खाकी पर भारी पड़ता घरेलू विवाद: जब रक्षक ही बन जाएं हिंसा का शिकार
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई (ग्राम कामथ) से सामने आई घटना केवल एक वायरल वीडियो या पुलिस और जनता के बीच की झड़प मात्र नहीं है। यह घटना हमारे सामाजिक ताने-बाने, कानून के प्रति घटते सम्मान और पुलिस बल की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर आत्मचिंतन की मांग करती है। एक महिला की सुरक्षा के लिए, उसके बुलावे पर आधी रात या किसी भी वक्त दौड़कर पहुँचने वाली 'डायल-112' की टीम को जब खुद अपनी सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़े, तो समाज के तौर पर हमें ठहरकर सोचने की जरूरत है।
### घरेलू चौखट से सड़क तक आता आक्रोश
इस घटना की शुरुआत एक आम घरेलू विवाद से हुई—एक ऐसा विवाद जो अमूमन बंद कमरों में सुलझ जाना चाहिए था। लेकिन जब बात हद से बढ़ी, तो पीड़ित महिला ने न्याय और सुरक्षा की उम्मीद में पुलिस को पुकारा।
विडंबना देखिए कि जो पुलिस टीम (आरक्षक सत्येंद्र पाल और उनके साथी) अपनी जान जोखिम में डालकर दो पक्षों के बीच बीच-बचाव करने पहुँची थी, वही हिंसक भीड़ के निशाने पर आ गई। पहली बार में विवाद शांत न होने पर जब पुलिस दोबारा स्थिति को संभालने पहुँची, तो उन पर पथराव किया गया और आरक्षक के साथ सरेआम धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।
### कानून के खौफ का खत्म होना: एक चिंताजनक संकेत
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो (भले ही इसकी तकनीकी पुष्टि बाकी हो) एक बेहद कड़वी हकीकत बयां करता है। वर्दी पहने एक सरकारी कर्मचारी, जो उस वक्त 'राज्य' और 'कानून' का प्रतिनिधित्व कर रहा है, उसके साथ ऐसी बदसलूकी दर्शाती है कि कुछ लोगों के भीतर से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।
जब समाज का एक हिस्सा कानून के रखवालों पर ही हाथ उठाने को अपनी बहादुरी समझने लगे, तो वह अराजकता की शुरुआत होती है। पुलिस पर हमला दरअसल उस व्यवस्था पर हमला है जो हमें और आपको सुरक्षित रखती है।
### रक्षकों की सुरक्षा का सवाल
अक्सर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठती हैं, लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि 'डायल-100' या 'डायल-112' पर तैनात जवान हर दिन किस मानसिक और शारीरिक तनाव के बीच काम करते हैं। वे नहीं जानते कि जिस कॉल पर वे जा रहे हैं, वहाँ उनका सामना किस तरह की उग्र भीड़ से होने वाला है। बिना किसी ठोस सुरक्षा घेरे के, महज दो या तीन पुलिसकर्मी एक हिंसक भीड़ के बीच पहुँच जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और त्वरित बैकअप की व्यवस्था पर भी विचार होना चाहिए।
### निष्कर्ष: सख्त कार्रवाई ही एकमात्र समाधान
इस मामले में पुलिस ने शिकायत के बाद प्रकरण दर्ज कर लिया है, लेकिन बात सिर्फ एक मुकदमे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। खाकी पर हाथ उठाने वाले, पथराव करने वाले और सरकारी काम में बाधा डालने वाले तत्वों को यह संदेश मिलना जरूरी है कि कानून लचीला हो सकता है, लेकिन कमजोर नहीं।
अगर आज हम अपने रक्षकों के साथ खड़ी इस हिंसक भीड़ को मूकदर्शक बनकर देखते रहे, तो कल किसी भी आम नागरिक की सुरक्षा भगवान भरोसे ही होगी। वक्त आ गया है कि ऐसी घटनाओं पर न केवल सख्त कानूनी चोट की जाए, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी वर्दी का सम्मान बहाल किया जाए।
CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh
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