त्रिभाषा सूत्र से समृद्ध होगी भारतीय संस्कृति : सतप्रकाश बंसल
‘अक्षर से आदमबोध तक’ पुस्तक के माध्यम से युवाओं को मातृभाषा, संस्कृति और अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश
शिमला। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतप्रकाश बंसल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत त्रिभाषा सूत्र का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को समृद्ध करना और भाषा के माध्यम से देश की संस्कृति को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि ‘अक्षर से आदमबोध तक’ केवल एक पुस्तक नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और देश की जड़ों से जोड़ने का संदेश है।
प्रो. सतप्रकाश बंसल ने बताया कि इस पुस्तक को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप त्रिभाषा सूत्र को लागू करने और भारतीय भाषाओं के महत्व को समझाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों, जिनमें चीन, फ्रांस और जापान शामिल हैं, ने अपनी भाषा की ताकत के आधार पर विकास किया है। ऐसे में भारत में भी अपनी भाषाओं को बढ़ावा देना और उनके माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बच्चा जन्म से ही अपनी मां और आसपास के वातावरण से सीखना शुरू कर देता है। जीवन के शुरुआती वर्षों में उसे मां से भाषा, संस्कार और संस्कृति मिलती है। ऐसे में जब बच्चे को उसकी मातृभाषा और परिचित परिवेश से अलग भाषा में शिक्षा दी जाती है, तो कई बार उसके लिए उस वातावरण से जुड़ना मुश्किल हो जाता है। इसका असर उसकी अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़ाव पर भी पड़ सकता है।
प्रो. बंसल ने कहा कि भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं को समृद्ध बनाने की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। इसी उद्देश्य के तहत उन्हें हिंदी और डोगरी भाषाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि त्रिभाषा सूत्र का उद्देश्य किसी भाषा को थोपना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय भाषाओं और मातृभाषाओं को प्रोत्साहित करना है, ताकि युवा अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान पर गर्व कर सकें।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस पुस्तक के संबंध में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता को जानकारी दी, तो राज्यपाल ने लोक भवन में इसका लोकार्पण करने की इच्छा जताई। उन्होंने पुस्तक के लोकार्पण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल युवाओं तक अपनी भाषा और संस्कृति के महत्व का संदेश पहुंचाने में सहायक होगी।
प्रो. बंसल ने कहा कि जब देश वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। युवाओं को अपनी भाषाओं, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़कर ही विकास की इस यात्रा को मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि ‘अक्षर से आदमबोध तक’ पुस्तक इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।