"*विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस" के अवसर पर डॉ प्रमोद कुमार माननीय मंत्री खान एवं भूतत्व तथा कला संस्कृति विभाग, बिहार सरकार सह प्रभारी मंत्री कटिहार महोदय का उद्बोधन*
कटिहार,14 अगस्त 2026 शुक्रवार।
मंच पर उपस्थित तमाम प्रशासनिक अधिकारीगण, आदरणीय शिक्षक-शिक्षिकाएँ, प्रबुद्ध नागरिक एवं मेरे प्यारे सहपाठियों व साथियों—आप सभी को मेरा सादर प्रणाम!
आज 14 अगस्त का दिन है। कल हमारा पूरा देश स्वतंत्रता के जश्न में डूबने की तैयारी कर रहा है, चारों तरफ़ तिरंगे की फहराती शान है। लेकिन इस उल्लास के ठीक एक दिन पहले, आज की यह तारीख़ हमें इतिहास के उस सबसे काले, त्रासद और दर्दनाक पन्ने की याद दिलाती है, जिसकी टीस आज भी भारत माता के सीने में दबी हुई है।
आज का यह दिन हम ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मना रहे हैं।
वर्ष 2021 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 14 अगस्त को इस दिवस के रूप में समर्पित करने की ऐतिहासिक शुरुआत की थी।
इस दिन को स्मरण करने का उद्देश्य अतीत की कड़वाहट या नफ़रत की आग को हवा देना कतई नहीं है; बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य उस अमानवीय त्रासदी में काल-कवलित हुए लाखों निर्दोष लोगों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करना, उनके असीम त्याग को नमन करना और हमारी भावी पीढ़ियों को 'सामाजिक सौहार्द, शांति और राष्ट्रीय एकता' का अक्षुण्ण मूल्य समझाना है।
आदरणीय साथियों, ज़रा कल्पना कीजिए 1947 के उस त्रास्दी वाले दौर की...
एक तरफ जहाँ सदियों की गुलामी के बाद देश में आज़ादी का नया सूर्य उदित हो रहा था, वहीं दूसरी तरफ सदियों से एक ही आँगन में साथ पलते-बढ़ते भाई-बहन रातों-रात एक-दूसरे के लिए बेगाने और दुश्मन बना दिए गए।
यह मानव इतिहास का सबसे बड़ा और क्रूरतम विस्थापन था। 1.5 करोड़ से अधिक लोग पलक झपकते ही अपने ही घर से बेघर होकर शरणार्थी बन गए। नफ़रत और कट्टरता की उस आग में लाखों बेकसूर पुरुष, महिलाएँ और मासूम बच्चे होम हो गए। जो ज़मीन, जो घर, जो गलियाँ उनकी सदियों पुरानी पहचान थीं, उन्हें एक झटके में हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ना पड़ा।
पैदल चलते-बिलखते हुए काफ़िले, इंसानों से ठसाठस भरी ट्रेनें और उन ट्रेनों में बंद बेज़ुबान लाशें—यह सब उस क्रूर विभाजन की ऐसी गवाह हैं, जिन्हें सोचकर आज भी रूह कांप उठती है।
"जो घर कभी खिलखिलाती हँसी से गूँजते थे, वे रातों-रात वीरान हो गए,
नक़्शे पर खिंची एक बेदर्द रेखा से, लाखों परिवार तबाह और परेशान हो गए।"
लेकिन मेरे साथियों! यह दिन सिर्फ़ आँसुओं और दर्द की दास्तान नहीं है। यह दिन उन करोड़ों लोगों के अदम्य साहस, अपार धैर्य और पुनरुत्थान की गौरवगाथा भी है।
जिन्होंने अपनी आँखों के सामने सब कुछ लुटते देखा—घर, ज़मीन, जमा-पूंजी और अपने आत्मीय जन... वे शरणार्थी शिविरों में रहे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने 'शून्य' से अपनी ज़िंदगी की दोबारा नींव रखी। अपनी कड़ी मेहनत, पसीने और अटूट इच्छाशक्ति से न केवल अपने परिवारों को पुनर्गठित किया, बल्कि स्वतंत्र भारत के नव-निर्माण में अप्रतिम योगदान दिया। उनका यह जज़्बा हम सभी के लिए प्रेरणा का एक महान पुंज है।
मेरे युवा साथियों! इतिहास केवल गुज़रे हुए कल की डायरी नहीं होता; वह भविष्य का मार्गदर्शक होता है। विभाजन की यह विभीषिका आज हमें मुख्य रूप से तीन शाश्वत सीख देती है:
धर्म, जाति या भाषा के नाम पर बोया गया नफ़रत का बीज अंततः पूरे समाज और देश की जड़ों को खोखला कर देता है।
भारत की असली ताकत हमारी 'विविधता में एकता' है। हमें आपस में प्रेम, सहिष्णुता और अटूट विश्वास की डोर को कभी कमज़ोर नहीं पड़ने देना है।
हमें अपने राष्ट्र की शांति, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा हर कीमत पर करनी होगी।
आइए, आज के इस गंभीर अवसर पर हम उन सभी बेकसूर आत्माओं को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करें, जिनकी जीवन-लीला उस विभाजन की भयानक आग में समाप्त हो गई।
और साथ ही, आज हम सब मिलकर यह दृढ़ संकल्प लें कि हम अपने देश में कभी भी नफ़रत, कट्टरता और विभाजनकारी शक्तियों को सिर उठाने नहीं देंगे। हम एक ऐसे सशक्त, समृद्ध और समावेशी भारत का निर्माण करेंगे जहाँ शांति, बंधुत्व और सौहार्द की पताका हमेशा फहराती रहे।
"नफ़रत की दीवारों को ढाकर, प्रेम के दीप जलाएंगे,
इतिहास की भूलों से सीखकर, हम एक अखंड भारत बनाएंगे!"
जय हिंद! जय भारत!
आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद!
Art, Culture and Youth Department, Government of Bihar Information & Public Relations Department, Government of Bihar #kaihar
Katihar, Bihar | Aug 14, 2026