*चौथी ऊर्जा*
पहली ऊर्जा ने अणु बनाया और असंख्य अणुओं को संग्रहित करके तारे, ग्रह, उपग्रह बनाया।
इन ग्रहों, उपग्रहों को एक दूसरे से गुरूत्वाकर्षण बल से बांधकर रखने का काम दूसरी ऊर्जा ने किया।
तीसरी ऊर्जा ने अणुओं, ग्रहों को आपस में संयोजित किया।
चौथी ऊर्जा कूष्माण्डा है। कूष्माण्डा ऊर्जा ने ये तीनों ऊर्जाओं (शैलपुत्री, ब्रम्हचारिणी, चंद्रघंटा) से बने हुए संसार को एक कद्दू (कूष्माण्डा) फल के आकार में स्थापित करके ब्रम्हांड बना दिया।
कूष्माण्डा ने पूरी प्रकृति को बांध दिया और ब्रम्हाण्ड का निर्माण कर दिया।
जिसमे हमारी सौर मंडल जैसे अनेक सौर मंडल और हमारी मिल्कीवे आकाशगंगा की तरह अनेक आकाशगंगाएं इस ब्रम्हांड में स्थित हैं।
चौथी ऊर्जा ने इन तीन ऊर्जा को इस तरह से बांध दिया, और हमारे सारे ब्रम्हांड और ग्रहों को उस परिधि के अंदर सुरक्षित कर दिया।
यह ऊर्जा हमारे शरीर में कोशिका की संरचना बनाती है
जिसके अन्दर जीवन उत्पन्न करने वाले
सभी तरह के अणु होते है
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