देवास। आगामी उज्जैन महाकुंभ की तैयारियों के बीच शिप्रा नदी की स्वच्छता का मुद्दा फिर चर्चा में है। उज्जैन अखाड़ा परिषद के महंतों और साधु-संतों के प्रतिनिधिमंडल ने देवास पहुंचकर नागधमन नदी क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने नदी में मिल रहे औद्योगिक अपशिष्ट और गंदे पानी पर चिंता जताते हुए इसे शिप्रा की पवित्रता और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया।
संतों ने कहा कि नागधमन नदी के माध्यम से उद्योगों का प्रदूषित पानी और शहर का गंदा पानी शिप्रा में पहुंच रहा है, जिससे नदी का जल दूषित हो रहा है। महाकुंभ से पहले उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
गौरतलब है कि हेलो देवास लंबे समय से देवास और आसपास की नदियों में बढ़ते प्रदूषण का मुद्दा उठाता रहा है। नागधमन और शिप्रा नदी के प्रदूषित पानी, दुर्गंध और बदलते रंग को लेकर लगातार रिपोर्ट प्रकाशित की गईं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।
संतों ने कहा कि प्रदूषण का असर केवल नदी तक सीमित नहीं है, बल्कि जलीय जीवों, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। उनका आरोप है कि संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
उन्होंने बताया कि जल्द ही देवास कलेक्टर से मुलाकात कर नागधमन नदी में प्रदूषित पानी का प्रवाह रोकने, जिम्मेदार इकाइयों पर कार्रवाई करने और शिप्रा शुद्धिकरण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग की जाएगी।
महाकुंभ से पहले शिप्रा और नागधमन नदी का मुद्दा अब पर्यावरण, जनस्वास्थ्य, धार्मिक आस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा विषय बन गया है।
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