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मऊगंज में 'स्वच्छ भारत मिशन' तार-तार! करोड़ों का बजट ठिकाने लगा रहा जनपद का भ्रष्ट सिंडिकेट! कागजों पर 'स्वच्छ भारत' का ढिंढोरा पीटने वाले मऊगंज जनपद के अधिकारी धरातल पर महा-घोटाला कर रहे हैं। मेरी इस ग्राउंड रिपोर्ट में देखिए कैसे शौचालयों और स्वच्छता फंड की राशि का सरेआम बंदरबांट किया गया है। CEO मऊगंज और जिम्मेदार अधिकारी इस महा-लूट पर मौन क्यों हैं? संवेदनशील कलेक्टर श्री संजय कुमार जैन जी और मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि इस #SwachhBharatScam की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों को तत्काल जेल भेजा जाए! 🛑 👇 #IndiaHeadline24 #MauganjNews #SwachhBharatMission #JanpadMauganj #CEOMauganj #GroundReport #DeepakGuptaReporter #MadhyaPradeshNews #CleanIndiaReality #ViralPost @CMMadhyaPradesh @ChouhanShivraj @DGMauganj @RewaCollector @DGP_MP @PMOIndia @RahulGandhi @JituPatwari @manjultripathi_ @AajTak @ndtv @ZeeMPCG @News18MP @abpnews @News24

Mauganj, Rewa | Jun 29, 2026

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घर में मिला पापाजी द्वारा संभालकर रखे हुए २ आना और क्वार्टर आना के सिक्के।

घर में मिला पापाजी द्वारा संभालकर रखे हुए २ आना और क्वार्टर आना के सिक्के।

Mauganj, Rewa | Jun 30, 2026

**कड़कड़ाती धूप में लोहे की तरह तपकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ८०% दिव्यांग पत्रकार को मऊगंज एसडीएम ने दी अनशन की खुली चुनौती; भारतीय संविधान के अनुच्छेद २१ और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम २०१६ को ठेंगे पर रख रहा प्रशासनिक अमला, मंगलवार से शुरू होने जा रहे अनशन को मिला जनता का भारी समर्थन**

**मऊगंज:** जब व्यवस्था अंधी और बहरी हो जाए तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को खुद कड़कड़ाती धूप में लोहे की तरह तपकर सड़कों पर उतरना पड़ता है, और मऊगंज में इसकी जीती-जागती तस्वीर तब देखने को मिली जब ८० प्रतिशत दिव्यांग पत्रकार दीपक कुमार गुप्ता अपनी व्हीलचेयर पर हाथों में आवेदन पत्र थामे मऊगंज अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय के सामने पहुंचे. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर वीडियो जारी करते हुए उन्होंने प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर किया, जहाँ शनिवार की छुट्टी होने के कारण कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या बाबू उनकी सुध लेने के लिए मौजूद नहीं था. इससे भी अधिक शर्मनाक पहलू यह है कि जब पूर्व में इस दिव्यांग पत्रकार ने दूरभाष के माध्यम से एसडीएम महोदय को अपनी पीड़ा से अवगत कराना चाहा, तो अधिकारी ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुनने के बजाय बेहद तल्ख और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए दोटूक शब्दों में कहा कि 'आपका आवेदन स्वीकार नहीं होगा, जहां मर्जी हो बैठो अनशन पर, शासन से पैसा आएगा तभी मिलेगा'. एक जिम्मेदार लोक सेवक द्वारा एक दिव्यांग नागरिक को इस तरह से दुत्कारना न केवल मर्यादा के खिलाफ है बल्कि देश के सर्वोच्च कानून यानी 'भारतीय संविधान' का खुला उल्लंघन भी है. हमारे संविधान का अनुच्छेद २१ हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है, और इसी के तहत 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम २०१६' (RPWD Act 2016) अस्तित्व में आया, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि दिव्यांग व्यक्तियों को समाज में बराबरी, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के मिलना चाहिए; इस अधिनियम की धारा ३ के तहत सरकार और प्रशासन का यह वैधानिक दायित्व है कि वे दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा करें और उन्हें हर प्रकार के शोषण व मानसिक प्रताड़ना से बचाएं, लेकिन मऊगंज का प्रशासनिक अमला शायद इस कानून से पूरी तरह अनभिज्ञ है.
मध्य प्रदेश सरकार जहाँ लाड़ली बहनों को हर महीने एक निश्चित तिथि पर ₹१५०० की राशि प्रदान कर रही है, वहीं समाज के सबसे लाचार वर्ग यानी दिव्यांगों और विधवाओं को मिलने वाली ₹६०० की मामूली मासिक पेंशन की कोई तारीख तय नहीं है; कभी २३, कभी २६ तो कभी महीनों की देरी के बाद मिलने वाली यह पेंशन पूरी तरह से अधिकारियों की मनमर्जी और दिव्यांगों के अपमान का जरिया बन चुकी है. इसी तानाशाही और आर्थिक कंगाली के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए दिव्यांग पत्रकार दीपक कुमार गुप्ता ने संकल्प लिया है कि चाहे जिला प्रशासन उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दे या उन्हें जेल भेज दे, यहाँ तक कि इस संघर्ष में यदि उन्हें मृत्यु भी प्राप्त हो जाए, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि बिना आत्मसम्मान के ऐसी सुविधाओं के अभाव में जीने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने आगामी मंगलवार से मऊगंज कलेक्ट्रेट के सामने शुरू होने वाले अपने 'शांतिपूर्ण क्रमिक अनशन' के लिए क्षेत्र के तमाम समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस न्याय की लड़ाई में उनका साथ दें और धरना स्थल पर एक पंडाल (टेंट) की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं. मऊगंज की आम जनता अब इस बहादुर पत्रकार के समर्थन में लामबंद हो रही है और मांग कर रही है कि सरकार और मऊगंज कलेक्टर इस प्रशासनिक उदासीनता पर तत्काल संज्ञान लें और दिव्यांगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को कानून का पाठ पढ़ाएं.

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**कड़कड़ाती धूप में लोहे की तरह तपकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ८०% दिव्यांग पत्रकार को मऊगंज एसडीएम ने दी अनशन की खुली चुनौती; भारतीय संविधान के अनुच्छेद २१ और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम २०१६ को ठेंगे पर रख रहा प्रशासनिक अमला, मंगलवार से शुरू होने जा रहे अनशन को मिला जनता का भारी समर्थन** **मऊगंज:** जब व्यवस्था अंधी और बहरी हो जाए तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को खुद कड़कड़ाती धूप में लोहे की तरह तपकर सड़कों पर उतरना पड़ता है, और मऊगंज में इसकी जीती-जागती तस्वीर तब देखने को मिली जब ८० प्रतिशत दिव्यांग पत्रकार दीपक कुमार गुप्ता अपनी व्हीलचेयर पर हाथों में आवेदन पत्र थामे मऊगंज अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय के सामने पहुंचे. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर वीडियो जारी करते हुए उन्होंने प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर किया, जहाँ शनिवार की छुट्टी होने के कारण कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या बाबू उनकी सुध लेने के लिए मौजूद नहीं था. इससे भी अधिक शर्मनाक पहलू यह है कि जब पूर्व में इस दिव्यांग पत्रकार ने दूरभाष के माध्यम से एसडीएम महोदय को अपनी पीड़ा से अवगत कराना चाहा, तो अधिकारी ने उनकी समस्या को गंभीरता से सुनने के बजाय बेहद तल्ख और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए दोटूक शब्दों में कहा कि 'आपका आवेदन स्वीकार नहीं होगा, जहां मर्जी हो बैठो अनशन पर, शासन से पैसा आएगा तभी मिलेगा'. एक जिम्मेदार लोक सेवक द्वारा एक दिव्यांग नागरिक को इस तरह से दुत्कारना न केवल मर्यादा के खिलाफ है बल्कि देश के सर्वोच्च कानून यानी 'भारतीय संविधान' का खुला उल्लंघन भी है. हमारे संविधान का अनुच्छेद २१ हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है, और इसी के तहत 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम २०१६' (RPWD Act 2016) अस्तित्व में आया, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि दिव्यांग व्यक्तियों को समाज में बराबरी, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के मिलना चाहिए; इस अधिनियम की धारा ३ के तहत सरकार और प्रशासन का यह वैधानिक दायित्व है कि वे दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा करें और उन्हें हर प्रकार के शोषण व मानसिक प्रताड़ना से बचाएं, लेकिन मऊगंज का प्रशासनिक अमला शायद इस कानून से पूरी तरह अनभिज्ञ है. मध्य प्रदेश सरकार जहाँ लाड़ली बहनों को हर महीने एक निश्चित तिथि पर ₹१५०० की राशि प्रदान कर रही है, वहीं समाज के सबसे लाचार वर्ग यानी दिव्यांगों और विधवाओं को मिलने वाली ₹६०० की मामूली मासिक पेंशन की कोई तारीख तय नहीं है; कभी २३, कभी २६ तो कभी महीनों की देरी के बाद मिलने वाली यह पेंशन पूरी तरह से अधिकारियों की मनमर्जी और दिव्यांगों के अपमान का जरिया बन चुकी है. इसी तानाशाही और आर्थिक कंगाली के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए दिव्यांग पत्रकार दीपक कुमार गुप्ता ने संकल्प लिया है कि चाहे जिला प्रशासन उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दे या उन्हें जेल भेज दे, यहाँ तक कि इस संघर्ष में यदि उन्हें मृत्यु भी प्राप्त हो जाए, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि बिना आत्मसम्मान के ऐसी सुविधाओं के अभाव में जीने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने आगामी मंगलवार से मऊगंज कलेक्ट्रेट के सामने शुरू होने वाले अपने 'शांतिपूर्ण क्रमिक अनशन' के लिए क्षेत्र के तमाम समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस न्याय की लड़ाई में उनका साथ दें और धरना स्थल पर एक पंडाल (टेंट) की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं. मऊगंज की आम जनता अब इस बहादुर पत्रकार के समर्थन में लामबंद हो रही है और मांग कर रही है कि सरकार और मऊगंज कलेक्टर इस प्रशासनिक उदासीनता पर तत्काल संज्ञान लें और दिव्यांगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को कानून का पाठ पढ़ाएं. #DivyangRights #PensionIssue #SocialJustice #DivyangJournalist #SDMOffice #GovernmentSchemes #SupportDivyang #VoiceOfChange #JusticeForDivyang #HumanRights #SocialMediaPower #IndiaHeadline24 #ViralVideo #FacebookReels #ShareAndSupport #TrendingNews #PublicIssue #Awareness #Anshan #RightToPension

Mauganj, Rewa | Jun 29, 2026

"आवेदन स्वीकार नहीं होगा" — दिव्यांग पत्रकार का दावा, मंगलवार से मऊगंज कलेक्ट्रेट के सामने अनशन का ऐलान

#Mauganj #DeepakGupta #Divyang #SocialSecurityPension #MadhyaPradesh #MPNews #BreakingNews #HindiNews #ViralNews #IndiaHeadline24 #YTShorts #Trending

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Mauganj, Rewa | Jun 29, 2026

मऊगंज: जिला मुख्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज के समीप संचालित 'इंडियन मसाला डोसा' के ठेले पर आज खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं। यहाँ एक ग्राहक के डोसे की प्लेट में रेंगती और मरी हुई चींटियां साफ तौर पर दिखाई दीं। हर दिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग यहाँ नाश्ता करने पहुंचते हैं, लेकिन स्वच्छता के नाम पर लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

हद तो तब हो गई जब सजग ग्राहकों ने इस पर आपत्ति जताई, तो दुकानदार जिम्मेदारी मानने के बजाय अड़ियल रवैये पर उतर आया और कुतर्क देते हुए बोला- "अगर घर के खाने में मक्खी पड़ जाए तो क्या लोग पूरा कुकर फेंक देते हैं?" यह अहंकार भरा जवाब मऊगंज के नागरिकों की जान को खतरे में डालने जैसा है। अगर इस दूषित भोजन से छात्रों को 'फूड पॉइजनिंग' हो जाए, तो जिम्मेदार कौन होगा? इस पूरे मामले ने मऊगंज के खाद्य सुरक्षा विभाग और फूड इंस्पेक्टर को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जो हर महीने मोटी तनख्वाह लेकर भी दफ्तरों में कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस बेलगाम संचालक पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है!

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मऊगंज: जिला मुख्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज के समीप संचालित 'इंडियन मसाला डोसा' के ठेले पर आज खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं। यहाँ एक ग्राहक के डोसे की प्लेट में रेंगती और मरी हुई चींटियां साफ तौर पर दिखाई दीं। हर दिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग यहाँ नाश्ता करने पहुंचते हैं, लेकिन स्वच्छता के नाम पर लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब सजग ग्राहकों ने इस पर आपत्ति जताई, तो दुकानदार जिम्मेदारी मानने के बजाय अड़ियल रवैये पर उतर आया और कुतर्क देते हुए बोला- "अगर घर के खाने में मक्खी पड़ जाए तो क्या लोग पूरा कुकर फेंक देते हैं?" यह अहंकार भरा जवाब मऊगंज के नागरिकों की जान को खतरे में डालने जैसा है। अगर इस दूषित भोजन से छात्रों को 'फूड पॉइजनिंग' हो जाए, तो जिम्मेदार कौन होगा? इस पूरे मामले ने मऊगंज के खाद्य सुरक्षा विभाग और फूड इंस्पेक्टर को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जो हर महीने मोटी तनख्वाह लेकर भी दफ्तरों में कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस बेलगाम संचालक पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है! #IndiaHeadline24 #MauganjNews #FoodSafetyScam #IndianMasalaDosa #FoodInspectorMauganj #AdulterationExposed #CollegeStudentHealth #MadhyaPradeshNews #ViralPost #GroundReport #Corruption

Mauganj, Rewa | Jun 28, 2026