#कौन_था_दूधिया_एवं_डकैत_जगन?
भरतपुर। चंबल का खूंखार डकैत जगन गुर्जर अब इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है और उसका अंत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए कभी सिरदर्द बना 11 लाख रुपए का यह इनामी डकैत, अजमेर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर अपने ही साथी कैदी के हाथों मारा गया। बीहड़ के बीती सदियों के इतिहास में पुलिस की सैकड़ों गोलियों और मुठभेड़ों से बच निकलने वाले जगन गुर्जर का सफर जेल की चारदीवारी के भीतर एक मामूली तौलिए से गला घोंटे जाने पर खत्म हुआ। इस सनसनीखेज वारदात के बाद राजस्थान के जेल प्रशासन और उसकी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस कुख्यात अपराधी के जुर्म की दास्तान साल 1994 में धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र से शुरू हुई थी, जहां जगन का परिवार रहता था। उसके पिता शिवचरण स्थानीय मंदिर में पुजारी थे और जगन खुद एक साधारण युवक की तरह दूध बेचने का काम करता था। एक छोटे से विवाद में गांव के कुछ दबंगों द्वारा उसके पिता का सरेआम अपमान किए जाने और बाद में उसके जीजा की बेरहमी से हत्या कर दिए जाने की घटना ने जगन के भीतर प्रतिशोध की आग भड़का दी। कानून से भरोसा उठने के बाद उसने थर्टी-थ्री बोर की राइफल थाम ली और चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया। देखते ही देखते उसने अपना एक मजबूत गिरोह तैयार कर लिया और डांग के गांवों में उसका ऐसा खौफ कायम हुआ कि लोगों ने वहां अपनी बेटियों की शादियां तक करना बंद कर दिया था। साल 2001 में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसकी प्रेमिका के घायल होने और पकड़े जाने के बाद जगन ने पहली बार आत्मसमर्पण किया था, लेकिन जेल से बाहर आते ही वह फिर से अपराध की दलदल में उतर गया। उसके बाद तो धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और मुरैना जैसे जिलों में अपहरण, डकैती, फिरौती और हत्या के 100 से अधिक मामलों को अंजाम देकर उसने सनसनी फैला दी। जगन गुर्जर राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आया जब साल 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की खुली धमकी दे डाली थी। इस दुस्साहस के बाद राजस्थान सरकार ने उस पर 11 लाख रुपए का ऐतिहासिक इनाम घोषित कर दिया था, जिसके बाद वह चंबल का सबसे बड़ा और खूंखार चेहरा बन गया। इसके बाद राजनीतिक रसूख और पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच जगन गुर्जर के सरेंडर और दोबारा अपराध की दुनिया में लौटने का सिलसिला लगातार चलता रहा। साल 2009 में उसने तत्कालीन सांसद सचिन पायलट के सामने और फिर साल 2018 में धौलपुर में तत्कालीन भरतपुर आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने नाटकीय ढंग से हथियार डाले। हर बार जेल से छूटने के बाद वह नई वारदातों को अंजाम देता, जिसमें साल 2019 में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का शर्मनाक मामला भी शामिल था। आखिरी बार साल 2022 में बाड़ी क्षेत्र के तत्कालीन विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को जान से मारने की धमकी भरा वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ने उसे करौली के जंगलों से गिरफ्तार किया था और तब से उसे अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल के एकांत बैरक में रखा गया था। 29 जून 2026 को दोपहर के वक्त जेल के भीतर ही जगन गुर्जर के 32 साल के खौफनाक अध्याय का अंत हो गया। जेल प्रशासन के अनुसार, बैरक नंबर दो में बंद जगन गुर्जर और उसके साथी कैदी विष्णु निवासी अजान (भरतपुर) ने सुबह साथ में लूडो खेला था और अपनी सेल की सफाई भी की थी, लेकिन दोपहर करीब ग्यारह से तीन बजे के बीच जब बैरक बंद थी, तब दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यह विवाद इतना बढ़ा कि विष्णु ने गुस्से में आकर अपने तौलिए/गमछे से जगन का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बीहड़ की बंदूकों और दर्जनों पुलिस मुठभेड़ों से जिंदा बच निकलने वाला यह खूंखार डकैत आखिरकार जेल की कोठरी में एक मामूली कपड़े के फंदे का शिकार हो गया, जिसके बाद एफएसएल और पुलिस की टीमें जेल के भीतर मामले की गहन जांच में जुट गई हैं।