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सिंगरौली:बैढ़न मे एक लड़की की डंडे से पिटाई करने का वीडियो वायरल
असंगठित एवं ठेका मजदूर संघ ने 23 जुलाई को स्थापना दिवस पर आयोजित संगोष्ठी
सड़क नहीं... मौत का जाल! NTPC विंध्याचल के पास 'तालाब' बनी सड़क, जिम्मेदार कौन?

सिंगरौली। देश को रोशनी देने वाले एशिया के सबसे बड़े ताप विद्युत परियोजनाओं में शामिल NTPC विंध्याचल के आसपास की सड़क खुद अंधेरों में डूबी नजर आ रही है। रेलवे क्रॉसिंग से शक्तिनगर बायपास की ओर जाने वाला मार्ग इन दिनों सड़क कम, तालाब ज़्यादा दिखाई दे रहा है। बारिश का पानी और गहरे गड्ढे मिलकर हर गुजरने वाले वाहन चालक के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।

आलम यह है कि राहगीरों को समझ ही नहीं आता कि सड़क कहां खत्म होती है और गड्ढा कहां शुरू होता है। दोपहिया चालक जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं, जबकि भारी वाहनों के गुजरने से हादसे का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस सड़क की जिम्मेदारी किसकी है? NTPC की, लोक निर्माण विभाग की या जिला प्रशासन की? यदि यह सार्वजनिक मार्ग है तो अब तक इसकी मरम्मत और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बरसात में यही हाल होता है। शिकायतें होती हैं, आश्वासन मिलते हैं, लेकिन सड़क की तस्वीर नहीं बदलती। करोड़ों रुपये के विकास के दावों के बीच आम लोगों को सुरक्षित सड़क तक नसीब नहीं हो रही।

—क्या जिम्मेदार अधिकारी इस बदहाल सड़क पर तत्काल कार्रवाई करेंगे, या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही नींद खुलेगी?

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किसानों को समय पर खाद उपलब्ध न होने को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन
पंचायत में हुये भ्रष्टाचार की खुली पोल
मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना पर उठे सवाल,20 से 30 प्रतिशत कमीशनखोरी के आरोपों की चर्चा तेज

सिंगरौली । मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के तहत देवसर जनपद पंचायत क्षेत्र में कराए गए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। 
 क्षेत्र के बेलगांव, कठदहा, बूढ़ाडाड़ सहित कई ग्राम पंचायतों में हाल ही में निर्मित पुल-पुलियाओं के पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त या धराशायी होने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर तेज हैं। इन घटनाओं के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस शुरू हो गई है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि योजना के तहत निर्माण कार्यों की स्वीकृति में 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे निर्माण संबंधी मामलों ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुए होते तो पहली ही बारिश में पुल-पुलियाओं की यह स्थिति नहीं होती। सूत्रों के अनुसार  इन निर्माण कार्यों में जनपद पंचायत स्तर से लेकर तकनीकी अमले तक की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा है कि संबंधित सीईओ, सहायक यंत्री और उपयंत्री की कार्यप्रणाली को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।  
जांच हो तो नप सकते हैं कई अधिकारी
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में निर्माण कार्यों में अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि निर्माण कार्य कुछ ही महीनों में खराब होने लगें तो इससे सरकारी धन की बर्बादी के साथ जनता का भरोसा भी कमजोर होता है। फिलहाल पूरे मामले में संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही आवश्यक है। ऐसे में अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं।
अब क्या देंगे जवाबॅ!  इनके कार्यकाल में हुआ खेल
चर्चाओं के बीच यह बात भी सामने आ रही है कि संबंधित सीईओ का कहना था कि उनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी उनकी है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिन पुल-पुलियाओं का निर्माण इसी कार्यकाल में हुआ और जो पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गईं, उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में आखिर कहां चूक हुई। क्या निर्माण एजेंसियों ने निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया या फिर निगरानी व्यवस्था कमजोर रही, इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। इधर लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और समय-समय पर निरीक्षण की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है। यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं हुए तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
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खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई : 32 टन अवैध कोयला जब्त

सिंगरौली:कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देशानुसार जिले में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार सघन अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में खनिज विभाग द्वारा वन विभाग एवं एनसीएल के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई करते हुए बड़ी सफलता प्राप्त की गई है। कार्रवाई के दौरान लगभग 32 टन अवैध रूप से भंडारित कोयला जब्त किया गया है।
खनिज अधिकारी सुश्री आकांक्षा पटेल के मार्गदर्शन में सहायक खनिज अधिकारी,रामसुशील चौरसिया द्वारा दिनांक 20 जुलाई 2026 को वन विभाग के रेंजर एवं एनसीएल के सुरक्षा कर्मियों के सहयोग से संयुक्त जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान एनसीएल की निगाही परियोजना खदान के समीप रेलवे लाइन से लगभग 200 मीटर की दूरी पर बड़ी मात्रा में कोयला अवैध रूप से भंडारित पाया गया। जांच में मौके पर लगभग 32 टन कोयला लावारिस अवस्था में मिला, जिसके संबंध में कोई वैध अभिलेख अथवा स्वामित्व प्रस्तुत नहीं किया जा सका। संयुक्त दल द्वारा मौके पर उपलब्ध कोयले को तत्काल जब्त कर नियमानुसार सुरक्षार्थ पुलिस थाना मोरवा में रखवाया गया। खनिज विभाग द्वारा जब्त कोयले का पंचनामा तैयार कर आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूर्ण की गई है। प्रकरण में मध्यप्रदेश खनिज नियमों के प्रावधानों के तहत अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध खनिज गतिविधियों के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। अवैध उत्खनन, परिवहन अथवा भंडारण में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध खनिज गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें, ताकि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
सिंगरौली:सासन पावर प्लांट में हुई एक मजदूर की मौत गुस्साए परिजनों ने प्लांट गेट पर किया हंगामा, पूर्व नगर निगम अध्यक्ष चंद्र प्रताप विश्वकर्मा ने जनप्रतिनिधियों पर लगाया गंभीर आरोप
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सिंगरौली: रिलायंस सासन पावर प्लांट के लापता श्रमिक का शव पेड़ से लटकता मिला, प्लांट गेट पर परिजनों का हंगामा

सिंगरौली। जिले के रिलायंस सासन पावर प्लांट से ड्यूटी के बाद लापता हुए खम्हरिया निवासी श्रमिक जगदीश साकेत का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका मिला है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों और सहकर्मियों में आक्रोश फैल गया।

गुस्साए परिजनों और श्रमिकों ने रिलायंस सासन पावर प्लांट के मुख्य गेट पर जमकर हंगामा किया और मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं।

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सिंगरौली में लोकायुक्त का बड़ी कार्रवाई,
वन रक्षक 2 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

सिंगरौली:रीवा लोकायुक्त पुलिस ने शनिवार को सिंगरौली जिले में बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए वन परिक्षेत्र बरगवां की ओबरी वन चौकी में पदस्थ वन रक्षक अखिलेश शुक्ला को 2 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

जानकारी के अनुसार ग्राम ओबरी निवासी रामलोचन प्रजापति ने 16 जुलाई 2026 को लोकायुक्त कार्यालय रीवा में पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उन्होंने कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर खरीदा है। गांव के समीप गुरमुटिया टोला के वन अधिकार पट्टा धारकों के खेतों की जुताई करने जाने पर ओबरी वन चौकी में पदस्थ वन रक्षक अखिलेश शुक्ला उन्हें रोकता था और प्रतिदिन कार्य करने के एवज में 2,000 रुपये रिश्वत की मांग करता था।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त योगेश्वर शर्मा के निर्देशन में ट्रैप टीम का गठन किया गया।

शनिवार को लोकायुक्त टीम ने ओबरी वन चौकी परिसर में जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी वन रक्षक को 2,000 रुपये की रिश्वत दी, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
कलेक्टर ने त्रिमुला इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी को किया सीज,परक्यावरण मानकों की हो रही थी अनदेखी

सिंगरौली:जिले के बरगवां तहसील अंतर्गत ग्राम गोंदवाली स्थित मेसर्स त्रिमुला इण्डस्ट्रीज लिमिटेड (स्पंज आयरन इकाई) द्वारा पर्यावरणीय मानकों के निरंतर उल्लंघन एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रावधानों के अनुपालन में गंभीर कमियां पाए जाने पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योग की उत्पादन प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही उद्योग का विद्युत प्रदाय तत्काल विच्छेदित किए जाने के आदेश भी संबंधित विद्युत वितरण कंपनी को दिए गए हैं। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31(क) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उक्त आदेश जारी किया गया है। यह कार्रवाई जिला कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, सिंगरौली गौरव बैनल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन एवं उद्योग के विरुद्ध उपलब्ध निरीक्षण प्रतिवेदनों के परीक्षण उपरांत की गई है।

उल्लेखनीय है कि बोर्ड द्वारा उद्योग को दिनांक 15 जून 2026 को आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया था। उद्योग प्रबंधन द्वारा अनुपालन किए जाने का दावा प्रस्तुत किए जाने के उपरांत क्षेत्रीय अधिकारी, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंगरौली द्वारा दिनांक 9 जुलाई 2026 को स्थल निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन किया गया। निरीक्षण में उद्योग द्वारा प्रस्तुत अनुपालन दावा तथ्यों के अनुरूप नहीं पाया गया तथा विभिन्न पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन यथावत पाया गया। निरीक्षण के दौरान स्थापित इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रीसिपिटेटर (ESP) एवं एयर कंप्रेसर का समुचित संचालन नहीं पाया गया, जिसके परिणामस्वरूप चिमनी से अत्यधिक धूलयुक्त उत्सर्जन हो रहा था। साथ ही ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) का डेटा असामान्य रूप से स्थिर पाया गया, जिससे प्रणाली की विश्वसनीयता एवं वास्तविक समय की निगरानी पर गंभीर प्रश्न उत्पन्न हुए।

निरीक्षण में यह भी पाया गया कि परिसर में स्थापित परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन में PM-10 एवं PM-2.5 का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक दर्ज किया गया। पावर प्लांट के समीप स्थापित वायु गुणवत्ता विश्लेषक (Analyzer) संचालनरत नहीं पाया गया। इसके अतिरिक्त उद्योग परिसर में पर्यावरण प्रबंधन हेतु आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं थे, तकनीकी कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) का उपयोग नहीं किया जा रहा था, फाइन आयरन डस्ट का खुले में भंडारण किया गया था, जिससे वर्षा जल के साथ इसके बहाव के प्रमाण मिले। साथ ही ठोस अपशिष्ट एवं खतरनाक अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित प्रबंधन भी निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाया गया। उक्त तथ्यों के आधार पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योग की उत्पादन प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से बंद रखने तथा विद्युत आपूर्ति विच्छेदित करने के निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि उद्योग को उत्पादन पुनः प्रारंभ करने की अनुमति तभी प्रदान की जाएगी, जब निरीक्षण में चिन्हित सभी कमियों का पूर्ण निराकरण कर पर्यावरणीय मानकों एवं वैधानिक प्रावधानों का संतोषजनक अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी गौरव बैनल ने कहा कि जिले में पर्यावरण संरक्षण एवं जनस्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध विधि सम्मत एवं प्रभावी कार्रवाई भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने संबंधित विभागों को आदेशों का समयबद्ध एवं प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
महान एनर्जन लिमिटेड कंपनी (अदाणी) प्लांट से 3.50 लाख की केबल चोरी का खुलासा, आरोपी गिरफ्तार

सिंगरौली:जिले के माडा थाना अंतर्गत बंधौरा पुलिस ने प्लांट से हुई लाखों रुपये की केबल चोरी का खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 3.50 लाख कीमत की कॉपर केबल, एल्यूमीनियम केबल, सीलिंग वायर एवं सेफ्टी बेल्ट बरामद कर जब्त की है।

पुलिस अधीक्षक शियाज़ के.एम. के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सर्वप्रीय सिन्हा के मार्गदर्शन में चोरी की घटनाओं के खुलासे के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत एसडीओपी रोशनी कुर्मी के मार्गदर्शन में माडा थाना प्रभारी शिवपूजन मिश्रा के नेतृत्व तथा बंधौरा चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक संदीप नामदेव की टीम ने यह कार्रवाई की।

पुलिस के अनुसार 17 जून 2026 को मीराज इंजीनियरिंग लिमिटेड कंपनी जो अडानी समूह के अंतर्गत विद्युत इरेक्शन का कार्य कर रही है, मीराज के परिसर से आरोपी बबलू प्रसाद जायसवाल उम्र 32 वर्ष निवासी कर्सुआलाल, चौकी बंधौरा ने अलग-अलग समय में करीब 100 मीटर कॉपर केबल, 90 मीटर एल्यूमीनियम केबल, सीलिंग वायर एवं सेफ्टी बेल्ट चोरी कर ली थी।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसकी निशानदेही पर चोरी गया पूरा सामान उसके कब्जे एवं घर से बरामद कर जब्त कर लिया गया। आरोपी के विरुद्ध धारा 303(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया।

कार्रवाई में सराहनीय भूमिका
उक्त कार्यवाही में चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक संदीप नामदेव, सहायक उपनिरीक्षक राजवर्धन सिंह, प्रधान आरक्षक राकेश विश्वकर्मा तथा आरक्षक दिलीप धाकड़, अनीश सिंह, रामराजा और शिवेंद्र सिंह की उल्लेखनीय भूमिका रही।
स्टाफ  संकट से जूझ रहा कृषि विभाग
118 पद स्वीकृत, केवल 37 कर्मचारी तैनात, कर्मचारियों की कमी से प्रभावित हो रहीं योजनाएं

सिंगरौली । किसानों के हित में केंद्र और राज्य सरकार लगातार नई-नई योजनाएं लागू कर रही हैं, लेकिन सिंगरौली जिले में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर कर्मचारियों की भारी कमी का संकट साफ दिखाई दे रहा है। 

 कृषि विभाग इन दिनों स्टाफ  की गंभीर कमी से जूझ रहा है। विभाग में 118 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 37 कर्मचारी कार्यरत हैं। यानी करीब 70 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं और महज 30 प्रतिशत स्टाफ  के भरोसे पूरे जिले की कृषि व्यवस्था संचालित की जा रही है। वर्तमान समय में खरीफ  सीजन के चलते किसानों को उन्नत बीज वितरण, खाद उपलब्धता, फसल सलाह, खेतों का निरीक्षण, योजनाओं का प्रचार-प्रसार और शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन का कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसे समय में कर्मचारियों की कमी विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। सीमित स्टाफ  पर कई गुना अधिक कार्यभार होने से योजनाओं के संचालन और किसानों तक समय पर सेवाएं पहुंचाने में कठिनाइयां सामने आ रही हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार उप संचालक कृषि कल्याण कार्यालय से लेकर क्षेत्रीय अमले तक एडीओ, एसडीओ, आरईओ, लिपिक, भृत्य एवं अन्य श्रेणियों के कुल 118 पद स्वीकृत हैं। इनमें से अधिकांश पद लंबे समय से रिक्त हैं। सबसे अधिक असर मैदानी अमले पर पड़ा है। जिले में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों  आरईओ  के केवल 28 पद ही भरे हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक है। इसके अलावा लिपिकीय स्टाफ और सहायक कर्मचारियों की कमी भी विभाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है।

मैदानी कर्मचारियों की व्यापक समस्या

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा, जब पर्याप्त संख्या में मैदानी कर्मचारी गांव-गांव पहुंचकर जानकारी देंगे, फसलों का निरीक्षण करेंगे और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे। लेकिन वर्तमान हालात में एक-एक कर्मचारी को कई क्षेत्रों का जिम्मा संभालना पड़ रहा है, जिससे नियमित निगरानी और प्रभावी अमल प्रभावित हो रहा है। जिले के किसान भी अपेक्षा कर रहे हैं कि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं, ताकि बीज वितरण, फसल सुरक्षा, तकनीकी सलाह और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। कर्मचारियों की कमी दूर किए बिना कृषि विभाग पर बढ़ता कार्यभार कम होना मुश्किल नजर आ रहा है, जिसका सीधा असर किसानों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।

योजनाओंं का क्रियान्वयन भगवान भरोसे

जिले में संचालित कृषि विभाग के जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार एवं क्रियान्वयन भगवान भरोसे है। योजनाओं का प्रचार-प्रसार सिर्फ दफ्तरों के कागजों तक ही सीमित है। चर्चा यहां तक है कि स्टाफ की कमी के वजह से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार नही हो पा रहा है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेसियों ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा है कि भाजपा सरकार कभी भी किसानों की हिमायती नही रही है, सिर्फ किसानों को भ्रमित कर रही है। जब विभाग में स्टाफ ही नही है तो योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे होता होगा।
तिरंगा झंडा फहराने मे भी गोलमाल,100फिट ऊंचा झंडा फहराने मे नगर निगम ने खर्च दिए 12.60लाख रुपये

सिंगरौली:जिले में खनिज संपदा की बहुतायत होने से भ्रष्टाचार भी चरम पर हो रहा है सरकारी महकमा भ्रष्टाचार को रोकने में नहीं बल्कि भ्रष्टाचार करने में ही भलाई समझता है कुछ इसी तरह  भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ा नगर निगम द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर के बगल में बना जुड़वा तालाब में 100फिट ऊंचा तिरंगा झंडा फहराया गया है जिसको फहराने मे नगर निगम ने12.60लाख रुपए खर्च कर दिए। जबकि झंडे लगाने मे जिस खम्भे का उपयोग किया गया है उसका कुल वजन लगभग एक टन भी नहीं होगा।जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला प्रशासन, नगर प्रशासन के साथ साथ जनप्रतिनिधि कितने संवेदनशील हैं कि एक तिरंगे को भी बिना डकार लिए ही हजम कर गए और किसी ने इसकी वाजिब लागत को कम करने की जहमत नहीं उठाई,जबकि इसके उद्घाटन समारोह में सदर विधायक रामनिवास शाह,नगर निगम महापौर रानी अग्रवाल, नगर निगम अध्यक्ष देवेश पांडेय, नगर निगम आयुक्त सविता प्रधान सहित सत्ता पक्ष के पार्षद व विपक्ष के पार्षद मौजूद होकर समर्थन में तालियां बजाई व जमकर फोटोशूट करवाए।
<nis:link nis:type=tag nis:id=ntpc nis:value=NTPC nis:enabled=true nis:link/> ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने असिस्टेंट इंजीनियर और डिप्टी जनरल मैनेजर पदों पर भर्ती लिंक नीचे..

(NGEL Recruitment 2026) निकाली है। जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया 11 जुलाई से शुरू हो चुकी है। योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन आधिकारिक वेबसाइट https://careers.ngel.in/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इससे पहले पात्रता, चयन प्रक्रिया इत्यादि जानकारी होनी चाहिए। इसलिए फॉर्म भरने से पहले आधिकारिक अधिसूचना पढ़ने की सलाह दी जाती है।

https://careers.ngel.in/

रिक्त पदों की संख्या 114 है। असिस्टेंट मैनेजर के लिए 100 और डिप्टी जनरल मैनेजर के लिए 14 पद खाली हैं। वैकेंसी को अलग-अलग कैटेगरी में विभाजित किया गया है। जनरल के लिए 49, एससी के लिए 16, एसटी लिए 8, ओबीसी के लिए 30 और ईडब्ल्यूएस के लिए 11 पद खाली हैं। दोनों पदों के लिए योग्यता, और आयु सीमा अलग-अलग निर्धारित की गई है।

कौन कर सकता है आवेदन? 
अस्सिटेंट इंजीनियर पद के लिए उम्मीदवारों के पास इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल/इलेक्ट्रॉनिक्स/इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स/इंस्ट्रूमेंटेशन किसी भी एक विषय में फुल टाइम रेगुलर इंजीनियरिंग डिप्लोमा की योग्यता होनी चाहिए। अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष है। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में न्यूनतम 10 वर्ष का अनुभव होना भी जरूरी है। डिप्टी जनरल मैनेजर पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स/इलेक्ट्रॉनिक/ कंट्रोल एंड इंस्ट्रूमेंटेशन/ सिविल/ मैकेनिकल में फुल टाइम इंजीनियरिंग ग्रेजुएट की योग्यता 60% अंकों के साथ होनी चाहिए। संबंधित क्षेत्र में न्यूनतम 12 वर्ष का अनुभव होना जरूरी है। अधिकतम आयु सीमा 44 वर्ष है।

चयन प्रक्रिया और वेतन 
उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा, ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के आधार पर होगा। सबसे पहले आवेदन पत्र में दर्ज की गई जानकारी के आधार पर उम्मीदवारों को शॉर्ट लिस्ट किया जाएगा। इसके बाद लिखित परीक्षा आयोजित होगी। इसमें चयनित उम्मीदवारों को ग्रुप डिस्कशन या इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति होगी।

अस्सिटेंट इंजीनियर पद पर नियुक्ति के बाद उम्मीदवारों को 30,000 से लेकर 12,0000 रुपये तक वेतन मिलेगा। बेसिक पे 40,000 रुपये प्रतिमाह होगा। वहीं डिप्टी जनरल मैनेजर पद पर आवेदन करने की नियुक्ति के बाद पे स्केल 90,000 रुपये से लेकर 2,40,000 रुपये तक होगा। जिसमें इनिशियल पे 90,000 रुपये होगा।

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महान एनर्जन लिमिटेड (अडाणी)धरौली कोल माइन से बिछाई जाएगी रेललाइन, प्रभावित ग्रामीणों के आवेदनों की सुनवाई 22 जुलाई को

सिंगरौली: धिरौली कोल माइन (महान एनर्जेन लिमिटेड) की प्रस्तावित रेलवे लाइन से प्रभावित ग्राम धिरौली, भलयाटोला, खनुआखास एवं गजराबहरा के प्रभावित लोगों के आवेदनों की सुनवाई 22 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनवाई अपर कलेक्टर, जिला सिंगरौली की उपस्थिति में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) देवसर, तहसीलदार सरई तथा कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा की जाएगी।
प्रभावित ग्रामों के आम नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे अपनी समस्या अथवा आपत्तियों से संबंधित आवेदन लेकर 22 जुलाई 2026 बुधवार को प्रातः 11 बजे ग्राम भलयाटोला में आयोजित सुनवाई में उपस्थित होकर अपना आवेदन प्रस्तुत करें, ताकि उनके प्रकरणों पर नियमानुसार सुनवाई एवं आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
NCL मुआवजा दिलाने का झांसा, किसान से 12 हजार की साइबर ठगी
खुद को एनसीएल कर्मचारी बताकर ठग ने खाते में मुआवजा भेजने का दिया लालच, चितरंगी के किसान ने गंवाई रकम

सिंगरौली : जिले में साइबर ठग अब एनसीएल मुआवजे के नाम पर भी लोगों को निशाना बनाने लगे हैं। ताजा मामला चितरंगी तहसील के ग्राम नौगई प्रथम का है, जहां मुआवजे की आस लगाए बैठे एक किसान से खुद को एनसीएल कर्मचारी बताने वाले साइबर ठग ने 12 हजार की ऑनलाइन ठगी कर ली। पीड़ि़त ने मामले की शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 और गढ़वा  थाना में दर्ज कराई है।
 जानकारी के अनुसार  ग्राम नौगई प्रथम निवासी अंबिकेश सिंह चौहान की भूमि एनसीएल परियोजना से प्रभावित है और उन्हें मुआवजा मिलना है। इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर स्वयं को एनसीएल का कर्मचारी बताया। ठग ने कहा कि उनके नाम से 2 लाख 80 हजार का मुआवजा स्वीकृत है, लेकिन सेविंग अकाउंट होने के कारण राशि ट्रांसफर नहीं हो पा रही है। इसके बाद उसने खाते को सक्रिय कराने के नाम पर अलग-अलग प्रक्रिया बताकर किसान को अपने झांसे में ले लिया। इसी दौरान पीड़ि़त के मोबाइल पर  10 हजार और 25 हजार के असफल ट्रांजैक्शन के संदेश भी आए। ठग ने इन्हें तकनीकी प्रक्रिया बताकर भरोसा दिलाया और अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर राशि भेजने के लिए कहा। मुआवजा मिलने की उम्मीद में किसान ने बताए गए नंबरों पर कुल 12 हजार ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। राशि भेजने के कुछ समय बाद जब मुआवजा खाते में नहीं पहुंचा और फोन करने वाला व्यक्ति संपर्क से बाहर हो गया, तब किसान को साइबर ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और गढ़वा थाना पहुंचकर पूरे मामले की लिखित रिपोर्ट दी। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी सरकारी योजनाओं और मुआवजा प्रक्रियाओं का सहारा लेकर ग्रामीणों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मुआवजा, बैंक खाते या सरकारी भुगतान से जुड़े किसी भी फोन कॉल पर बिना आधिकारिक पुष्टि किए किसी भी खाते या मोबाइल नंबर पर पैसे ट्रांसफर न करें। अब पुलिस मामले की जांच में जुटी है और यह देखना होगा कि पीड़ित किसान की ठगी गई रकम वापस मिल पाती है या नहीं।
कठदहा पंचायत में ध्वस्त चेक डैम का जांच करने पहुंचे सीईओ
ग्राम पंचायत पर मनमानी पूर्ण तरीके से कार्य कराने का आरोप

सिंगरौली:जिले के जनपद पंचायत क्षेत्र देवसर के कठदहा ग्राम पंचायत में लाखों रूपये के लागत से बना चेक डैम पहली बारिश भी नही झेल पाया और चेक डैम बनने के करीब एक सप्ताह के अंदर ही ढह गया।  खबर प्रकाशन के बाद आज सहायक यंत्री व प्रभारी सीईओ ने स्थल का जांच किया, जहां माना कि चेक डैम किसी भी योग्य नही है। 
 दरअसल ग्राम पंचायत के कठदहा के अंधियरियाडाड़ के नाला पर हाल ही में ग्राम पंचायत के द्वारा लाखों रूपये के लागत से चेक डैम का निर्माण कार्य कराया गया था, किंतु ग्रामीणों का आरोप है कि गुणवत्ता विहीन चेक डैम पहली बारिश में ही ढह गया। 

 जनपद पंचायत के सहायक यंत्री एवं प्रभारी सीईओ सूरज मिश्रा ने उपयंत्री के साथ कार्यस्थल का निरीक्षण किया। सीईओ ने बताया कि चेक डैम का कोई भुगतान नही किया गया है और न ही आगे किया जाएगा। इसमें जो भी दोषी होगा, उसपर कार्रवाई होगी।
देश की राजधानी दिल्ली से बड़ी खबर

रोहिणी सेक्टर -16 में 5 मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरी।
कई लोगों के दबे होने की आशंका। आस पास अफरा तफरी का माहौल।
सिंगरौली नगर निगम की बड़ी पहल,9 जुलाई को गनियारी मुक्तिधाम में होगा वृहद वृक्षारोपण

सिंगरौली: नगर पालिक निगम सिंगरौली की आयुक्त श्रीमती सविता प्रधान  ने निगम कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान आगामी 9 जुलाई को गनियारी मुक्तिधाम में आयोजित होने वाले वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वृक्षारोपण स्थल पर गड्ढों की खुदाई, पौधों की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, ट्री-गार्ड, साफ-सफाई सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहे, बल्कि उनके संरक्षण, नियमित सिंचाई एवं देखभाल की प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि लगाए गए पौधे भविष्य में विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
आयुक्त श्रीमती प्रधान ने कहा कि नगर निगम को वृक्षारोपण के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे शत-प्रतिशत पूर्ण करना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा करें तथा लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, जिससे अभियान के स्थायी एवं सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि वृहद वृक्षारोपण अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इस हेतु जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, व्यापारी संगठनों, युवाओं एवं आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल होकर पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। आयुक्त ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और जनसहभागिता से ही हरित एवं स्वच्छ सिंगरौली का लक्ष्य साकार किया जा सकता है।बैठक में कार्यपालन यंत्री श्री संतोष पाण्डेय, सहायक यंत्री श्री प्रवीण गोस्वामी, श्री डी.के. सिंह, श्री दिनेश तिवारी सहित संबंधित उपयंत्री एवं नगर निगम के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
Department of Urban Development & Housing MP Collector Office Singrauli
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सिंगरौली:रामचरित मानस पाठ के संस्करण में एक नन्हे से बालक ने ढोलक के थाप से सबको किया अचंभित
सिंगरौली मे पावरग्रिड कंंपनी की लापरवाही से हुआ हादसा, एक व्यक्ति की मौके पर ही हुई मौत, परिजनों ने शव रखकर मुवावजे की मांग की जिस दौरान तहसीलदार ने आपा खो दिया और झल्लाते हुए नसीहत देते दिखाई दे रही हैं तहसीलदार प्रीति सिकरवार