सिंगरौली के विकास की नींव में राम लल्लू वैश्य का प्रमुख योगदान
जिला बनने से लेकर मेडिकल कॉलेज, माइनिंग कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, हवाई पट्टी, सड़क, बिजली, पानी और रेल सुविधाओं तक… विधानसभा की शोध-पत्रिका में दर्ज विकास कार्यों ने खींचा ध्यान
सिंगरौली आज प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और ऊर्जा केंद्रों में गिना जाता है, लेकिन इस पहचान तक पहुंचने का सफर कई वर्षों के संघर्ष और विकास कार्यों से होकर गुजरा है। मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय की त्रैमासिक शोध-पत्रिका ‘विधायिनी’ के मध्यप्रदेश विधानसभा के सात दशक विशेषांक में सिंगरौली के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया गया है।
इसमें सिंगरौली के पूर्व विधायक राम लल्लू वैश्य से जुड़े विकास कार्यों और प्रयासों का भी जिक्र है। पत्रिका में प्रकाशित विवरण के मुताबिक, सिंगरौली को जिला बनाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी और इस मांग को आगे बढ़ाने में तत्कालीन जनप्रतिनिधियों की भूमिका रही। इसमें यह भी उल्लेख है कि 24 मई 2008 को सिंगरौली को जिले के रूप में अस्तित्व में लाया गया।
जिला बनने के बाद विकास की रफ्तार ने पकड़ा जोर
शोध-पत्रिका में दर्ज विवरण के अनुसार, सिंगरौली में जिला बनने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, सिंचाई और पेयजल जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं।
विकास कार्यों में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, माइनिंग कॉलेज, हवाई पट्टी, सिंचाई24 परियोजनाएं और विद्युत एवं कोयला परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। यानी जिस सिंगरौली को कभी केवल कोयला और बिजली के लिए पहचाना जाता था, वहां उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं का विस्तार भी विकास की कहानी का हिस्सा बना।
स्कूल-कॉलेज से लेकर पुल-पुलिया तक का विस्तार
पत्रिका में बताए गए कार्यों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। इसमें पुल-पुलिया, हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल, कन्या महाविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और शासकीय लीड कॉलेज जैसे कार्यों का भी उल्लेख है।
सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी कई कार्य किए जाने की बात दर्ज है
सबसे खास बात यह कि कृषि विज्ञान केंद्र के लिए 53 एकड़ भूमि में केंद्र तैयार होने और उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन किए जाने का उल्लेख है। वहीं लीड कॉलेज के भवन विस्तार के लिए 12 एकड़ जमीन से जुड़ा विवरण भी शोध-पत्रिका में दिया गया है।
गांवों तक स्वास्थ्य और घर-घर पानी पहुंचाने की कोशिश
सिंगरौली के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का भी उल्लेख किया गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोरवा तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चरगोड़ा, तियरा और पड़री के तैयार होकर संचालित होने की जानकारी पत्रिका में दी गई है।
इसके अलावा हर घर नल जल योजना के संचालन का भी उल्लेख किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा पहुंचाने की दिशा में किए गए प्रयास सामने आते हैं।
रेल कनेक्टिविटी ने बदली सिंगरौली की तस्वीर
सिंगरौली जैसे औद्योगिक क्षेत्र के लिए रेल कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण है। पत्रिका में दर्ज विवरण के अनुसार, सिंगरौली से भोपाल और सिंगरौली से दिल्ली तक साप्ताहिक ट्रेन, जबकि सिंगरौली से जबलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस जैसी रेल सेवाओं का भी उल्लेख किया गया है।
यानी विकास की तस्वीर केवल सड़क और इमारतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सिंगरौली को प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाली परिवहन सुविधाओं तक भी पहुंची।
एक सवाल आज भी अहम- क्या सिंगरौली के विकास की इस कहानी को नई पीढ़ी जानती है
सिंगरौली की राजनीति में अलग-अलग समय पर कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी भूमिका निभाई है। लेकिन विधानसभा सचिवालय की शोध-पत्रिका में दर्ज यह सामग्री इस बात को समझने का एक आधार देती है कि सिंगरौली को जिला बनाने से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, बिजली और रेल जैसी सुविधाओं के विस्तार तक विकास का सफर किन पड़ावों से होकर गुजरा।
राम लल्लू वैश्य के समर्थक इन कार्यों को उनके राजनीतिक योगदान से जोड़कर देखते हैं, जबकि व्यापक तौर पर यह सिंगरौली के विकास की उस यात्रा का दस्तावेज है, जिसे आज की पीढ़ी के सामने रखना जरूरी है।
जिस सिंगरौली को आज देश ऊर्जा की राजधानी के रूप में जानता है, उसके विकास की कहानी सिर्फ कोयले और बिजली की कहानी नहीं है… इसके पीछे जिला गठन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी और रेल कनेक्टिविटी की एक लंबी यात्रा भी है।