*आचार्य रामदयालजी महाराज की मंगलमय पधरावणी में उमड़ा श्रद्धा,आस्था एवं भक्ति का सैलाब*
*स्टेशन चौराहे पर सर्व समाज ने की महाआरती, शोभायात्रा का भीलवाड़ावासियों ने किया भव्य स्वागत*
*विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के शुभारंभ पर आचार्य रामदयालजी महाराज ने दिया सेवा एवं भक्ति का संदेश*
भीलवाड़ा :निलेश काठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ) 19 जुलाई। धर्मनगरी भीलवाड़ा की पावनधरा पर रविवार सुबह उस समय श्रद्धा, आस्था एवं भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा जब अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास करने के लिए पधारे। भीलवाड़ा में पांचवी बार चातुर्मास करने जा रहे पूज्य आचार्यश्री की चातुर्मासिक मंगलमय पधरावणी में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े ओर पधरावणी के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा में पूज्य स्वामी रामचरणजी महाराज एवं आचार्य रामदयालजी महाराज के जयकारे गूंजायमान होते रहे ओर भीलवाड़ावासी आचार्यश्री के स्वागत अभिनंदन के लिए आतुर दिखे। विश्व शांति कल्याण चातुर्मास समिति के तत्वावधान में हो रहे चातुर्मास की मंगलमय पधरावणी के अवसर पर आचार्यश्री की स्टेशन चौराहा पहुंचने पर भावपूर्ण अगवानी की गई एवं शंखनाद करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार से मंगलाचरण किया गया। सर्व समाज के श्रद्धालुओं द्वारा 108 थाली के साथ आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज की महाआरती की गई तो माहौल भक्ति व श्रद्धा के भावों से ओतप्रोत हो गया। इसके बाद विधिवत रूप से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। स्टेशन चौराहे से माणिक्यनगर स्थित रामद्वारा तक निकाली गई भव्य शोभायात्रा में सबसे आगे हाथी, घोड़े, उंट के साथ छत्र चंवर व शाही लवाजमा रहा। शोभायात्रा में बैण्ड पर राम भक्ति के भावों से परिपूर्ण मधुर स्वर लहरियां गूंज रही थी तो भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालु नाचते गाते जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। शोभायात्रा में एक वाहन पर स्वामी रामचरणजी महाराज की छवि प्रदर्शित की गई थी। पूज्य आचार्य श्री रामदयालजी महाराज जिस वाहन में विराजमान थे उसमें कई संत भी साथ में थे। जगह-जगह श्रद्धालु आचार्यश्री पर पुष्पवर्षा कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए आतुर दिखे। शोभायात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा 108 स्वागत द्वार बनाए गए थे। महाकाल आरती की प्रस्तुति देने वाला दल भी शोभायात्रा का विशेष आकर्षण रहा। जबलपुर से आए बैण्ड की प्रस्तुति भी आकर्षण का केन्द्र रही। शोभायात्रा में रामस्नेही नर्सिंग केन्द्र के प्रशिक्षणार्थी, वेद विद्यालय के छात्र भी शामिल थे ओर हाथों में प्रेरणा संदेश लिखी तख्तियां लेकर चल रहे थे। शोभायात्रा रेलवे स्टेशन रोड स्थित गजाधर मानसिंहका धर्मशाला से प्रारंभ होेकर सरकारी दरवाजा, गोल प्याउ, बालाजी मार्केट, सूचना केन्द्र चौराहा, गांधी बाजार, भीमगंज थाना चौराहा, माणिक्यनगर आदि मुख्य मार्गो से होते हुए रामद्वारा पहुंच सम्पन्न हुई। करीब तीन घंटे चली शोभायात्रा की विशालता एवं भव्यता का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि जब शोभायात्रा का अग्र छोर सूचना केन्द्र चौराहा पहुंचा तो अंतिम छोर स्टेशन चौराहे पर ही मौजूद था। शोभायात्रा सम्पन्न होने पर आचार्यश्री ने अभिजीत मुहूर्त में रामद्वारा धाम भीलवाड़ा में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश किया ओर मंगलाचरण के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म संदेश प्रदान किया। आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि स्वामी रामचरणजी महाराज की तपोभूमि भीलवाड़ा की धरती पर ये पांचवा चातुर्मास चार चातुर्मास की तपस्या का परिणाम है। चातुर्मास मर्यादा ओर भक्ति का काल होकर आत्म आनंद की अनुभूति करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि विश्व शांति कल्याण चातुर्मास दुनिया के लिए शांति एवं सद्भाव का संदेश लाएगा। स्वामी रामचरणजी महाराज के प्रताप से विश्व में जो अशांति चल रही है वह भी जल्द समाप्त हो जाएगी। पूरा विश्व भारत से शांति की आशा रखता है। हम कामना करेंगे कि भारत राष्ट्र आतंकवाद, भ्रष्टाचार एवं विकृतियों से मुक्त होकर भक्तियुक्त बनकर मानवता की रक्षा करे। जो व्यवहार हमे पसंद नहीं उसे दूसरों के साथ भी नहीं करना चाहिए। विकृति परिवार, समाज एवं राष्ट्र के लिए नुकसानदायक है ओर संस्कृति हमेशा लाभदायक होती है। उन्होंने बनेड़ा रामद्वारा की चर्चा करते हुए कहा कि जहां स्वामी रामचरणजी महाराज के कदम पड़े वह तीर्थभूमि हो जाती है। बनेड़ा रामद्धारा पुनः भव्यता को प्राप्त करे ओर तीर्थभूमि बने तो ये चातुर्मास सफल हो जाएगा। समारोह में संत चेतनरामजी उदयपुर, संत अनंतरामजी बड़ीसादड़ी, संत दिग्विजयरामजी चित्तौड़गढ़, संत भागीरथरामजी दादूपंथ, संत देवऋषि बर, संत मनोरथरामजी आलोट,संत रामनारायणजी देवास, बाल संत पुनीतरामजी, महन्त सागरदासजी हमीरगढ़, कबीरपंथी मायादेवी उज्जैन ने भी मंगलभाव व्यक्त किए।
रामस्नेही संप्रदाय के कार्यवाहक भंडारी संत श्री जगवल्लभ राम जी,बड़े साध नरपत राम जी उदयपुर,उनके शिष्य संत राम जी, रामस्नेही संप्रदाय के वरिष्ठ संत श्री गुरमुख राम जी,ताल के संत श्री हर्ष राम जी,रामस्नेही संप्रदाय के भेख भंडारी शंभू राम जी के शिष्य सेवा राम जी ,संत श्री रामसुमिरन जी देवास, संत श्री मुमुक्ष राम जी आमेट सहित साठ संतो ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई
स्वरूपा महिला मण्डल द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। स्वस्ति वाचन 11 विद्धानों ने किया। आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के प्रतीक चिन्ह का भी विमोचन किया। मंगलाचरण सम्पन्न होने पर चातुर्मास आयोजक अजमेरा,ईनाणी एवं गगरानी परिवार के सदस्यों ने आचार्यश्री की आरती की। शोभायात्रा एवं कार्यक्रम में सांसद दामोदर अग्रवाल, विधायक अशोक कोठारी, पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। मंगलाचरण कार्यक्रम का संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया। मंगलमय पधरावणी आयोजन में शामिल होने के लिए अहमदाबाद से श्याम ईनाणी, गिरिराज कोठारी सहित शाहपुरा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बनेड़ा, इन्दौर,केकड़ी, मालपुरा, कपासन, घोसुण्डा, जामनगर,बड़ौदा,सूरत
सहित गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र आदि स्थानों से रामस्नेही श्रद्धालु पहुंचे थे।
*भीलवाड़ा की धरा पर सनातन एवं जैन संस्कृति का संगम*
आचार्यश्री ने कहा कि भीलवाड़ा में हुआ स्वागत यहां के लोगों की आस्था एवं श्रद्धा के हस्ताक्षर है। पूरा भीलवाड़ा भक्तिमय दिख रहा है। उन्होंने भीलवाड़ा के शांतिभवन में जैन संतों के चातुर्मासिक मंगलप्रवेश की चर्चा करते हुए कहा कि यहां की पावन धरा पर आज विराट सनातन संस्कृति एवं अहिंसा परमोधर्म आधारित जैन संस्कृति का भी संगम हुआ है। भीलवाड़ा की धरती पर चातुर्मासकाल में संतों की बहार है ओर सभी को धर्म लाभ प्राप्त होने वाला है।
*शोभायात्रा मार्ग में सजाई सतरंगी रंगोली, ड्रोन से पुष्पवर्षा*
शोभायात्रा में विशेष आकर्षण रंगोली सजावट भी रही। शोभायात्रा में आगे चल रहे कलाकार मार्ग में हाथोहाथ सतरंगी रंगोली तैयार करते रहे जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र रही। रंगोली के माध्यम से स्वागत एवं अभिनंदन के संदेश दिए जाते रहे। शोभायात्रा में शामिल आचार्यश्री एवं श्रद्धालुओं पर ड्रोन से भी पुष्पवर्षा की गई। शोभायात्रा मार्ग में जगह-जगह शहरवासी भी आचार्यश्री ओर संतों पर पुष्पवर्षा करते रहे।
*स्वागत के लिए भीलवाड़ावासियों का हमेशा ऋणी रहूंगा*
आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज ने मंगलमय पधरावणी के अवसर पर हुए एतिहासिक भव्य स्वागत की चर्चा करते हुए कहा कि भीलवाड़ा आस्था, श्रद्धा ओर निष्ठावान भक्तों ओर ज्ञानियों की धरती है। यहां स्वागत में जो पलक पावड़े बिछाए गए उनके लिए हमेशा ऋणी रहूंगा। कभी भीलों का वाड़ा होने वाला भीलवाड़ा भक्तिवाड़ा बन जाएगा ये कौन जानता था। भीलवाड़ा धर्म भक्ति से लेकर उद्योग, मानव सेवा हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है।
*चातुर्मास आयोजक परिवारों की भक्ति भावना की सराहना*
आचार्य रामदयालजी महाराज ने चातुर्मास का लाभ ले रहे परिवारों की भक्ति भावना की सराहना करते हुए उनके प्रति मंगलभाव व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अशोकजी अजमेरा एवं परिवार, मुरलीजी ईनाणी एवं परिवार एवं शिवजी गगरानी एवं परिवार ने इस चातुर्मास का आयोजक बनकर भीलवाड़ावासियों को धर्म लाभ प्राप्त करने का सुअवसर दिया है। ये तीनों परिवार तीन माह के चातुर्मास के आधार स्तम्भ है।
*चातुर्मास में होंगे प्रभु भक्ति से ओतप्रोत विभिन्न आयोजन*
चातुर्मास में आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन सुबह 5 से 6 बजे तक रामधुनी के साथ सुबह 8 से 8.30 बजे तक वाणीजी का पाठ होगा। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक होंगे। सूर्यास्त के समय संध्या आरती होगी। गुरू पूर्णिमा महोत्सव 29 जुलाई को मनाया जाएगा। चातुर्मास में 13 से 20 सितम्बर तक पूज्य वाणीजी प्रवचन सुबह 8.30 से 11.30 बजे तक एवं भागवत ज्ञान महोत्सव दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक मनाया जाएगा। आचार्यश्री अवतरण महोत्सव पर आध्यात्मिक कार्यक्रम 25 सितम्बर रात 8 बजे होगा एवं आचार्यश्री अवतरण आनंदोत्सव 26 सितम्बर को सुबह 8.30 बजे से मनाया जाएगा। पंचमी गोटकाजी की शोभायात्रा 15 अक्टूबर को निकाली जाएगी एवं चातुर्मास सम्पन्न 22 अक्टूबर को होगा।
Bhilwara, Bhilwara | Jul 19, 2026