बक्सर: गुरु शिष्य परंपरा में गुरु की पूजा तभी होती है जब शिष्य आगे बढ़े: डॉक्टर शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी, कुलपति VKSU ARA
Buxar, Buxar | Jan 22, 2025 गुरू शिष्य परंपरा में गुरू की पूजा तभी होती है जब शिष्य आगे जाय. इसी कारण परशुराम की पूजा नहीं होती है बल्कि द्रोणाचार्य की पूजा होती है. कहा जाता है कि द्रोणाचार्य के शिष्य जबतक अर्जुन के हाथ में शस्त्र है उसे कोई हरा नहीं सकता है. राम देवता थे. भारतीय स्मिता थे तो विश्वामित्र उनके गुरू थे. वीकेएसयू के कुलपति डॉक्टर शैलेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने कही.