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#बिग_ब्रेकिंग_न्यूज.. भरतपुर। राजस्थान के अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की भरतपुर के कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने हत्या कर दी है। हार्डकोर बंदी विष्णु और जगन गुर्जर एक ही सेल में बंद थे। जानकारी के अनुसार, सोमवार दोपहर 11 से 3 बजे के बीच सेल बंद होने के समय ड्यूटी स्टाफ राउंड पर आया था। सेल खोली तो डकैत जगन गुर्जर की बॉडी पड़ी थी और उसका साथी अंदर था। एफएसएल टीम मौके पर पहुंची है। डकैत जगन गुर्जर करीब 27 साल पहले 1994 में अपराध की दुनिया में आया था। उसका ऐसा खौफ था कि डर से कई गांवों में शादियां तक होनी बंद हो गई थीं। पुलिस से बचने के लिए जगन ने धौलपुर के डांग क्षेत्र में अपना ठिकाना बनाया था। विस्तृत विवरण की प्रतिक्षा।

Bharatpur, Bharatpur | Jun 29, 2026

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#अब_हनुमान_ने_उठाए_सवाल?
भरतपुर। अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की उसकी साथी कैदी विष्णु जाट द्वारा गमछे से गला दबाकर हत्या कर देने के मामले को लेकर कांग्रेस के बाद अब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक एवं सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी सवाल खड़े किए है। हनुमान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, "अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद जगन गुर्जर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु हो जाना अत्यंत गंभीर घटना है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जगन की हत्या हुई है। जगन की हत्या की घटना राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल की सुरक्षा व्यवस्था एवं जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यह घटना प्रथम दृष्टया जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही की ओर संकेत करती है। साथ ही, इस पूरे मामले में किसी प्रकार की मिलीभगत या साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी परिस्थितियों में केवल विभागीय जांच से निष्पक्ष एवं पारदर्शी सत्य सामने आने की संभावना कम प्रतीत होती है। इसलिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल से अपील है कि इस मामले की जांच तत्काल प्रभाव से सीबीआई से करवाई जाए, ताकि घटना के पीछे की साजिश, जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका का पर्दाफाश हो सके। पिछले कुछ समय से राजस्थान की जेलों से मुख्यमंत्री को धमकियां दिए जाने, आम नागरिकों एवं व्यापारियों से रंगदारी और वसूली की धमकियां देने, नशे के कारोबार संचालित होने तथा संगठित अपराधों के संचालन जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि कई माफिया एवं हार्डकोर अपराधी जेलों के भीतर से भी अपना आपराधिक नेटवर्क संचालित करते हुए राजस्थान में समानांतर सरकार चला रहे है जो कानून-व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर चुनौती है।"

#अब_हनुमान_ने_उठाए_सवाल? भरतपुर। अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की उसकी साथी कैदी विष्णु जाट द्वारा गमछे से गला दबाकर हत्या कर देने के मामले को लेकर कांग्रेस के बाद अब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक एवं सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी सवाल खड़े किए है। हनुमान ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, "अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद जगन गुर्जर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु हो जाना अत्यंत गंभीर घटना है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जगन की हत्या हुई है। जगन की हत्या की घटना राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल की सुरक्षा व्यवस्था एवं जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यह घटना प्रथम दृष्टया जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही की ओर संकेत करती है। साथ ही, इस पूरे मामले में किसी प्रकार की मिलीभगत या साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसी परिस्थितियों में केवल विभागीय जांच से निष्पक्ष एवं पारदर्शी सत्य सामने आने की संभावना कम प्रतीत होती है। इसलिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल से अपील है कि इस मामले की जांच तत्काल प्रभाव से सीबीआई से करवाई जाए, ताकि घटना के पीछे की साजिश, जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका का पर्दाफाश हो सके। पिछले कुछ समय से राजस्थान की जेलों से मुख्यमंत्री को धमकियां दिए जाने, आम नागरिकों एवं व्यापारियों से रंगदारी और वसूली की धमकियां देने, नशे के कारोबार संचालित होने तथा संगठित अपराधों के संचालन जैसी घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि कई माफिया एवं हार्डकोर अपराधी जेलों के भीतर से भी अपना आपराधिक नेटवर्क संचालित करते हुए राजस्थान में समानांतर सरकार चला रहे है जो कानून-व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर चुनौती है।"

Bharatpur, Bharatpur | Jun 30, 2026

#कुख्यात_जगन_के_साथ_क्या_हुआ_था?
भरतपुर। प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था सोमवार को उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब जेल के अंदर बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की उसी की सेल में गला घोंटकर ह*त्या कर दी गई। मर्डर उसी सेल में बंद कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु जाट निवासी अजान, भरतपुर ने किया है। प्रारंभिक पूछताछ में विष्णु ने बताया है कि- "जगन गुर्जर मेरी बहन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। इसलिए मैंने उसे मारने का प्लान कर लिया था। मुझे सिर्फ सही मौके का इंतजार था। शक न हो, इसलिए मैं जगन के साथ सामान्य व्यवहार करता रहा।" मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल के वार्ड नंबर-2 के ब्लॉक नंबर-4 की सेल नंबर-5 में डकैत जगन गुर्जर और विष्णु एक साथ बंद थे। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे जब रोजाना की तरह सेल खोली गई तो ब्लॉक के अन्य बंदी बाहर निकलने लगे। इसी दौरान विष्णु भी मुस्कुराते हुए सेल से बाहर निकला, जबकि जगन अपनी जगह लेटा था। शुरुआत में किसी को शक नहीं हुआ। कुछ बंदियों ने आवाज लगाई, "जग्गू दादा... आज अभी तक उठे नहीं, बाहर क्यों नहीं आए?" लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तभी विष्णु ने जोर से कहा- "कोई पास मत जाना... मैंने इसे मार दिया है।" उसकी बात सुनते ही जेल में अफरा-तफरी मच गई। बंदियों ने तुरंत जेल स्टाफ को सूचना दी। कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो जगन गुर्जर बेसुध पड़ा मिला। सीनियर अधिकारियों और डॉक्टरों को बुलाया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने जगन को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुबह करीब 11 बजे दोनों बंदियों ने साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर अपनी सेल की सफाई की। विष्णु पानी लेकर आया तो जगन झाडू लगाता रहा, फिर जगन पानी लाया और विष्णु ने सफाई की। दोनों के बीच किसी तरह के विवाद के कोई संकेत नहीं मिले। इसके बाद पैर की तकलीफ के चलते जगन गुर्जर इंजेक्शन लगवाने गया। कुछ देर बाद लौटकर आया तो दोनों ने सेल के अंदर बैठकर लूडो खेलना शुरू कर दिया। आसपास मौजूद किसी भी व्यक्ति को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में जगन की हत्या हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लूडो खेलते समय विष्णु ने कहा- मुझे दवा लेनी है। वह जगन के पीछे टंगी थैली के पास गया। इसी दौरान उसने वहां रखा तौलिया उठाया और पीछे से अचानक जगन का गला कस दिया। जब तक जगन संभल पाता, उसकी सांसें थम चुकी थीं। हत्या के बाद विष्णु ने वारदात में इस्तेमाल किया गया तौलिया ऊपर चल रहे पंखे पर फेंक दिया और शव से कुछ दूरी पर जाकर आराम से लेट गया। दोपहर 3 बजे सेल खुलने तक किसी को हत्या की भनक तक नहीं लगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विष्णु ने प्रारंभिक पूछताछ में अधिकारियों से कहा- जगन गुर्जर लगातार मेरा मजाक उड़ाता था। वह कहता था कि "तू क्या डॉन बनेगा, डकैत का नाम हमने कमाया है, तेरे से कुछ नहीं होगा।" इसके साथ ही जगन मेरी बहन को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। इन बातों से मैं लंबे समय से आहत था और मन ही मन जगन को मारने का फैसला कर लिया था। मुझे सिर्फ सही मौके का इंतजार था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जगन गुर्जर का सगा भाई पप्पू गुर्जर भी इसी हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है। वह वार्ड नंबर-2 के ब्लॉक नंबर-1 की सेल नंबर-6 में रखा गया था। घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर उसका वार्ड और ब्लॉक बदल दिया गया। दोनों भाइयों को कभी-कभार ही मिलने दिया जाता था, क्योंकि कई बार उनके बीच भी विवाद हो जाता था। जानकारी के अनुसार, अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर चार वार्ड में कुल 24 सेल हैं। प्रत्येक सेल में अधिकतम तीन बंदियों को रखा जाता है। वर्तमान में यहां करीब 92 गैंगस्टर और कुख्यात अपराधी बंद है। वार्ड नंबर-2 के इसी ब्लॉक में जघीना हत्याकांड के कई आरोपी भी बंद बताए जा रहे हैं।

#कुख्यात_जगन_के_साथ_क्या_हुआ_था? भरतपुर। प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था सोमवार को उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब जेल के अंदर बंद कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की उसी की सेल में गला घोंटकर ह*त्या कर दी गई। मर्डर उसी सेल में बंद कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु जाट निवासी अजान, भरतपुर ने किया है। प्रारंभिक पूछताछ में विष्णु ने बताया है कि- "जगन गुर्जर मेरी बहन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। इसलिए मैंने उसे मारने का प्लान कर लिया था। मुझे सिर्फ सही मौके का इंतजार था। शक न हो, इसलिए मैं जगन के साथ सामान्य व्यवहार करता रहा।" मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल के वार्ड नंबर-2 के ब्लॉक नंबर-4 की सेल नंबर-5 में डकैत जगन गुर्जर और विष्णु एक साथ बंद थे। सोमवार दोपहर करीब 3 बजे जब रोजाना की तरह सेल खोली गई तो ब्लॉक के अन्य बंदी बाहर निकलने लगे। इसी दौरान विष्णु भी मुस्कुराते हुए सेल से बाहर निकला, जबकि जगन अपनी जगह लेटा था। शुरुआत में किसी को शक नहीं हुआ। कुछ बंदियों ने आवाज लगाई, "जग्गू दादा... आज अभी तक उठे नहीं, बाहर क्यों नहीं आए?" लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तभी विष्णु ने जोर से कहा- "कोई पास मत जाना... मैंने इसे मार दिया है।" उसकी बात सुनते ही जेल में अफरा-तफरी मच गई। बंदियों ने तुरंत जेल स्टाफ को सूचना दी। कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो जगन गुर्जर बेसुध पड़ा मिला। सीनियर अधिकारियों और डॉक्टरों को बुलाया गया। जांच के बाद डॉक्टर ने जगन को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुबह करीब 11 बजे दोनों बंदियों ने साथ बैठकर खाना खाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर अपनी सेल की सफाई की। विष्णु पानी लेकर आया तो जगन झाडू लगाता रहा, फिर जगन पानी लाया और विष्णु ने सफाई की। दोनों के बीच किसी तरह के विवाद के कोई संकेत नहीं मिले। इसके बाद पैर की तकलीफ के चलते जगन गुर्जर इंजेक्शन लगवाने गया। कुछ देर बाद लौटकर आया तो दोनों ने सेल के अंदर बैठकर लूडो खेलना शुरू कर दिया। आसपास मौजूद किसी भी व्यक्ति को यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में जगन की हत्या हो जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लूडो खेलते समय विष्णु ने कहा- मुझे दवा लेनी है। वह जगन के पीछे टंगी थैली के पास गया। इसी दौरान उसने वहां रखा तौलिया उठाया और पीछे से अचानक जगन का गला कस दिया। जब तक जगन संभल पाता, उसकी सांसें थम चुकी थीं। हत्या के बाद विष्णु ने वारदात में इस्तेमाल किया गया तौलिया ऊपर चल रहे पंखे पर फेंक दिया और शव से कुछ दूरी पर जाकर आराम से लेट गया। दोपहर 3 बजे सेल खुलने तक किसी को हत्या की भनक तक नहीं लगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विष्णु ने प्रारंभिक पूछताछ में अधिकारियों से कहा- जगन गुर्जर लगातार मेरा मजाक उड़ाता था। वह कहता था कि "तू क्या डॉन बनेगा, डकैत का नाम हमने कमाया है, तेरे से कुछ नहीं होगा।" इसके साथ ही जगन मेरी बहन को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। इन बातों से मैं लंबे समय से आहत था और मन ही मन जगन को मारने का फैसला कर लिया था। मुझे सिर्फ सही मौके का इंतजार था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जगन गुर्जर का सगा भाई पप्पू गुर्जर भी इसी हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है। वह वार्ड नंबर-2 के ब्लॉक नंबर-1 की सेल नंबर-6 में रखा गया था। घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर उसका वार्ड और ब्लॉक बदल दिया गया। दोनों भाइयों को कभी-कभार ही मिलने दिया जाता था, क्योंकि कई बार उनके बीच भी विवाद हो जाता था। जानकारी के अनुसार, अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर चार वार्ड में कुल 24 सेल हैं। प्रत्येक सेल में अधिकतम तीन बंदियों को रखा जाता है। वर्तमान में यहां करीब 92 गैंगस्टर और कुख्यात अपराधी बंद है। वार्ड नंबर-2 के इसी ब्लॉक में जघीना हत्याकांड के कई आरोपी भी बंद बताए जा रहे हैं।

Bharatpur, Bharatpur | Jun 30, 2026

#प्रतिशोध_की_आग_ने_डकैत_बना_दिया..
भरतपुर। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए कभी सिरदर्द बना 11 लाख रुपए का इनामी डकैत, अजमेर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर अपने ही साथी कैदी के हाथों मारा गया। बीहड़ के बीती सदियों के इतिहास में पुलिस की सैकड़ों गोलियों और मुठभेड़ों से बच निकलने वाले जगन गुर्जर का सफर जेल की चारदीवारी के भीतर एक मामूली तौलिए से गला घोंटे जाने पर खत्म हुआ। एक साधारण युवक की तरह दूध बेचने वाले जगन ने प्रतिशोध की आग में जुर्म का रास्ता अपनाया था। एक छोटे से विवाद में गांव के कुछ दबंगों द्वारा उसके पिता का सरेआम अपमान किए जाने और बाद में उसके जीजा की बेरहमी से हत्या कर दिए जाने की घटना ने जगन के भीतर प्रतिशोध की आग भड़का दी। कानून से भरोसा उठने के बाद उसने थर्टी-थ्री बोर की राइफल थाम ली और चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया। देखते ही देखते उसने अपना एक मजबूत गिरोह तैयार कर लिया और डांग के गांवों में उसका ऐसा खौफ कायम हो गया। 1994 से शुरू हुआ जगन के अपराध का अध्याय 32 साल बाद आज 29 जून को जेल में समाप्त हो गया है।

#प्रतिशोध_की_आग_ने_डकैत_बना_दिया.. भरतपुर। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए कभी सिरदर्द बना 11 लाख रुपए का इनामी डकैत, अजमेर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर अपने ही साथी कैदी के हाथों मारा गया। बीहड़ के बीती सदियों के इतिहास में पुलिस की सैकड़ों गोलियों और मुठभेड़ों से बच निकलने वाले जगन गुर्जर का सफर जेल की चारदीवारी के भीतर एक मामूली तौलिए से गला घोंटे जाने पर खत्म हुआ। एक साधारण युवक की तरह दूध बेचने वाले जगन ने प्रतिशोध की आग में जुर्म का रास्ता अपनाया था। एक छोटे से विवाद में गांव के कुछ दबंगों द्वारा उसके पिता का सरेआम अपमान किए जाने और बाद में उसके जीजा की बेरहमी से हत्या कर दिए जाने की घटना ने जगन के भीतर प्रतिशोध की आग भड़का दी। कानून से भरोसा उठने के बाद उसने थर्टी-थ्री बोर की राइफल थाम ली और चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया। देखते ही देखते उसने अपना एक मजबूत गिरोह तैयार कर लिया और डांग के गांवों में उसका ऐसा खौफ कायम हो गया। 1994 से शुरू हुआ जगन के अपराध का अध्याय 32 साल बाद आज 29 जून को जेल में समाप्त हो गया है।

Bharatpur, Bharatpur | Jun 29, 2026

#कौन_था_दूधिया_एवं_डकैत_जगन?
भरतपुर। चंबल का खूंखार डकैत जगन गुर्जर अब इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है और उसका अंत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए कभी सिरदर्द बना 11 लाख रुपए का यह इनामी डकैत, अजमेर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर अपने ही साथी कैदी के हाथों मारा गया। बीहड़ के बीती सदियों के इतिहास में पुलिस की सैकड़ों गोलियों और मुठभेड़ों से बच निकलने वाले जगन गुर्जर का सफर जेल की चारदीवारी के भीतर एक मामूली तौलिए से गला घोंटे जाने पर खत्म हुआ। इस सनसनीखेज वारदात के बाद राजस्थान के जेल प्रशासन और उसकी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस कुख्यात अपराधी के जुर्म की दास्तान साल 1994 में धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र से शुरू हुई थी, जहां जगन का परिवार रहता था। उसके पिता शिवचरण स्थानीय मंदिर में पुजारी थे और जगन खुद एक साधारण युवक की तरह दूध बेचने का काम करता था। एक छोटे से विवाद में गांव के कुछ दबंगों द्वारा उसके पिता का सरेआम अपमान किए जाने और बाद में उसके जीजा की बेरहमी से हत्या कर दिए जाने की घटना ने जगन के भीतर प्रतिशोध की आग भड़का दी। कानून से भरोसा उठने के बाद उसने थर्टी-थ्री बोर की राइफल थाम ली और चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया। देखते ही देखते उसने अपना एक मजबूत गिरोह तैयार कर लिया और डांग के गांवों में उसका ऐसा खौफ कायम हुआ कि लोगों ने वहां अपनी बेटियों की शादियां तक करना बंद कर दिया था। साल 2001 में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसकी प्रेमिका के घायल होने और पकड़े जाने के बाद जगन ने पहली बार आत्मसमर्पण किया था, लेकिन जेल से बाहर आते ही वह फिर से अपराध की दलदल में उतर गया। उसके बाद तो धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और मुरैना जैसे जिलों में अपहरण, डकैती, फिरौती और हत्या के 100 से अधिक मामलों को अंजाम देकर उसने सनसनी फैला दी। जगन गुर्जर राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आया जब साल 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की खुली धमकी दे डाली थी। इस दुस्साहस के बाद राजस्थान सरकार ने उस पर 11 लाख रुपए का ऐतिहासिक इनाम घोषित कर दिया था, जिसके बाद वह चंबल का सबसे बड़ा और खूंखार चेहरा बन गया। इसके बाद राजनीतिक रसूख और पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच जगन गुर्जर के सरेंडर और दोबारा अपराध की दुनिया में लौटने का सिलसिला लगातार चलता रहा। साल 2009 में उसने तत्कालीन सांसद सचिन पायलट के सामने और फिर साल 2018 में धौलपुर में तत्कालीन भरतपुर आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने नाटकीय ढंग से हथियार डाले। हर बार जेल से छूटने के बाद वह नई वारदातों को अंजाम देता, जिसमें साल 2019 में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का शर्मनाक मामला भी शामिल था। आखिरी बार साल 2022 में बाड़ी क्षेत्र के तत्कालीन विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को जान से मारने की धमकी भरा वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ने उसे करौली के जंगलों से गिरफ्तार किया था और तब से उसे अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल के एकांत बैरक में रखा गया था। 29 जून 2026 को दोपहर के वक्त जेल के भीतर ही जगन गुर्जर के 32 साल के खौफनाक अध्याय का अंत हो गया। जेल प्रशासन के अनुसार, बैरक नंबर दो में बंद जगन गुर्जर और उसके साथी कैदी विष्णु निवासी अजान (भरतपुर) ने सुबह साथ में लूडो खेला था और अपनी सेल की सफाई भी की थी, लेकिन दोपहर करीब ग्यारह से तीन बजे के बीच जब बैरक बंद थी, तब दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यह विवाद इतना बढ़ा कि विष्णु ने गुस्से में आकर अपने तौलिए/गमछे से जगन का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बीहड़ की बंदूकों और दर्जनों पुलिस मुठभेड़ों से जिंदा बच निकलने वाला यह खूंखार डकैत आखिरकार जेल की कोठरी में एक मामूली कपड़े के फंदे का शिकार हो गया, जिसके बाद एफएसएल और पुलिस की टीमें जेल के भीतर मामले की गहन जांच में जुट गई हैं।

#कौन_था_दूधिया_एवं_डकैत_जगन? भरतपुर। चंबल का खूंखार डकैत जगन गुर्जर अब इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है और उसका अंत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पुलिस के लिए कभी सिरदर्द बना 11 लाख रुपए का यह इनामी डकैत, अजमेर की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल के भीतर अपने ही साथी कैदी के हाथों मारा गया। बीहड़ के बीती सदियों के इतिहास में पुलिस की सैकड़ों गोलियों और मुठभेड़ों से बच निकलने वाले जगन गुर्जर का सफर जेल की चारदीवारी के भीतर एक मामूली तौलिए से गला घोंटे जाने पर खत्म हुआ। इस सनसनीखेज वारदात के बाद राजस्थान के जेल प्रशासन और उसकी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस कुख्यात अपराधी के जुर्म की दास्तान साल 1994 में धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र से शुरू हुई थी, जहां जगन का परिवार रहता था। उसके पिता शिवचरण स्थानीय मंदिर में पुजारी थे और जगन खुद एक साधारण युवक की तरह दूध बेचने का काम करता था। एक छोटे से विवाद में गांव के कुछ दबंगों द्वारा उसके पिता का सरेआम अपमान किए जाने और बाद में उसके जीजा की बेरहमी से हत्या कर दिए जाने की घटना ने जगन के भीतर प्रतिशोध की आग भड़का दी। कानून से भरोसा उठने के बाद उसने थर्टी-थ्री बोर की राइफल थाम ली और चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया। देखते ही देखते उसने अपना एक मजबूत गिरोह तैयार कर लिया और डांग के गांवों में उसका ऐसा खौफ कायम हुआ कि लोगों ने वहां अपनी बेटियों की शादियां तक करना बंद कर दिया था। साल 2001 में पुलिस मुठभेड़ के दौरान उसकी प्रेमिका के घायल होने और पकड़े जाने के बाद जगन ने पहली बार आत्मसमर्पण किया था, लेकिन जेल से बाहर आते ही वह फिर से अपराध की दलदल में उतर गया। उसके बाद तो धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और मुरैना जैसे जिलों में अपहरण, डकैती, फिरौती और हत्या के 100 से अधिक मामलों को अंजाम देकर उसने सनसनी फैला दी। जगन गुर्जर राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आया जब साल 2008 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की खुली धमकी दे डाली थी। इस दुस्साहस के बाद राजस्थान सरकार ने उस पर 11 लाख रुपए का ऐतिहासिक इनाम घोषित कर दिया था, जिसके बाद वह चंबल का सबसे बड़ा और खूंखार चेहरा बन गया। इसके बाद राजनीतिक रसूख और पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच जगन गुर्जर के सरेंडर और दोबारा अपराध की दुनिया में लौटने का सिलसिला लगातार चलता रहा। साल 2009 में उसने तत्कालीन सांसद सचिन पायलट के सामने और फिर साल 2018 में धौलपुर में तत्कालीन भरतपुर आईजी मालिनी अग्रवाल के सामने नाटकीय ढंग से हथियार डाले। हर बार जेल से छूटने के बाद वह नई वारदातों को अंजाम देता, जिसमें साल 2019 में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने का शर्मनाक मामला भी शामिल था। आखिरी बार साल 2022 में बाड़ी क्षेत्र के तत्कालीन विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को जान से मारने की धमकी भरा वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ने उसे करौली के जंगलों से गिरफ्तार किया था और तब से उसे अजमेर की हाई-सिक्योरिटी जेल के एकांत बैरक में रखा गया था। 29 जून 2026 को दोपहर के वक्त जेल के भीतर ही जगन गुर्जर के 32 साल के खौफनाक अध्याय का अंत हो गया। जेल प्रशासन के अनुसार, बैरक नंबर दो में बंद जगन गुर्जर और उसके साथी कैदी विष्णु निवासी अजान (भरतपुर) ने सुबह साथ में लूडो खेला था और अपनी सेल की सफाई भी की थी, लेकिन दोपहर करीब ग्यारह से तीन बजे के बीच जब बैरक बंद थी, तब दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यह विवाद इतना बढ़ा कि विष्णु ने गुस्से में आकर अपने तौलिए/गमछे से जगन का गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बीहड़ की बंदूकों और दर्जनों पुलिस मुठभेड़ों से जिंदा बच निकलने वाला यह खूंखार डकैत आखिरकार जेल की कोठरी में एक मामूली कपड़े के फंदे का शिकार हो गया, जिसके बाद एफएसएल और पुलिस की टीमें जेल के भीतर मामले की गहन जांच में जुट गई हैं।

Bharatpur, Bharatpur | Jun 29, 2026