प्रदेश में जर्जर सरकारी स्कूलों की स्थिति पर हाईकोर्ट को सख्ती दिखानी पड़े, इससे ज्यादा शर्मनाक सरकार के लिए और क्या हो सकता है? जिन स्कूलों में प्रदेश के बच्चे पढ़ते हैं, उनकी इमारतों और बुनियादी सुविधाओं को सुरक्षित रखना सरकार की पहली जिम्मेदारी है।
पिछले वर्ष पीपलोदी में हुई दुखांतिका आज भी दिल दहला जाती है। उसके बाद सरकार ने व्यवस्था सुधारने के कई दावे किए, लेकिन वे सभी जमीनी हकीकत से दूर ही नजर आ रहे हैं।
यह सरकार के गवर्नेंस मॉडल की विफलता है। जर्जर स्कूल भवनों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने, वैकल्पिक व्यवस्था होने तक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्कूलों की मरम्मत एवं निर्माण के लिए स्वीकृत फंड के समुचित उपयोग जैसे कई बड़े दावे किए गए थे। हकीकत यह है कि ये दावे — कागजों पर ज्यादा और धरातल पर कम नजर आ रहे हैं।
Batadoo, Barmer | Aug 12, 2026