसान संवाद, विभिन्न सत्रों में हुई चर्चा का सारांश निकाला गया कि किसान की आवश्यकता, तकनीकी उपयुक्तता व कृषि यंत्र निर्माता के संयुक्त प्रयास से कृषि यंत्रीकरण द्वारा कृषि पारिस्थितिकीय परिवर्तन को नई दिशा मिल सकती है।
फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाकर भूमि में कार्बनिक पदार्थ को बढ़ाया जा सकता है जिससे टिकाऊ खेती की ओर किसान अग्रसर हो सकें। इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम
विविध खेती की विचारधारा को अपनाकर जोखिम को कम शुद्ध लाभ को बढ़ाया जा सकता है। धीरे-धीरे ही सही लेकिन प्राकृतिक खेती के क्षेत्र को बढ़ाकर सफलता हासिल की जा सकती है।
कार्यक्रम में GIZ संस्था के डायरेक्टर जर्मनी हंस क्लेन सहित समस्त टीम, अतिथि वक्ता, कैमरून की मिस माइकल लाटा, कनाडा के जूलियन मेलार्ड ने इस वर्कशॉप को वर्कशॉप से फलदायक परिणाम आने की आशा की साथ ही खुरई क्षेत्र की कृषि की सराहना भी की। डायरेक्टर हेन्स क्लेन ने वर्कशॉप में आए सभी अतिथियों कृषकों ,कृषि सखियो का आभार माना।उपसंचालक कृषि राजेश त्रिपाठी के सहयोग के लिए साधुवाद जताया। कार्यक्रम में सागर जिले के विकासखंड से आए प्राकृतिक खेती करने वाले महिला व पुरुष कृषक, एफ पी ओ संचालक, कृषि सखी, कृषि विभाग स्टाफ सम्मिलित हुए।
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Sagar, Madhya Pradesh | Jun 18, 2026