देशी बीजों का विलुप्त होना बड़ा संकट, संरक्षण के लिए किसानों ने किया आह्वान
बांदा। देशी बीजों का लगातार विलुप्त होना किसानों, कृषि परंपराओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। गांवों में कभी आसानी से उपलब्ध रहने वाले पारंपरिक और देशी बीज अब धीरे-धीरे किसानों के खेतों और घरों से गायब होते जा रहे हैं। बांदा के प्रगतिशील एवं जैविक किसानों ने देशी बीजों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए किसान भाइयों से इन्हें बचाने और आपस में आदान-प्रदान करने की अपील की है।
किसानों का कहना है कि देशी बीज हमारी कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन बीजों को किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखते और अगली फसल के लिए इस्तेमाल करते आए हैं। लेकिन आधुनिक कृषि व्यवस्था में हाइब्रिड बीजों के बढ़ते चलन के कारण पारंपरिक देशी बीजों का इस्तेमाल लगातार कम हुआ है।
प्रगतिशील किसानों के मुताबिक, यदि देशी बीज एक बार पूरी तरह समाप्त हो गए तो उन्हें दोबारा उसी मूल स्वरूप में प्राप्त करना बेहद कठिन हो सकता है। इसलिए जिन किसानों के पास अभी भी पुराने और पारंपरिक देशी बीज सुरक्षित हैं, उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
किसानों ने कहा कि हाइब्रिड बीजों के कारण किसान हर सीजन में बाजार से नए बीज खरीदने के लिए अधिक निर्भर होते जा रहे हैं। इससे खेती की लागत बढ़ने और किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ने की चिंता भी जताई गई है। हालांकि किसानों ने यह भी माना कि हाइब्रिड बीजों के अपने कृषि उपयोग और फायदे हैं, लेकिन पारंपरिक देशी बीजों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
आपस में बीजों का करें आदान-प्रदान
बांदा के जैविक और प्रगतिशील किसानों ने किसान भाइयों से आह्वान किया कि जिनके पास देशी धान, गेहूं, दाल, तिलहन, सब्जियों या अन्य फसलों के पारंपरिक बीज उपलब्ध हैं, वे उन्हें सुरक्षित रखें और दूसरे किसानों के साथ उनका आदान-प्रदान करें।
किसानों का मानना है कि गांव स्तर पर देशी बीज बैंक तैयार किए जाएं तो पारंपरिक बीजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसानों की बाजार पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ स्थानीय कृषि ज्ञान और जैव विविधता को भी बचाया जा सकेगा।
आने वाली पीढ़ी के लिए बचाना होगा कृषि का यह खजाना
प्रगतिशील किसानों ने कहा कि देशी बीज केवल खेती की सामग्री नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही किसानों की परंपरा, अनुभव और कृषि ज्ञान की विरासत हैं। इन्हें बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने किसान भाइयों से संकल्प लेने की अपील की कि जिस किसान के पास देशी बीज हैं, वह उन्हें नष्ट होने से बचाएगा, सुरक्षित रखेगा और जरूरतमंद किसानों के साथ साझा करेगा।
किसानों का संदेश है कि आज यदि देशी बीजों को संरक्षित करने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को पारंपरिक कृषि विरासत से वंचित होना पड़ सकता है। इसलिए देशी बीज बचाना, जैव विविधता बचाना और किसान की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना—आज की बड़ी जरूरत है।
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Banda, Banda | Aug 8, 2026