रुदौली कस्बे में मौलाना मुजाहिद उल इस्लाम नदवी ने बुधवार की दोपहर में रोज़े की असल अहमियत, समाजी जिम्मेदारियों और मौजूदा हालात पर खुलकर बात कही है । रोज़ा सिर्फ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि यह तक़वा हासिल करने, अपने किरदार को सुधारने और इंसानियत की खिदमत करने का महीना है, अगर हमारे अंदर बदलाव नहीं आया तो रमजान का मकसद अधूरा रह जाएगा।