राष्ट्रपति के लाहौल दौरे के दौरान प्रस्तुत हुआ भुंतर के Proframes द्वारा तैयार विशेष हेरिटेज फ्रेम
बौद्ध कला, हिमाचली सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक पीतल शिल्प का अनूठा संगम
लाहौल
लाहौल प्रशासन द्वारा माननीय राष्ट्रपति के लाहौल दौरे के दौरान एक विशेष हेरिटेज फ्रेम प्रस्तुत किया गया, जिसे भुंतर, कुल्लू स्थित Proframes द्वारा विशेष रूप से डिजाइन एवं तैयार किया गया था।
यह विशेष फ्रेम बौद्ध कला, हिमाचली सांस्कृतिक परंपराओं और पारंपरिक शुभ प्रतीकों से प्रेरित होकर तैयार किया गया है। फ्रेम में गहरे मैरून और सुनहरे रंगों का संयोजन, बारीक अलंकरण, पुष्पीय आकृतियां तथा पारंपरिक शुभ प्रतीकों को शामिल किया गया है, जो इसे एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं कलात्मक पहचान प्रदान करते हैं।
विशेष रूप से डिजाइन की गई बौद्ध बॉर्डर
फ्रेम की प्रमुख विशेषताओं में इसकी बौद्ध कला से प्रेरित विशेष बॉर्डर है।
इस बॉर्डर को Proframes द्वारा इस विशेष परियोजना के लिए सावधानीपूर्वक डिजाइन और विकसित किया गया। बॉर्डर के पैटर्न, अनुपात, रंग संयोजन और सजावटी तत्वों को फ्रेम की समग्र संरचना के अनुरूप तैयार किया गया, ताकि बौद्ध कला की गरिमा और हिमाचली सांस्कृतिक सौंदर्य दोनों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जा सके।
बॉर्डर में शामिल पारंपरिक शुभ प्रतीकों और पुष्पीय अलंकरणों को फ्रेम की पूरी संरचना के साथ संतुलित किया गया है, जिससे यह एक सामान्य फ्रेम के बजाय एक विशेष रूप से तैयार हेरिटेज प्रस्तुति कृति का रूप लेता है।
हस्तनिर्मित पीतल की बुद्ध कलाकृति
फ्रेम के केंद्र में स्थापित हस्तनिर्मित पीतल की बुद्ध कलाकृति इस कृति का प्रमुख आकर्षण है।
इस विशेष पीतल कलाकृति को श्री रीत राम बाजौरा द्वारा तैयार किया गया। इसे Proframes के सहयोग और समन्वय से विशेष रूप से इस फ्रेम के लिए विकसित किया गया, जिसमें पारंपरिक पीतल शिल्प कौशल और Proframes की डिजाइन अवधारणा का संयोजन किया गया है।
इस परियोजना में श्री रीत राम बाजौरा की पारंपरिक पीतल शिल्प कला और Proframes की डिजाइन, फ्रेमिंग एवं प्रस्तुति की विशेषज्ञता को एक साथ लाया गया।
फ्रेम की संकल्पना, डिजाइन विकास, विशेष बौद्ध बॉर्डर का डिजाइन, फ्रेम निर्माण, कारीगरी का समन्वय और अंतिम फिनिशिंग Proframes के माध्यम से की गई।
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“यह हमारे लिए केवल एक फ्रेम नहीं, बल्कि हिमाचल की विरासत को प्रस्तुत करने का अवसर था”
Proframes के मालिक गितेश गुप्ता ने कहा:
“यह हमारे लिए केवल एक फ्रेम तैयार करने का प्रोजेक्ट नहीं था। हमारा उद्देश्य एक ऐसी कृति तैयार करना था जो हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान और बौद्ध कला की गरिमा को एक महत्वपूर्ण आधिकारिक अवसर के अनुरूप प्रस्तुत कर सके। इस फ्रेम की बौद्ध कला से प्रेरित बॉर्डर को विशेष रूप से डिजाइन किया गया, जबकि केंद्रीय पीतल की बुद्ध कलाकृति को श्री रीत राम बाजौरा जी ने Proframes के सहयोग से तैयार किया। भुंतर, कुल्लू में विकसित और तैयार इस कृति का ऐसे महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनना हमारे लिए बेहद गर्व की बात है।”
गितेश गुप्ता ने कहा कि Proframes का प्रयास है कि हिमाचल की पारंपरिक कला, स्थानीय कारीगरों के कौशल और आधुनिक डिजाइन को एक साथ लाकर ऐसी विशिष्ट कृतियां तैयार की जाएं, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
उन्होंने कहा:
“हमारा प्रयास है कि हिमाचल की कला और शिल्प केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रहें। स्थानीय कारीगरों के पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन और प्रीमियम प्रस्तुति के साथ जोड़कर हम ऐसी कृतियां तैयार करना चाहते हैं जो हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करें।”
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भुंतर से राष्ट्रीय मंच तक
यह परियोजना भुंतर, कुल्लू में विकसित स्थानीय रचनात्मक क्षमता और पारंपरिक शिल्प कौशल हैं
Kullu, Kullu | Oct 7, 2026