लाहौल में बादल फटने और बाढ़ का कहर, किसानों की फसलें तबाह
पट्टन घाटी के पड़ाक गांव में तीन बीघा गोभी-मटर की फसल नष्ट, सड़क भी बंद
दो बीघा घासनी मलबे में दबी, पशुपालकों को भी भारी नुकसान
नकदी फसलें मंडियों तक पहुंचाना किसानों के लिए बनी बड़ी चुनौती
लाहौल। लाहौल घाटी में अचानक बढ़े तापमान और लगातार हो रही बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन के साथ-साथ किसानों की आजीविका पर भी गहरा असर डाला है। पट्टन घाटी के पड़ाक गांव में आई बाढ़ से करीब तीन बीघा भूमि में लगी गोभी और मटर की नकदी फसल पूरी तरह तबाह हो गई। इसके अलावा करीब दो बीघा घासनी भारी मलबे की चपेट में आ गई, जिससे पशुपालकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बाढ़ के कारण राउलिंग-मेलिंग संपर्क सड़क मार्ग भी मलबे से पूरी तरह बंद हो गया है। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई है और किसानों के लिए अपनी उपज को मंडियों तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
जिला परिषद के पूर्व चेयरमैन रमेश ने बताया कि हाल के वर्षों में लाहौल घाटी में बादल फटने और अचानक बाढ़ आने की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है और नकदी फसलों की खेती करना जोखिम भरा होता जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत प्रदान करने, क्षति का आकलन करने तथा बंद सड़क को जल्द बहाल करने की मांग की है, ताकि लोगों की आवाजाही और कृषि गतिविधियां सामान्य हो सकें।
Kullu, Kullu | Jul 2, 2026